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30 अग॰ 2019

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

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1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"जो मुझ से, 'हे प्रभु! हे प्रभु!' कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है। उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, 'हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत से आश्‍चर्यकर्म नहीं किए?' तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा, 'मैं ने तुम को कभी नहीं जाना। हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ" (मत्ती 7:21-23)।
"तू परमेश्‍वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।" (मत्ती 22:37-39)।
"यदि कोई मुझ से प्रेम रखेगा तो वह मेरे वचन को मानेगा … जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता" (युहन्ना 14:23-24)।
"यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे …" (युहन्ना 8:31)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
इस वक्त पवित्र आत्मा जिस मार्ग को अपनाता है वह परमेश्वर के वास्तविक वचन हैं। अतः उस मार्ग पर चलने के इच्छुक व्यक्ति को देहधारी परमेश्वर के वास्तविक वचनों का पालन करना चाहिए, और उन्हें खाना तथा पीना चाहिए। वह वचनों का कार्य कर रहा है, और सब कुछ उसके वचनों से कहा जाता है, और सब कुछ उसके वचनों, उसके वास्तविक वचन, पर स्थापित है। परमेश्वर का सत्य वचन।

28 अग॰ 2019

मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है: परमेश्वर का अधिकार" (उद्धरण, मंच पर सस्वर पाठ)


मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है: परमेश्वर का अधिकार" (उद्धरण, मंच पर सस्वर पाठ)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "परमेश्वर का अधिकार हर जगह, हर घण्टे, और हर एक क्षण है। यदि स्वर्ग और पृथ्वी समाप्त जाएँ, तब भी उसका अधिकार कभी समाप्त नहीं होगा, क्योंकि वह स्वयं परमेश्वर है, वह अद्वितीय अधिकार धारण करता है, और उसका अधिकार लोगों, घटनाओं या चीज़ों के द्वारा, अंतरीक्ष के द्वारा या भूगोल के द्वारा प्रतिबन्धित या सीमित नहीं होता है। परमेश्वर हमेशा अपने अधिकार को काम में लाता है, अपनी ताक़त दिखाता है, हमेशा की तरह अपने प्रबंधन के कार्य को करता रहता है; वह हमेशा सभी चीज़ों के ऊपर शासन करता है, सभी चीज़ों का भरण-पोषण करता है, और सभी चीज़ों का आयोजन करता है, ठीक वैसे ही जैसे उसने हमेशा से किया था। इसे कोई नहीं बदल सकता है। यह एक तथ्य है; यह आदि काल से अपरिवर्तनीय सत्य है।"

सम्बन्धित सामग्री:प्रार्थना की शक्ति, आइए वास्तविक जीवन में परमेश्वर की सर्वशक्तिमानता और संप्रभुता को जानें।

26 अग॰ 2019

2. बाइबल के धर्म-शास्त्रीय ज्ञान पर भरोसा करते हुए यदि कोई परमेश्वर पर विश्वास करता है तो इसका क्या अंजाम होगा?

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2. बाइबल के धर्म-शास्त्रीय ज्ञान पर भरोसा करते हुए यदि कोई परमेश्वर पर विश्वास करता है तो इसका क्या अंजाम होगा?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उनका मन मुझ से दूर रहता है। और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्योंकि मनुष्यों की विधियों को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं।" (मत्ती 15:8-9)।
"क्योंकि शब्द मारता है, पर आत्मा जिलाता है" (2 कुरिन्थियों 3:6)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
लोग वचनों और सिद्धांतों को जितना अधिक बोलते हैं, वे परमेश्वर से उतना ही दूर भटकते हैं, और वे मनुष्य के सार को जानने में उतना ही अधिक अक्षम हो जाते हैं, और वे उतना ही अधिक परमेश्वर की अवज्ञा करते हैं, और वे परमेश्वर की अपेक्षाओं से उतना ही दूर चले जाते हैं।

25 अग॰ 2019

1. सच्चाई क्या है? बाइबल का ज्ञान और सिद्धांत क्या है?

