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3 जुल॰ 2018

Second Coming of Jesus Christ | Hindi Gospel Movie Trailer "मायाजाल को तोड़ दो"

Second Coming of Jesus Christ | Hindi Gospel Movie Trailer "मायाजाल को तोड़ दो"

फू जिंहुआ चीन के एक गृह कलीसिया की एक वरिष्ठ सदस्य थी। अनेक ईसाईयों के समान, उसने उत्साहपूर्वक स्वयं को परमेश्वर को समर्पित कर दिया था, और उसके लिए उसने कड़ी मेहनत की थी। वह विशेष रूप से आत्मविश्वास से भरपूर थी, और स्वयं को ऐसे व्यक्ति के रूप में समझती थी जो वास्तव में प्रभु से प्रेम करता था। अनेक वर्षों तक प्रभु का अनुसरण करने के उपरांत, वह सम्‍पूर्ण हृदय से मानने लगी थी कि बाइबल परमेश्वर से प्रेरित है और बाइबल में वर्णित सभी वचन परमेश्वर के वचन हैं। इसलिए, अपने मन में, वो बाइबल में विश्वास करने को प्रभु में विश्वास करना समझती थी।

2 जून 2018

The True Meaning of Faith in God | Hindi Gospel Movie Trailer | "परमेश्वर में आस्था"

The True Meaning of Faith in God | Hindi Gospel Movie Trailer | "परमेश्वर में आस्था"

यू कोंगगुआंग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के लिए सुसमाचार देता है। सुसमाचार देते समय चीन की साम्यवादी सरकार उसके पीछे लगी रहती थी। वह पहाड़ों में भाग गया, जहाँ उसे स्थानीय गृह कलीसिया के एक सहकर्मी, झेंग सुन से मदद मिली। जब वे पहली बार एक दूसरे से मिले, उन्हें ऐसा लगा कि वे पहले ही बहुत समय से एक दूसरे को जानते हैं। झेंग सुन, यू कोंगगुआंग को एक फूस की झोपड़ी में ले गए जहाँ वह और उनके सह-कर्मी इकट्ठे हुए।

4 जुल॰ 2017

मेरा प्रभु कौन है


लियू झिझोंग चीन में एक स्थानीय कलीसिया के एल्डर हैं। वह 30 वर्षों से भी अधिक समय से एक विश्वासी रहे हैं, और उन्होंने निरंतर विश्वास किया है कि “बाइबल परमेश्वर से प्रेरित है,” “बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करती है, परमेश्वर में विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है, बाइबलमें विश्वास करना परमेश्वर में विश्वास करना है।” उनके हृदय में बाइबल सर्वोपरि है। बाइबिल में अपनी गहरी श्रद्धा और अटूट विश्वास के कारण, उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंतिम दिनों के कार्य को देखने या समझने की मांग नहीं की है। एक दिन, जब उन्होंने विश्वासियों को सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को ऑनलाइन पढ़ने से रोक दिया, तो उनका सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के उपदेशकों के साथ आमना-सामना हो गया । सत्य के बारे में गंभीर बहस के बाद, क्या वह अंततः बाइबल और परमेश्वर के बीच के रिश्ते को स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम थे? क्या वह बाइबल से हटकर यह समझने में सक्षम थे कि यीशु ही सत्य, मार्ग और जीवन है? क्या वह परमेश्वर के सामने स्वर्गारोहण किए जाएंगे?

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...