24 दिस॰ 2017

The Way to the Kingdom of Heaven | Hindi Christian Video “मायाजाल को तोड़ दो” | God Is My Salvation



 सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के प्रचारकों के साथ कुछ साहचर्य और वाद-विवाद करने के बाद, आखिरकार फू जिंहुआ समझ गयी: हम परमेश्वर के विश्वासियों को केवल बाइबल से ही चिपके नहीं रहना चाहिए और बाइबल में जो कुछ भी है उस तक परमेश्वर को सीमित नहीं रखना चाहिए। हमें बाइबल से परे जाने में सक्षम होना चाहिए। हमें धार्मिक दुनिया के पादरियों और नेताओं के बंधनों और नियंत्रणों से मुक्त होना चाहिए। हमें परमेश्वर के प्रति श्रद्धा के साथ ही सत्‍य की भी खोज करनी चाहिए और अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय के निर्णय को मानने और पालन करने के लिए तैयार रहना चाहिए। तभी हम शुद्धि, उद्धार प्राप्त कर सकते हैं और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं। आखिरकार, फू जिंहुआ उस मायाजाल से मुक्त हो गयी, जिसने उसे कई वर्षों तक कैद कर रखा था, और, आखिरकार अंत के दिनों में उसने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कर लिया। इस कारण से, उसे परमेश्वर के सिंहासन के सामने स्‍वर्गारोहित कराया गया, और उसने मेम्ने के विवाह समारोह में भाग लिया।
इसके बाद, उत्तर पाने और चर्चा करने के लिए कि प्रभु की वापसी का स्वागत कैसे किया जाये, फू जिन्हुआ और उसके सहकर्मी एकत्र हुए। बाइबल की भविष्यवाणियों का अध्ययन करने के माध्यम से, उसे पता चला कि उसने केवल बादलों के साथ उतरते हुए प्रभु की भविष्यवाणियों पर ध्यान दिया है, जबकि अन्‍य भविष्यवाणियों को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया है, जैसे कि कैसे प्रभु एक चोर की तरह अवतार लेंगे और बुद्धिमान कुंवारियाँ दूल्हे का स्वागत करेंगी। उसके बाद ही उसे पता चला कि अंत के दिनों में प्रभु की वापसी इतनी सरल नहीं थी जितनी उसने कल्पना की थी, और इसके आसपास रहस्य का आवरण लिपटा हुआ है जिसे मानव जाति समझने में असमर्थ है। उसने महसूस किया कि पूर्वी बिजली की खोज और जांच करने से स्‍वयं ही इनकार करते हुए, उसके लिए धार्मिक पादरियों और नेताओं की दुष्ट गलतफहमियों को ही ध्यान में रखना अनुपयुक्‍त था। और इस प्रकार, फू जिंहुआ ने अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्यों की खोज और जांच की …

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1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...