XVII. सत्य की वास्तविकता और बाइबल के ज्ञान और सिद्धांत के बीच में कैसे भेद करें, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

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1. सच्चाई क्या है? बाइबल का ज्ञान और सिद्धांत क्या है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"आदि में वचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, और वचन परमेश्‍वर था।" "और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, …" (युहन्ना 1:1, 14)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ" (युहन्ना 14:6)।
"सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्य है" (युहन्ना 17:17)।
"उसने उनसे कहा, 'यशायाह ने तुम कपटियों के विषय में बहुत ठीक भविष्यद्वाणी की; जैसा लिखा है: "ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उनका मन मुझ से दूर रहता है। ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्योंकि मनुष्यों की आज्ञाओं को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं।" क्योंकि तुम परमेश्‍वर की आज्ञा को टालकर मनुष्यों की रीतियों को मानते हो।' उसने उनसे कहा, 'तुम अपनी परम्पराओं को मानने के लिये परमेश्‍वर की आज्ञा कैसी अच्छी तरह टाल देते हो! … इस प्रकार तुम अपनी परम्पराओं से, जिन्हें तुम ने ठहराया है, परमेश्‍वर का वचन टाल देते हो; और ऐसे ऐसे बहुत से काम करते हो'" (मरकुस 7:6-9,13)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर ही मार्ग, सत्य और जीवन है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है" से

23 अग॰ 2019

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "सर्वशक्तिमान का आह भरना" (अंश II)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "सर्वशक्तिमान का आह भरना" (अंश II)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "वे जो बुरी तरह से दुख में हैं सर्वशक्तिमान उन पर करुणा दिखाता है। साथ ही, वह उन लोगों से ऊब चुका है जो होश में नहीं है, क्योंकि उसे उनसे प्रत्युत्तर पाने में लंबा इंतजार करना पड़ा है। वह खोजने की इच्छा करता है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारी आत्मा को खोजना चाहता है। वह तुम्हें भोजन-पानी देना चाहता है, जगाना चाहता है, ताकि तुम फिर और भूखे और प्यासे न रहो।

21 अग॰ 2019

2. यह क्यों कहा गया है कि "त्रिविध परमेश्वर" सबसे बेतुकी बात है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
यीशु के देहधारी होने के सत्य के विकसित होने के बाद ही मनुष्य इस बात को महसूस कर पाया: यह न केवल स्वर्ग का परमेश्वर है, बल्कि यह पुत्र भी है, और यहां तक कि वह आत्मा भी है। यह पारम्परिक धारणा है जिसे मनुष्य धारण किए हुए है, कि एक ऐसा परमेश्वर है जो स्वर्ग में हैः एक त्रित्व जो पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा है, और ये सभी एक में हैं। सभी मानवों की यही धारणाएं हैं: परमेश्वर केवल एक ही परमेश्वर है, परन्तु उसके तीन भाग हैं, जिसे कष्टदायक रूप से पारंपरिक धारणा में दृढ़ता से जकड़े सभी लोग पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा मानते हैं। केवल यही तीनों संपूर्ण परमेश्वर को बनाते हैं। बिना पवित्र पिता के परमेश्वर संपूर्ण नहीं बनता है। इसी प्रकार से परमेश्वर पुत्र और पवित्र आत्मा के बिना संपूर्ण नहीं है।

20 अग॰ 2019

1. वह सच्चा परमेश्वर जिसने आकाश, पृथ्वी और सब कुछ बनाया है, एक है या तीन है?

