अनुग्रह के युग में, यूहन्ना ने यीशु का मार्ग प्रशस्त किया। वह स्वयं परमेश्वर का कार्य नहीं कर सकता था और उसने मात्र मनुष्य का कर्तव्य पूरा किया था। यद्यपि यूहन्ना प्रभु का अग्रदूत था, फिर भी वह परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता था; वह आत्मा के द्वारा उपयोग किया गया मात्र एक मनुष्य था। यीशु के बपतिस्मा के बाद "पवित्र आत्मा कबूतर के समान उस पर उतरा।" तब उसने अपना काम आरम्भ किया, अर्थात्, उसने मसीह की सेवकाई करना प्रारम्भ किया। इसीलिए उसने परमेश्वर की पहचान को अपनाया, क्योंकि वह परमेश्वर से आया था। इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि इससे पहले उसका विश्वास कैसा था—कदाचित् कभी-कभी यह दुर्बल था, या कभी-कभी यह मज़बूत था—अपनी सेवकाई को करने से पहले यह सब उसका सामान्य मानव जीवन था। उसका बपतिस्मा (अभिषेक) होने के पश्चात्, उसके पास तुरन्त ही परमेश्वर की सामर्थ्य और महिमा थी, और इस प्रकार उसने अपनी सेवकाई आरंभ की।
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13 जन॰ 2019
12 जन॰ 2019
देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो
आज तुम्हें मालूम होना चाहिये कि तुम पर विजय कैसे हो, और लोग खुद पर विजय उपरांत अपना आचरण कैसा रखते हैं। तुम यह कह सकते हो कि तुम पर विजय पा ली गयी है, पर क्या तुम मृत्युपर्यंत आज्ञाकारी रहोगे? संभावनाओं की परवाह किए बगैर तुम में पूरे अंत तक अनुसरण करने की क्षमता होनी चाहिए और तुम्हें किसी भी परिस्थिति में परमेश्वर पर विश्वास नहीं खोना चाहिए। अतंतः तुम्हें गवाही के दो पक्ष प्राप्त करने हैं: अय्यूब की गवाही-मृत्यु तक आज्ञाकारिता और पतरस की गवाही - परमेश्वर का सर्वोच्च प्रेम। एक मामले में तुम्हें अय्यूब की तरह होना चाहिए, उसके पास कुछ भी सांसारिक संसाधन नहीं थे और शारीरिक पीड़ा से वह घिरा हुआ था, तब भी उसने यहोवा का नाम नहीं त्यागा।
10 जन॰ 2019
देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार
परमेश्वर के द्वारा मनुष्य को सीधे तौर पर पवित्रात्मा के साधनों के माध्यम से या आत्मा के रूप में बचाया नहीं जाता है, क्योंकि उसके आत्मा को मनुष्य के द्वारा न तो देखा जा सकता है और न ही स्पर्श किया जा सकता है, और मनुष्य के द्वारा उस तक पहुँचा नहीं जा सकता है। यदि उसने आत्मा के तरीके से सीधे तौर पर मनुष्य को बचाने का प्रयास किया होता, तो मनुष्य उसके उद्धार को प्राप्त करने में असमर्थ होता। और यदि परमेश्वर सृजित मनुष्य का बाहरी रूप धारण नहीं करता, तो वे इस उद्धार को पाने में असमर्थ होते।
1 जन॰ 2019
देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक
तुम लोगों को अवश्य परमेश्वर के कार्य के दर्शन को जान लेना चाहिए और उसके कार्य के सामान्य निर्देशों को समझ लेना चाहिए। यह एक सकारात्मक तरीके से प्रवेश है। एक बार जब तुम दर्शन के सत्यों में परिशुद्धता से निपुण हो जाते हो, तो तुम्हारा प्रवेश सुरक्षित बन जाता है; इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उसका कार्य कैसे बदलता है, तुम अपने हृदय में अडिग बने रहोगे, दर्शन के बारे में स्पष्ट रहोगे, और तुम्हारे पास तुम्हारे प्रवेश और तुम्हारी तलाश के लिए एक लक्ष्य होगा। इस तरह से, तुम्हारे भीतर का समस्त अनुभव और ज्ञान और गहराई से बढ़ेगा और अधिक परिष्कृत हो जाएगा। एक बार जब तुम बड़ी तस्वीर को उसकी सम्पूर्णता में समझ जाते हो, तो तुम जीवन में कोई नुकसान नहीं भुगतोगे, और तुम खोओगे नहीं। यदि तुम कार्यों के इन चरणों को नहीं जान लेते हो, तो तुम उनमें से प्रत्येक पर नुकसान भुगतोगे।
30 दिस॰ 2018
देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो
मनुष्य का अपना कर्तव्य निभाना, वास्तव में, उस सबका निष्पादन है जो मनुष्य के भीतर अन्तर्निहित है, अर्थात्, जो मनुष्य के लिए संभव है, उसका निष्पादन है। यह इसके बाद ही है कि उसका कर्तव्य पूरा होता है। मनुष्य की सेवा के दौरान मनुष्य के दोष उसके प्रगतिशील अनुभवों और न्याय के अनुभव की उसकी प्रक्रिया के माध्यम से धीरे-धीरे कम होते जाते हैं; वे मनुष्य के कर्तव्य में बाधा हैं या प्रभाव नहीं डालते हैं। वे लोग जो सेवा करना बंद कर देते हैं या हार मान लेते हैं और ऐसे दोषों के भय से पीछे हट जाते हैं जो सेवा में विद्यमान हो सकते हैं सभी मनुष्यों में सबसे कायर होते हैं।
29 दिस॰ 2018
भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक(1)
परमेश्वर ने देहधारण किया क्योंकि शैतान का आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ उसके कार्य का विषय नहीं है, परन्तु मनुष्य है, जो शरीर से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया गया है। निश्चित रूप से चूँकि मनुष्य की देह को भ्रष्ट किया गया है इसलिए परमेश्वर ने हाड़-मांस के मनुष्य को अपने कार्य का विषय बनाया है; इसके अतिरिक्त, क्योंकि मनुष्य भ्रष्टता का विषय है, उसने मनुष्य को अपने उद्धार के कार्य के समस्त चरणों के दौरान अपने कार्य का एकमात्र विषय बनाया है। मनुष्य एक नश्वर प्राणी है, और वह हाड़-मांस एवं लहू से बना हुआ है, और एकमात्र परमेश्वर ही है जो मनुष्य को बचा सकता है। इस रीति से, परमेश्वर को अपना कार्य करने के लिए ऐसा देह बनना होगा जो मनुष्य के समान ही गुणों को धारण करता है, ताकि उसका कार्य बेहतर प्रभावों को हासिल कर सके।
27 दिस॰ 2018
भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन
परमेश्वर के कार्य का प्रत्येक चरण सारी मानवजाति के वास्ते है, और समूची मानवजाति की ओर निर्देशित है। यद्यपि यह देह में उसका कार्य है, फिर भी इसे अब भी सारी मानवजाति की ओर निर्देशित किया गया है; वह सारी मानवजाति का परमेश्वर है, वह सभी सृजे गए और न सृजे गए प्राणियों का परमेश्वर है। यद्यपि देह में उसका कार्य एक सीमित दायरे के भीतर होता है, और इस कार्य का विषय भी सीमित होता है, फिर भी हर बार जब वह अपना कार्य करने के लिए देह धारण करता है तो वह अपने कार्य का एक विषय चुनता है जो अत्यंत प्रतिनिधिक है; वह सामान्य एवं मामूली लोगों के एक समूह को नहीं चुनता है कि उन पर कार्य करे, किन्तु इसके बजाए अपने कार्य के विषय के रूप में लोगों के ऐसे समूह को चुनता है जो देह में उसके कार्य के प्रतिनिधि होने में सक्षम हैं। लोगों के ऐसे समूह को चुना गया है क्योंकि देह में उसके कार्य का दायरा सीमित होता है, और इसे विशेष रूप से उसके देहधारी शरीर के लिए तैयार किया गया है, और इसे विशेष रूप से देह में उसके कार्य के लिए चुना गया है।
