परमेश्वर का कार्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
परमेश्वर का कार्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

22 अग॰ 2019

3. एक मात्र सच्चे परमेश्वर को "त्रिदेव या त्रिविध परमेश्वर" के रूप में वर्णित करना, परमेश्वर की अवहेलना और निंदा करना है।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव, परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य

3. एक मात्र सच्चे परमेश्वर को "त्रिदेव या त्रिविध परमेश्वर" के रूप में वर्णित करना, परमेश्वर की अवहेलना और निंदा करना है।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
मैं बताता हूँ कि वास्तव में, ब्रह्माण्ड में कहीं भी त्रित्व का अस्तित्व नहीं है। परमेश्वर के न पिता हैं और न पुत्र, पिता और पुत्र के द्वारा संयुक्त तौर पर उपयोग किया जाने वाले एक साधन: पवित्र-आत्मा, की परिकल्पना तो बिल्कुल नहीं है। यह सब बड़ा भ्रम है और संसार में इसका कोई अस्तित्व नहीं है! परन्तु इस प्रकार के भ्रम का अपना मूल है और यह पूरी तरह से बिना आधार के नहीं है, क्योंकि तुम लोगों की बुद्धि बहुत ही साधारण नहीं है और विचार बिना तर्क के नहीं हैं। बल्कि, वे काफी उपयुक्त और प्रवीण हैं, इतने कि किसी शैतान के द्वारा भी अभेद्य हैं। अफसोस यह है कि ये विचार बिल्कुल भ्रामक हैं और इनका अस्तित्व नहीं है! तुम लोगों ने वास्तविक सत्य को देखा ही नहीं है; तुम लोग केवल अनुमान और धारणाएं बना रहे हो, फिर धोखेबाज़ी से दूसरों का विश्वास प्राप्त करने या बुद्धिहीन या तर्कहीन लोगों पर प्रभुत्व प्राप्त करने के लिए इन सब को कहानी में पिरो रहे हो, ताकि वे तुम्हारी महान और प्रसिद्ध "विशेषज्ञ शिक्षाओं" पर विश्वास करें। क्या यह सच है? क्या जीवन का यह तरीका है जो मनुष्य को प्राप्त करना चाहिए?

19 अग॰ 2019

5. किसी ऐसे व्यक्ति का क्या अंजाम होता है जो धर्म में परमेश्वर पर विश्वास करता है और फरीसियों और मसीह-शत्रुओं के भ्रम और नियंत्रण से पीड़ित है? क्या इस तरह से परमेश्वर में विश्वास करने वाला कोई व्यक्ति परमेश्वर द्वारा बचाया जा सकता है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य,फरीसियों के मार्ग,परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर को जानना
5. किसी ऐसे व्यक्ति का क्या अंजाम होता है जो धर्म में परमेश्वर पर विश्वास करता है और फरीसियों और मसीह-शत्रुओं के भ्रम और नियंत्रण से पीड़ित है? क्या इस तरह से परमेश्वर में विश्वास करने वाला कोई व्यक्ति परमेश्वर द्वारा बचाया जा सकता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"उन को जाने दो; वे अंधे मार्गदर्शक हैं और अंधा यदि अंधे को मार्ग दिखाए, तो दोनों ही गड़हे में गिर पड़ेंगे" (मत्‍ती 15:14)।
"क्योंकि जो इन लोगों की अगुवाई करते हैं वे इनको भटका देते हैं, और जिनकी अगुवाई होती है वे नष्‍ट हो जाते हैं" (यशायाह 9:16)।
"मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नष्ट हो गई.... जैसे वे बढ़ते गए, वैसे ही वे मेरे विरुद्ध पाप करते गए; मैं उनके वैभव के बदले उनका अनादर करूँगा। वे मेरी प्रजा के पापबलियों को खाते हैं, और प्रजा के पापी होने की लालसा करते हैं। इसलिये जो प्रजा की दशा होगी, वही याजक की भी होगी; मैं उनके चालचलन का दण्ड दूँगा, और उनके कामों के अनुकूल उन्हें बदला दूँगा" (होशे 4:6-9)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
उदाहरण के लिए, इस धार्मिक संसार में पास्टर एवं अगुवे अपने कार्य को करने के लिए अपने वरदानों एवं पदों पर भरोसा रखते हैं। ऐसे लोग जो लोग लम्बे समय से उनका अनुसरण करते हैं वे उनके वरदानों के द्वारा संक्रमित हो जाएंगे और जो वे हैं उनमें से कुछ के द्वारा उन्हें प्रभावित किया जाएगा। वे लोगों के वरदानों, योग्यताओं एवं ज्ञान पर ध्यान केन्द्रित करते हैं, और वे कुछ अलौकिक कार्यों और अनेक गम्भीर अवास्तविक सिद्धान्तों पर ध्यान देते हैं (हाँ वास्तव में, इन गम्भीर सिद्धान्तों को हासिल नहीं किया जा सकता है)।