XVI. हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए कि परमेश्वर वास्तव में त्रिविध परमेश्वर है, या एक ही सच्चा परमेश्वर है

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1. वह सच्चा परमेश्वर जिसने आकाश, पृथ्वी और सब कुछ बनाया है, एक है या तीन है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"फिलिप्पुस ने उससे कहा, 'हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे, यही हमारे लिये बहुत है।' यीशु ने उससे कहा, 'हे फिलिप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूँ, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है। तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा? क्या तू विश्‍वास नहीं करता कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूँ, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है'" (युहन्ना 14:8-10)।
"मैं और पिता एक हैं" (यूहन्ना 10:30)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर वह है जो सभी चीज़ों पर राज्य करता है, और सभी चीज़ों का प्रबंधन करता है। जो कुछ है वह उसी ने रचा है, जो कुछ है उसकी व्यवस्था वही करता है और जो कुछ है उस पर वही राज्य करता है और सभी चीज़ें उसी के द्वारा पोषित होती हैं। यह परमेश्वर का पद और पहचान है। सभी चीजों के लिए और सब कुछ जो है, परमेश्वर की असली पहचान सृष्टिकर्ता की है, और वह सभी चीज़ों का शासक है। इस प्रकार की पहचान परमेश्वर की है और वह सभी बातों में अद्वितीय है। परमेश्वर की कोई भी रचना - चाहे वह मनुष्य के मध्य हो या आत्मिक दुनिया में होः किसी भी साधन या बहाने का उपयोग करके परमेश्वर की पहचान और पद को परमेश्वर का वेष धारण करने या हटाने के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि सभी बातों में वह ही एक है जो इस पहचान, शक्ति, अधिकार, और सभी बातों पर राज्य करने की योग्यता को अपने अधीन रखता है: हमारा अद्वितीय परमेश्वर स्वयं।

17 अग॰ 2019

Hindi Christian Skit | क्या आपने सच्चा प्रायश्चित किया है?


Hindi Christian Video | क्या आपने सच्चा प्रायश्चित किया है?

किसी समय, झांग मिंगेन एक गृह कलीसिया में प्रचारक था। उसने बरसों प्रभु में आस्था रखी और उस दौरान, वह हर समय, प्रचार करता, कार्य करता, कष्ट उठाता, और प्रभु के लिये ख़ुद को खपाता था। इस तरह उसे लगता था कि उसने सच्चा प्रायश्चित और बदलाव हासिल कर लिया है। लेकिन, कलीसिया के चुनाव में, झांग मिंगेन ने दूसरे भाई-बहनों को अगुवा और उपयाजक चुने जाते देखा, जबकि उसे सभाओं के आयोजन का कार्य दिया गया। हालाँकि ऊपर से तो उसने स्वीकृति और समर्पण की भावना दिखाई, लेकिन वह बेहद नाख़ुश था।

16 अग॰ 2019

4. क्या धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग सभी वास्तव में परमेश्वर द्वारा प्रतिष्ठित हैं? क्या धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों के प्रति स्वीकृति और आज्ञाकारिता परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता और उसके अनुसरण को दर्शा सकती हैं?

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4. क्या धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग सभी वास्तव में परमेश्वर द्वारा प्रतिष्ठित हैं? क्या धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों के प्रति स्वीकृति और आज्ञाकारिता परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता और उसके अनुसरण को दर्शा सकती हैं?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"इसलिये अब सुन, इस्राएलियों की चिल्‍लाहट मुझे सुनाई पड़ी है, और मिस्रियों का उन पर अन्धेर करना भी मुझे दिखाई पड़ा है। इसलिये आ, मैं तुझे फ़िरौन के पास भेजता हूँ कि तू मेरी इस्राएली प्रजा को मिस्र से निकाल ले आए" (निर्गमन 3:9-10)।
"भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, 'हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है?' ... उसने उससे कहा, 'मेरे मेमनों को चरा।' उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, 'हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है?' ... उसने उससे कहा, 'मेरी भेड़ों की रखवाली कर' (युहन्ना 21:15-16)।
"मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियाँ दूँगा: और जो कुछ तू पृथ्वी पर बाँधेगा, वह स्वर्ग में बंधेगा; और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा, वह स्वर्ग में खुलेगा" (मत्‍ती 16:19)।
"मनुष्यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्‍वर की आज्ञा का पालन करना ही हमारा कर्तव्य है" (प्रेरितों 5:29)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्यक्ति के द्वारा किए जाने वाले कार्य का इस्तेमाल परमेश्वर, मसीह और पवित्र आत्मा के कार्य के साथ सहयोग करने के लिए करता है। यह मनुष्य परमेश्वर के द्वारा मनुष्य के बीच में खड़ा किया गया है, वह परमेश्वर के चुने हुए लोगों का नेतृत्व करने के लिए है, और परमेश्वर ने उसे मानवीय सहयोग का कार्य करने के लिए भी खड़ा किया है। इस तरह का व्यक्ति, जो मानवीय सहयोग का कार्य करने में सक्षम है, मनुष्य से परमेश्वर की अपेक्षाओं और जो कार्य पवित्र आत्मा के द्वारा किया जाना चाहिए, वह उसके माध्यम से पूरा किया जाता है।