19 दिस॰ 2018
परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो
इससे पहले कि यीशु अपना कार्य करता, वह अपनी सामान्य मानवता में जीया। कोई नहीं कह सकता था कि वह परमेश्वर है, किसी को भी पता नहीं चला कि वह देहधारी परमेश्वर है; लोग उसे केवल एक पूर्णतः साधारण व्यक्ति समझते थे। उसकी सर्वथा सामान्य, साधारण मानवता इस बात का प्रमाण थी कि परमेश्वर ने देह में देहधारण किया है, और यह कि अनुग्रह का युग देहधारी परमेश्वर के कार्य का युग है, न कि पवित्रात्मा के कार्य का युग।
29 नव॰ 2018
देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं
देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं
परमेश्वर के द्वारा किए गए कार्य के प्रत्येक चरण का एक वास्तविक महत्व है। जब यीशु का आगमन हुआ, वह पुरुष था, और इस बार वह स्त्री है। इससे, तुम देख सकते हो कि परमेश्वर ने अपने कार्य के लिए पुरुष और स्त्री दोनों का सृजन किया और वह लिंग के बारे में कोई भी भेदभाव नहीं करता है। जब उसका आत्मा आगमन करता है, तो वह इच्छानुसार किसी भी देह को धारण कर सकता है और वह देह उसका ही प्रतिनिधित्व करती है। चाहे यह पुरुष हो या स्त्री, दोनों ही परमेश्वर को प्रकट करते हैं क्योंकि यह उसका देहधारी शरीर है।
23 नव॰ 2018
देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर
देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर
बहुत वर्षों से जैसे-जैसे परमेश्वर का आत्मा पृथ्वी पर कार्य करता जा रहा है वह निरंतर खोजता आ रहा है। युगों भर में परमेश्वर ने अपने कार्य को करने के लिए बहुत से लोगों का उपयोग किया है। फिर भी, परमेश्वर के आत्मा के पास आराम के लिए अभी भी कोई उपयुक्त स्थान नहीं है। इसलिए परमेश्वर भिन्न-भिन्न लोगों के बीच निरंतर इधर-उधर घूमते हुए अपना कार्य करता है, और कुल मिला कर वह इसे करने के लिए लोगों का उपयोग करता है। अर्थात्, इन सभी वर्षों में, परमेश्वर का कार्य कभी नहीं रुका है, बल्कि पूरी तरह से आज के दिन तक भी यह लगातार मनुष्य में आगे बढ़ाया जा रहा है।
21 अक्टू॰ 2018
परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने
- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने
- I
- इंसान की कद-काठी, ज्ञान, प्रेम, आस्था,
- आज्ञाकारिता और जो कुछ देखता है इंसान,
- आया है वो सब वचन के न्याय से।
- टिकी है आस्था तुम्हारी उसके वचन से।
- देखता है इंसान परमेश्वर के अद्भुत कार्य को इसके ज़रिये।
- बहुत कुछ है जो इंसान की समझ के परे है;
- चहुँ ओर हैं चमत्कार और रहस्य बड़े हैं।
- और बहुतों ने इसीलिये कर दिया समर्पण।
- उसके वचन के न्याय के परे कोई जाता नहीं,
- और अंधेरा कोई उसके अधिकार पर व्याप्त होता नहीं।
- इंसान होता है समर्पित, उसके देहधारण, अधिकार
