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1 जन॰ 2019

देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक


तुम लोगों को अवश्य परमेश्वर के कार्य के दर्शन को जान लेना चाहिए और उसके कार्य के सामान्य निर्देशों को समझ लेना चाहिए। यह एक सकारात्मक तरीके से प्रवेश है। एक बार जब तुम दर्शन के सत्यों में परिशुद्धता से निपुण हो जाते हो, तो तुम्हारा प्रवेश सुरक्षित बन जाता है; इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उसका कार्य कैसे बदलता है, तुम अपने हृदय में अडिग बने रहोगे, दर्शन के बारे में स्पष्ट रहोगे, और तुम्हारे पास तुम्हारे प्रवेश और तुम्हारी तलाश के लिए एक लक्ष्य होगा। इस तरह से, तुम्हारे भीतर का समस्त अनुभव और ज्ञान और गहराई से बढ़ेगा और अधिक परिष्कृत हो जाएगा। एक बार जब तुम बड़ी तस्वीर को उसकी सम्पूर्णता में समझ जाते हो, तो तुम जीवन में कोई नुकसान नहीं भुगतोगे, और तुम खोओगे नहीं। यदि तुम कार्यों के इन चरणों को नहीं जान लेते हो, तो तुम उनमें से प्रत्येक पर नुकसान भुगतोगे।

19 नव॰ 2018

सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए



सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए
संपूर्ण जगत में अपने कार्य की शुरूआत से ही, परमेश्वर ने अनेक लोगों को अपनी सेवा के लिए पूर्वनियत किया है, जिसमें हर व्यवसाय के लोग शामिल हैं। उसका प्रयोजन अपनी स्वयं की इच्छा को पूरा करना है और यह सुनिश्चित करना है कि पृथ्वी पर उसके कार्य को निर्बाध रूप से सफलता तक पहुँचाया जाए। परमेश्वर का लोगों को अपनी सेवा हेतु चुनने का यही प्रयोजन है। परमेश्वर की सेवा करने वाले हर व्यक्ति को परमेश्वर की इस इच्छा को अवश्य समझना चाहिए। उसके इस कार्य के माध्यम से, लोग परमेश्वर की बुद्धि और सर्वशक्तिमत्ता को बेहतर ढंग से देखने, और पृथ्वी पर उसके कार्य के सिद्धान्तों को देखने में समर्थ होते हैं। वास्तव में परमेश्वर अपना काम करने, लोगों के संपर्क में आने के लिए पृथ्वी पर आता है, ताकि वे उसके कर्मों को अधिक स्पष्ट रूप से जान सकें।

18 नव॰ 2018

पतरस ने यीशु को कैसे जाना



पतरस ने यीशु को कैसे जाना
उस समय के दौरान जो पतरस ने यीशु के साथ बिताया, उसने यीशु में अनेक प्यारे अभिलक्षणों, अनेक अनुकरणीय पहलुओं, और अनेक ऐसी चीजों को देखा जिन्होंने उसे आपूर्ति की। यद्यपि पतरस ने कई तरीकों से यीशु में परमेश्वर के अस्तित्व को देखा, और कई प्यारे गुण देखे, किन्तु पहले वह यीशु को नहीं जानता था।

19 अग॰ 2018

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "पतरस ने यीशु को कैसे जाना"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "पतरस ने यीशु को कैसे जाना"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "तुम लोगों को उस मार्ग के बारे में स्पष्ट होना चाहिए जिस पर तुम लोग चलते हो; तुम लोगों को उस मार्ग के बारे में जिसे तुम भविष्य में लोगे, और इस बारे में कि यह क्या है जिसे परमेश्वर पूर्ण बनाएगा, और तुम्हें क्या सौंपा गया है, स्पष्ट होना चाहिए। एक दिन, शायद, तुम लोगों की परीक्षा ली जाएगी, और तब यदि तुम लोग पतरस के अनुभवों से प्रेरणा प्राप्त करने में समर्थ होगे, तो यह इस बात को दर्शाएगा कि तुम लोग वास्तव में पतरस के मार्ग पर चल रहे हो। पतरस के विश्वास और प्रेम के लिए, तथा परमेश्वर के प्रति उसकी निष्ठा के लिए उसकी परमेश्वर के द्वारा प्रशंसा की गई थी। और यह उसके हृदय में परमेश्वर के लिए ईमानदारी और ललक ही थी कि परमेश्वर ने उसे पूर्ण बनाया। यदि तुम लोगों के पास पतरस के जैसा प्रेम और विश्वास है, तो यीशु तुम लोगों को निश्चित रूप से पूर्ण बनाएगा।"

3 जुल॰ 2018

Second Coming of Jesus Christ | Hindi Gospel Movie Trailer "मायाजाल को तोड़ दो"

Second Coming of Jesus Christ | Hindi Gospel Movie Trailer "मायाजाल को तोड़ दो"

फू जिंहुआ चीन के एक गृह कलीसिया की एक वरिष्ठ सदस्य थी। अनेक ईसाईयों के समान, उसने उत्साहपूर्वक स्वयं को परमेश्वर को समर्पित कर दिया था, और उसके लिए उसने कड़ी मेहनत की थी। वह विशेष रूप से आत्मविश्वास से भरपूर थी, और स्वयं को ऐसे व्यक्ति के रूप में समझती थी जो वास्तव में प्रभु से प्रेम करता था। अनेक वर्षों तक प्रभु का अनुसरण करने के उपरांत, वह सम्‍पूर्ण हृदय से मानने लगी थी कि बाइबल परमेश्वर से प्रेरित है और बाइबल में वर्णित सभी वचन परमेश्वर के वचन हैं। इसलिए, अपने मन में, वो बाइबल में विश्वास करने को प्रभु में विश्वास करना समझती थी।

7 जून 2018

New Hindi Christian Song 2018 | यीशु के प्रति फ़रीसियों के विरोध का मूल कारण


New Hindi Christian Song 2018 | यीशु के प्रति फ़रीसियों के विरोध का मूल कारण

यीशु के प्रति फ़रीसियों के विरोध का मूल कारण जानना चाहोगे फरीसी, यीशु के ख़िलाफ़ क्यों थे? जानना चाहोगे उनका सार-तत्व क्या है? जानना चाहोगे फरीसी, यीशु के ख़िलाफ़ क्यों थे? जानना चाहोगे उनका सार-तत्व क्या है? बस उनके ख़्यालों में था मसीहा, यकीं करते थे, आयेगा वो इक दिन, खोजते नहीं ज़िंदगी की सच्चाई।

6 जून 2018

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना" (भाग दो)

मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना (भाग दो)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "जब एक बार विजय के कार्य को पूरा कर लिया जाता है, तब मनुष्य को एक सुन्दर संसार में पहुंचाया जाएगा। निश्चित रूप से, यह जीवन तब भी पृथ्वी पर ही होगा, परन्तु यह मनुष्य के आज के जीवन से पूरी तरह से भिन्न होगा। यह वह जीवन है जो मानवजाति के तब पास होगा जब सम्पूर्ण मानवजाति पर विजय प्राप्त कर लिया जाता है, यह पृथ्वी पर मनुष्य के लिए, और मानवजाति के लिए एक नई शुरुआत होगी कि उसके पास ऐसा जीवन हो जो इस बात का सबूत होगा कि मानवजाति ने एक नए एवं सुन्दर आयाम में प्रवेश कर लिया है। यह पृथ्वी पर मनुष्य एवं परमेश्वर के जीवन की शुरुआत होगी।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...