15 अग॰ 2019

3. क्यों परमेश्वर के कार्य का हर नया चरण धार्मिक दुनिया की प्रचंड अवज्ञा और निंदा का सामना करता है? इसका मूल कारण क्या है?


सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, पवित्र आत्मा का कार्य, परमेश्वर को जानना
3. क्यों परमेश्वर के कार्य का हर नया चरण धार्मिक दुनिया की प्रचंड अवज्ञा और निंदा का सामना करता है? इसका मूल कारण क्या है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"फिर वह दृष्‍टान्तों में उनसे बातें करने लगा: 'किसी मनुष्य ने दाख की बारी लगाई, और उसके चारों ओर बाड़ा बाँधा, और रस का कुण्ड खोदा, और गुम्मट बनाया; और किसानों को उसका ठेका देकर परदेश चला गया। फिर फल के मौसम में उसने किसानों के पास एक दास को भेजा कि किसानों से दाख की बारी के फलों का भाग ले। पर उन्होंने उसे पकड़कर पीटा और छूछे हाथ लौटा दिया। फिर उसने एक और दास को उनके पास भेजा; उन्होंने उसका सिर फोड़ डाला और उसका अपमान किया। फिर उसने एक और को भेजा; उन्होंने उसे मार डाला। तब उसने और बहुतों को भेजा; उनमें से उन्होंने कुछ को पीटा, और कुछ को मार डाला। अब एक ही रह गया था, जो उसका प्रिय पुत्र था; अन्त में उसने उसे भी उनके पास यह सोचकर भेजा कि वे मेरे पुत्र का आदर करेंगे। पर उन किसानों ने आपस में कहा, 'यही तो वारिस है; आओ, हम इसे मार डालें, तब मीरास हमारी हो जाएगी।' और उन्होंने उसे पकड़कर मार डाला, और दाख की बारी के बाहर फेंक दिया। इसलिये दाख की बारी का स्वामी क्या करेगा? वह आकर उन किसानों का नाश करेगा, और दाख की बारी दूसरों को दे देगा'" (मरकुस 12:1-9)।

14 अग॰ 2019

2. परमेश्वर केवल उस कलीसिया को आशीष क्यों देता है जो उसके कार्य को स्वीकार कर उसका अनुपालन करती है? वह धार्मिक संगठनों को क्यों शाप देता है?

XIV. परमेश्वर की कलीसिया और धार्मिक संस्थाओं के बीच रही भिन्नता पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, परमेश्वर को जानना, फरीसियों के मार्ग
2. परमेश्वर केवल उस कलीसिया को आशीष क्यों देता है जो उसके कार्य को स्वीकार कर उसका अनुपालन करती है? वह धार्मिक संगठनों को क्यों शाप देता है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
क्योंकि ऐसे लोग जो किसी धर्म में हैं वे परमेश्वर के नए कार्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं, और वे केवल भूतकाल के पुराने कार्य को ही थामे रहते हैं, इस प्रकार परमेश्वर ने इन लोगों को छोड़ दिया है, और उन लोगों पर अपना कार्य करता है जो उसके नए कार्य को स्वीकार करते हैं। ये ऐसे लोग हैं जो उसके नए कार्य में उसका सहयोग करते हैं, और केवल इसी रीति से ही उसके प्रबंधन को पूरा किया जा सकता है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार" से