- और वचन के न्याय की वजह से।
3 जुल॰ 2018
Second Coming of Jesus Christ | Hindi Gospel Movie Trailer "मायाजाल को तोड़ दो"
Second Coming of Jesus Christ | Hindi Gospel Movie Trailer "मायाजाल को तोड़ दो"
फू जिंहुआ चीन के एक गृह कलीसिया की एक वरिष्ठ सदस्य थी। अनेक ईसाईयों के समान, उसने उत्साहपूर्वक स्वयं को परमेश्वर को समर्पित कर दिया था, और उसके लिए उसने कड़ी मेहनत की थी। वह विशेष रूप से आत्मविश्वास से भरपूर थी, और स्वयं को ऐसे व्यक्ति के रूप में समझती थी जो वास्तव में प्रभु से प्रेम करता था। अनेक वर्षों तक प्रभु का अनुसरण करने के उपरांत, वह सम्पूर्ण हृदय से मानने लगी थी कि बाइबल परमेश्वर से प्रेरित है और बाइबल में वर्णित सभी वचन परमेश्वर के वचन हैं। इसलिए, अपने मन में, वो बाइबल में विश्वास करने को प्रभु में विश्वास करना समझती थी।
19 मई 2018
New Hindi Christian Song 2018 | अंतिम दिनों का मसीह लाता है राज्य का युग
New Hindi Christian Song 2018 | अंतिम दिनों का मसीह लाता है राज्य का युग
17 मई 2018
New Hindi Christian Song 2018 | "परमेश्वर है लौटा जीत के साथ" | All peoples worship God
New Hindi Christian Song 2018 | "परमेश्वर है लौटा जीत के साथ" | All peoples worship God
परमेश्वर का व्यक्तित्व है ब्रम्हांड के सामने,
प्रकट हुआ है पूरब में वो!
किसकी हिम्मत झुककर करे न उसकी आराधना?
किसकी हिम्मत न बुलाए उसे सच्चा परमेश्वर?
किसकी हिम्मत दिल में आदर से न देखे उसकी तरफ़?
किसकी हिम्मत जो करे न उसकी जय और मनाए ख़ुशियाँ?
परमेश्वर के लोग सुनते हैं उसकी आवाज़।
12 अप्रैल 2018
New Hindi Christian Song 2018 | "हो गया है पतन बेबीलोन महान का" | Judgment Day
New Hindi Christian Song 2018 | "हो गया है पतन बेबीलोन महान का" | Judgment Day
हो गया है पतन बेबीलोन महान का
संसार का पतन अब हो रहा है!
बेबीलोन अब पंगु हो रहा है!
संसार का पतन अब हो रहा है!
बेबीलोन अब पंगु हो रहा है!
27 मार्च 2018
The Blessing of God | Hindi Gospel music "परमेश्वर की ताड़ना और न्याय है मनुष्य की मुक्ति का प्रकाश"
The Blessing of God | Hindi Gospel music "परमेश्वर की ताड़ना और न्याय है मनुष्य की मुक्ति का प्रकाश"
The Blessing of God | Hindi Gospel music "परमेश्वर की ताड़ना और न्याय है मनुष्य की मुक्ति का प्रकाश"
अपने जीवनकाल में स्वच्छ होने के लिए,
स्वभाव में बदल जाने के लिए,
एक अर्थपूर्ण जीवन जीने के लिए,
प्राणी के रूप में अपना कर्तव्य पूरा करने के लिए,
तुम्हें करना होगा स्वीकार परमेश्वर की ताड़ना और न्याय,
परमेश्वर के अनुशासन और प्रहार को होने न देना ख़ुद से जुदा,
यही करेगा तुम्हें मुक्त शैतान की चालबाज़ी से,
26 मार्च 2018
New Hindi Christian Song 2018 | अंतिम परिणाम जिसे हासिल करना परमेश्वर के कार्य का लक्ष्य है
New Hindi Christian Song 2018 | अंतिम परिणाम जिसे हासिल करना परमेश्वर के कार्य का लक्ष्य है
उसके इतने सारे कार्यों में,
सच्चे तजुर्बे वाले हर किसी को, अनुभव होता श्रद्धा और भय का,
जो है प्रशंसा से बढ़कर।