11 अग॰ 2019

2. यह क्यों कहा जाता है कि धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग सभी फरीसियों के मार्ग पर चल रहे हैं? उनका सार क्या है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"फिर वह दृष्‍टान्तों में उनसे बातें करने लगा: "किसी मनुष्य ने दाख की बारी लगाई, और उसके चारों ओर बाड़ा बाँधा, और रस का कुण्ड खोदा, और गुम्मट बनाया; और किसानों को उसका ठेका देकर परदेश चला गया। फिर फल के मौसम में उसने किसानों के पास एक दास को भेजा कि किसानों से दाख की बारी के फलों का भाग ले। पर उन्होंने उसे पकड़कर पीटा और छूछे हाथ लौटा दिया। फिर उसने एक और दास को उनके पास भेजा; उन्होंने उसका सिर फोड़ डाला और उसका अपमान किया। फिर उसने एक और को भेजा; उन्होंने उसे मार डाला। तब उसने और बहुतों को भेजा; उनमें से उन्होंने कुछ को पीटा, और कुछ को मार डाला। अब एक ही रह गया था, जो उसका प्रिय पुत्र था; अन्त में उसने उसे भी उनके पास यह सोचकर भेजा कि वे मेरे पुत्र का आदर करेंगे। पर उन किसानों ने आपस में कहा, 'यही तो वारिस है; आओ, हम इसे मार डालें, तब मीरास हमारी हो जाएगी।' और उन्होंने उसे पकड़कर मार डाला, और दाख की बारी के बाहर फेंक दिया। इसलिये दाख की बारी का स्वामी क्या करेगा? वह आकर उन किसानों का नाश करेगा, और दाख की बारी दूसरों को दे देगा"" (मरकुस 12:1-9)।
"झूठे भविष्यद्वक्‍ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेस में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्तर में वे फाड़नेवाले भेड़िए हैं" (मत्ती 7:15)।
"हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! … हे साँपो, हे करैतों के बच्‍चो, तुम नरक के दण्ड से कैसे बचोगे?" (मत्ती 23:29, 33)।

10 अग॰ 2019

1. प्रभु यीशु ने फरीसियों को क्यों शाप दिया था? वास्तव में फरीसियों का सार क्या है?

XV फरीसियों और परमेश्वर का विरोध करती धार्मिक दुनिया के सार को किस तरह पहचानें इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर का स्वभाव, परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, परमेश्वर को जानना
1. प्रभु यीशु ने फरीसियों को क्यों शाप दिया था? वास्तव में फरीसियों का सार क्या है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तुम भी अपनी परम्पराओं के कारण क्यों परमेश्‍वर की आज्ञा टालते हो? क्योंकि परमेश्‍वर ने कहा है, 'अपने पिता और अपनी माता का आदर करना', और 'जो कोई पिता या माता को बुरा कहे, वह मार डाला जाए।' पर तुम कहते हो कि यदि कोई अपने पिता या माता से कहे, 'जो कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुँच सकता था, वह परमेश्‍वर को भेंट चढ़ाया जा चुका', तो वह अपने पिता का आदर न करे, इस प्रकार तुम ने अपनी परम्परा के कारण परमेश्‍वर का वचन टाल दिया। हे कपटियो, यशायाह ने तुम्हारे विषय में यह भविष्यद्वाणी ठीक ही की है: 'ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उनका मन मुझ से दूर रहता है। और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्योंकि मनुष्यों की विधियों को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं'" (मत्ती 15:3-9)।
"हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम मनुष्यों के लिए स्वर्ग के राज्य का द्वार बन्द करते हो, न तो स्वयं ही उसमें प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करनेवालों को प्रवेश करने देते हो। हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम विधवाओं के घरों को खा जाते हो, और दिखाने के लिए बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हो: इसलिये तुम्हें अधिक दण्ड मिलेगा।
हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो, और जब वह मत में आ जाता है तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो।

8 अग॰ 2019

1. परमेश्वर की कलीसिया क्या है? एक धार्मिक संगठन क्या होता है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, पवित्र आत्मा के कार्य, परमेश्वर को जानना

1. परमेश्वर की कलीसिया क्या है? एक धार्मिक संगठन क्या होता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"यीशु ने परमेश्‍वर के मन्दिर में जाकर उन सब को, जो मन्दिर में लेन-देन कर रहे थे, निकाल दिया, और सर्राफों के पीढ़े और कबूतर बेचनेवालों की चौकियाँ उलट दीं; और उनसे कहा, "लिखा है, 'मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा'; परन्तु तुम उसे डाकुओं की खोह बनाते हो" (मत्ती 21:12-13)।
"उसने ऊँचे शब्द से पुकारकर कहा, गिर गया, बड़ा बेबीलोन गिर गया है! वह दुष्‍टात्माओं का निवास, और हर एक अशुद्ध आत्मा का अड्डा, और हर एक अशुद्ध और घृणित पक्षी का अड्डा हो गया। क्योंकि उसके व्यभिचार की भयानक मदिरा के कारण सब जातियाँ गिर गई हैं, और पृथ्वी के राजाओं ने उसके साथ व्यभिचार किया है, और पृथ्वी के व्यापारी उसके सुख-विलास की बहुतायत के कारण धनवान हुए हैं" (प्रकाशितवाक्य 18:2-3)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
आज, जो लोग परमेश्वर के वास्तविक वचनों का पालन करते हैं, वे पवित्र आत्मा की धारा में हैं; जो लोग परमेश्वर के वास्तविक वचनों से अनभिज्ञ हैं, वे पवित्र आत्मा की धारा के बाहर हैं, और परमेश्वर की सराहना ऐसे लोगों के लिए नहीं है। वह सेवा जो पवित्र आत्मा की वास्तविक उक्तियों से विभाजित हो, वह देह की और धारणाओं की सेवा है, और यह परमेश्वर की इच्छा के अनुसार होने में असमर्थ है। ... "पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण" करने का मतलब है आज परमेश्वर की इच्छा को समझना, परमेश्वर की वर्तमान अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करने में सक्षम होना, आज के परमेश्वर का अनुसरण और आज्ञापालन करने में सक्षम होना, और परमेश्वर के नवीनतम कथनों के अनुसार प्रवेश करना। केवल ऐसा व्यक्ति ही है जो पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करता है और पवित्र आत्मा की धारा में है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और परमेश्वर के चरण-चिन्हों का अनुसरण करो" से

2 अग॰ 2019

Hindi Christian Skit | क्या हम उद्धार पाकर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं?


Hindi Christian Video | क्या हम उद्धार पाकर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं?

झांग मुदे एक गृह कलीसिया में प्रचारक है, उसका मानना है कि "क्योंकि धार्मिकता के लिये मन से विश्‍वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुँह से अंगीकार किया जाता है" (रोमियों 10:10)।(© BSI) उसे लगता है कि चूँकि वह प्रभु यीशु में विश्वास रखता है, इसलिये वह पहले से ही धार्मिक है, उसे पहले ही उद्धार प्राप्त हो चुका है। जब प्रभु यीशु लौटकर आयेंगे, तो उसे सीधे स्वर्ग के राज्य में आरोहित कर दिया जायेगा। एक दिन, उसकी बेटी किसी दूसरी जगह पर मिशनरी कार्य से लौटकर घर आती है।

31 जुल॰ 2019

2. परमेश्वर द्वारा विभिन्न युगों के दौरान उपयोग में लाये गए लोगों के शब्दों, जो सत्य से मेल खाते हैं, और परमेश्वर के वचनों में क्या अंतर है?