24 मार्च 2018
Hindi Gospel Movie clip "प्रतीक्षारत" – उन लोगों का अंत जो प्रभु के दूसरे आगमन का प्रतिरोध करते हैं
Hindi Gospel Movie clip "प्रतीक्षारत" – उन लोगों का अंत जो प्रभु के दूसरे आगमन का प्रतिरोध करते हैं
वह भला कैसे प्रभु को प्रकट होते देख सकता है और उसके बावजूद प्रभु के दूसरे आगमन से इन्कार कर सकता है? यह कैसे हो सकता है कि वह हमेशा प्रभु के आगमन का ध्यान रखे और प्रतीक्षा करे, किन्तु अपनी मृत्यु के समय अपने पीछे जीवन भर का पछतावा छोड़ जाए? इस मूवी क्लिप में आपको इसका उत्तर मिलेगा।
21 मार्च 2018
परमेश्वर के कथन "क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है"
परमेश्वर के कथन "क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है"
सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं "यीशु के कार्य के बिना मानवजाति दुखों से पार नहीं पा सकती थी, परन्तु बिना देहधारण के आज वे कभी परमेश्वर की सराहना नहीं पा सकते या नये युग में प्रवेश नहीं कर सकते। इस साधारण मनुष्य के आगमन के बिना, तुम सबको कभी भी यह अवसर नहीं मिलता या तुम लोग कभी भी इस योग्य नहीं हो सकते कि परमेश्वर के सच्चे मुख का दर्शन कर सको। क्योंकि तुम जैसों को तो बहुत पहले ही नष्ट कर दिया जाना चाहिए था, परंतु परमेश्वर ने दूसरी बार परमेश्वर के देहधारण के कारण तुम लोगों को क्षमा किया है और तुम लोगों पर दया दिखाई है। खैर, मैं अंत में इन शब्दों के साथ तुम सब से विदा लेना चाहता हूं: यह साधारण-सा मनुष्य जो देहधारी परमेश्वर है, तुम लोगों के लिये बहुत महत्वपूर्ण है।
19 मार्च 2018
"प्रतीक्षारत" – प्रभु के दूसरे आगमन के लिए हमें कैसे देखनी और प्रतीक्षा करनी चाहिए?
"प्रतीक्षारत" – प्रभु के दूसरे आगमन के लिए हमें कैसे देखनी और प्रतीक्षा करनी चाहिए?
जब प्रभु दूसरी बार आएंगे तो क्या वे बादलों से अवतरित होंगे, या क्या वे एक चोर की तरह चुपके से आएंगे? आप प्रभु के दूसरे आगमन का सामना कैसे करेंगे? क्या आप किसी झूठे मसीह द्वारा बहकाए जाने को लेकर इतने अधिक भयभीत रहेंगे कि ’उनकी’ तलाश करने से ही अस्वीकार कर देंगे, या फिर आप एक चतुर कुंवारी की तरह आचरण करेंगे और परमेश्वर की वाणी पर सावधानीपूर्वक ध्यान देंगे?
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1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?
XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...
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आराधना गीत मेरा घर कहां है I अपने नन्हें काग़ज़ पर रंगों से, नन्हा-सा घर बनाती हूं मैं, प्यारी मम्मी घर में है,...
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परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है परमेश्वर भिन्न-भिन्न युगों के अनुसार अपने वचन कहता है और अपना कार्य करता है, तथा ...
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Hindi Christian Song | मेरा घर कहां है (Lyrics) अपने नन्हें काग़ज़ पर रंगों से, नन्हा-सा घर बनाती हूं मैं, प्यारी मम्मी घर में है, ...