2. परमेश्वर द्वारा विभिन्न युगों के दौरान उपयोग में लाये गए लोगों के शब्दों, जो सत्य से मेल खाते हैं, और परमेश्वर के वचनों में क्या अंतर है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
सत्य मानव संसार से आता है, फिर भी वह सत्य जो मनुष्य के मध्य है उसे मसीह के द्वारा पहुंचाया गया है। इसका उद्गम मसीह से होता है, अर्थात्, स्वयं परमेश्वर से, और इसे मनुष्य के द्वारा अर्जित नहीं किया जा सकता है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है" से
सत्य जीवन की सर्वाधिक वास्तविक सूक्ति है, और मानवजाति के बीच इस तरह की सूक्तियों में सर्वोच्च है। क्योंकि यही वह अपेक्षा है जो परमेश्वर मनुष्य से करता है, और परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रूप से किया गया कार्य है, इस लिए इसे जीवन की सूक्ति कहा जाता है। यह कोई ऐसी सूक्ति नहीं है जिसे किसी चीज में से संक्षिप्त किया गया है, न ही यह किसी महान व्यक्ति के द्वारा कहा गया प्रसिद्ध उद्धरण है; इसके बजाय, यह स्वर्ग और पृथ्वी, तथा सभी चीजों के स्वामी का मानवजाति के लिए कथन है, न कि मनुष्य द्वारा सारांश किए गए कुछ वचन, बल्कि परमेश्वर का अंतर्निहित जीवन है। इसलिए इसे समस्त जीवन की सूक्तियों का उच्चतम कहा जाता है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" से

27 जुल॰ 2019

4. बाइबल में अनन्त जीवन का कोई मार्ग नहीं है; यदि मनुष्य बाइबल को थामे रहता है और उसकी आराधना करता है, तो वह अनन्त जीवन को प्राप्त नहीं करेगा।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, या ढूँढ़ो क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (युहन्ना 5:39-40)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता" (युहन्ना 14:6)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
जीवन का मार्ग कोई साधारण चीज़ नहीं है जो चाहे कोई भी प्राप्त कर ले, न ही इसे सभी के द्वारा आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यह इसलिए कि जीवन केवल परमेश्वर से ही आता है, कहने का अर्थ है कि केवल स्वयं परमेश्वर ही जीवन के तत्व का अधिकारी है, स्वयं परमेश्वर के बिना जीवन का मार्ग नहीं है, और इसलिए केवल परमेश्वर ही जीवन का स्रोत है, और जीवन के जल का सदा बहने वाला सोता है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है" से
परमेश्वर स्वयं ही जीवन है, सत्य है, और उसका जीवन और सत्य साथ ही साथ रहते हैं। जो सत्य को प्राप्त करने में असफल रहते हैं वे कभी भी जीवन को प्राप्त नहीं कर सकते। बिना मार्गदर्शन, सहायता और सत्य के प्रावधान के तुम केवल संदेश, सिद्धांत और मृत्यु को ही प्राप्त करोगे। परमेश्वर का जीवन सतत विद्यमान है, और उसका सत्य और जीवन एक साथ उपस्थित रहते हैं। यदि तुम सत्य के स्रोत को नहीं प्राप्त कर पाते, तो तुम जीवन के पोषण को प्राप्त नहीं कर पाओगे; यदि तुम जीवन के प्रावधान को प्राप्त नहीं कर सकते तो तुम्हारे जीवन में निश्चय ही सत्य नहीं होगा, और इसलिए कल्पनाओं और धारणाओं से दूरी होगी, तुम्हारी सम्पूर्ण देह केवल देह होगी, तुम्हारी घिनौनी देह।

26 जुल॰ 2019

3. बाइबल मनुष्य द्वारा संकलित की गई थी, परमेश्वर द्वारा नहीं; बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (युहन्ना 5:39-40)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता" (युहन्ना 14:6)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
बाइबल इस्राएल में परमेश्वर के कार्य का ऐतिहासिक अभिलेख है, और प्राचीन नबीयों की अनेक भविष्यवाणियों और साथ ही उस समय उसके कार्य में यहोवा के कुछ कथनों को प्रलेखित करती है। इस प्रकार, सभी लोग इस पुस्तक को "पवित्र" (क्योंकि परमेश्वर पवित्र और महान है) मानते हैं। वास्तव में, यह सब यहोवा के लिए उनके आदर और परमेश्वर के लिए उनकी श्रद्धा का परिणाम है। लोग केवल इसलिए इस रीति से इस पुस्तक की ओर संकेत करते हैं क्योंकि परमेश्वर के जीवधारी अपने सृष्टिकर्ता के प्रति बहुत श्रद्धावान हैं, और ऐसे लोग भी हैं जो इस पुस्तक को एक "स्वर्गीय पुस्तक" कहते हैं। वास्तव में, यह मात्र एक मानवीय अभिलेख है। यहोवा द्वारा व्यक्तिगतरूप से इसका नाम नहीं रखा गया था, और न ही यहोवा ने व्यक्तिगत रूप से इसकी रचना कामार्गदर्शन किया था। दूसरे शब्दों में, इस पुस्तक का ग्रन्थकार परमेश्वर नहीं था, बल्कि मनुष्य था।

25 जुल॰ 2019

2. धार्मिक दुनिया का मानना है कि सभी शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए हैं और ये सब परमेश्वर के ही वचन हैं; इस कथन के प्रति हर किसी को क्या विवेक रखना चाहिए?

XI. परमेश्वर और बाइबल के मध्य रहे सम्बन्ध की सच्चाई के पहलू पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की इच्छा,परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर को जानना

2. धार्मिक दुनिया का मानना है कि सभी शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए हैं और ये सब परमेश्वर के ही वचन हैं; इस कथन के प्रति हर किसी को क्या विवेक रखना चाहिए?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
बाइबल की हर चीज़ परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रूप से बोले गए वचनों का लिखित दस्तावेज़ नहीं है। बाइबल सामान्यतः परमेश्वर के कार्य की पिछली दो अवस्थाओं का आलेख करती है, उसमें से एक भाग है जो पैग़म्बरों की भविष्यवाणियों का लिखित दस्तावेज़ है, और एक भाग वह अनुभव और ज्ञान है जिन्हें युगों के दौरान उन लोगों के द्वारा लिखा गया था जिन्हें परमेश्वर के द्वारा इस्तेमाल किया गया था। मानवीय अनुभवों को मानवीय अनुमानों और ज्ञान के साथ दूषित किया गया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। बाइबल की बहुत सी पुस्तकों में मानवीय धारणाएँ, मानवीय पक्षपात, और मनुष्यों के बेतुके अनुवाद हैं। हाँ वास्तव में, बहुत सारे वचन पवित्र आत्मा के प्रकाशन और अलौकिक ज्ञान का परिणाम हैं और वे सही अनुवाद हैं - फिर भी यह अभी नहीं कहा जा सकता है कि वे पूरी तरह सत्य की सही अभिव्यक्ति हैं। कुछ निश्चित चीज़ों पर उनका दृष्टिकोण व्यक्तिगत अनुभव के ज्ञान, या पवित्र आत्मा के प्रकाशन से बढ़कर और कुछ भी नहीं है। पैग़म्बरों के पूर्वकथनों को परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रीति से निर्देशित किया गया थाः यशायाह, दानिय्येल, एज्रा, यिर्मयाह और यहेजकेल की भविष्यवाणियाँ पवित्र आत्मा के सीधे निर्देशन से आई थीं। ये लोग दर्शी थे, उन्होंने भविष्यवाणी की आत्मा को प्राप्त किया था, और वे सभी पुराने नियम के पैग़म्बर थे। व्यवस्था के युग के दौरान इन लोगों ने, जिन्होंने यहोवा की अभिप्रेरणाओं को प्राप्त किया था, अनेक भविष्यवाणियाँ की थीं, जिन्हें सीधे यहोवा के द्वारा निर्देशित किया गया था।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (3)" से

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...