17 अग॰ 2019

Hindi Christian Skit | क्या आपने सच्चा प्रायश्चित किया है?


Hindi Christian Video | क्या आपने सच्चा प्रायश्चित किया है?

किसी समय, झांग मिंगेन एक गृह कलीसिया में प्रचारक था। उसने बरसों प्रभु में आस्था रखी और उस दौरान, वह हर समय, प्रचार करता, कार्य करता, कष्ट उठाता, और प्रभु के लिये ख़ुद को खपाता था। इस तरह उसे लगता था कि उसने सच्चा प्रायश्चित और बदलाव हासिल कर लिया है। लेकिन, कलीसिया के चुनाव में, झांग मिंगेन ने दूसरे भाई-बहनों को अगुवा और उपयाजक चुने जाते देखा, जबकि उसे सभाओं के आयोजन का कार्य दिया गया। हालाँकि ऊपर से तो उसने स्वीकृति और समर्पण की भावना दिखाई, लेकिन वह बेहद नाख़ुश था।

16 अग॰ 2019

4. क्या धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग सभी वास्तव में परमेश्वर द्वारा प्रतिष्ठित हैं? क्या धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों के प्रति स्वीकृति और आज्ञाकारिता परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता और उसके अनुसरण को दर्शा सकती हैं?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य,परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर को जानना
4. क्या धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग सभी वास्तव में परमेश्वर द्वारा प्रतिष्ठित हैं? क्या धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों के प्रति स्वीकृति और आज्ञाकारिता परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता और उसके अनुसरण को दर्शा सकती हैं?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"इसलिये अब सुन, इस्राएलियों की चिल्‍लाहट मुझे सुनाई पड़ी है, और मिस्रियों का उन पर अन्धेर करना भी मुझे दिखाई पड़ा है। इसलिये आ, मैं तुझे फ़िरौन के पास भेजता हूँ कि तू मेरी इस्राएली प्रजा को मिस्र से निकाल ले आए" (निर्गमन 3:9-10)।
"भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, 'हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है?' ... उसने उससे कहा, 'मेरे मेमनों को चरा।' उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, 'हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है?' ... उसने उससे कहा, 'मेरी भेड़ों की रखवाली कर' (युहन्ना 21:15-16)।
"मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियाँ दूँगा: और जो कुछ तू पृथ्वी पर बाँधेगा, वह स्वर्ग में बंधेगा; और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा, वह स्वर्ग में खुलेगा" (मत्‍ती 16:19)।
"मनुष्यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्‍वर की आज्ञा का पालन करना ही हमारा कर्तव्य है" (प्रेरितों 5:29)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्यक्ति के द्वारा किए जाने वाले कार्य का इस्तेमाल परमेश्वर, मसीह और पवित्र आत्मा के कार्य के साथ सहयोग करने के लिए करता है। यह मनुष्य परमेश्वर के द्वारा मनुष्य के बीच में खड़ा किया गया है, वह परमेश्वर के चुने हुए लोगों का नेतृत्व करने के लिए है, और परमेश्वर ने उसे मानवीय सहयोग का कार्य करने के लिए भी खड़ा किया है। इस तरह का व्यक्ति, जो मानवीय सहयोग का कार्य करने में सक्षम है, मनुष्य से परमेश्वर की अपेक्षाओं और जो कार्य पवित्र आत्मा के द्वारा किया जाना चाहिए, वह उसके माध्यम से पूरा किया जाता है।

7 अग॰ 2019

2. अंतिम दिनों में चीन में कार्य करने के लिए परमेश्वर के देह-धारण का उद्देश्य और महत्व क्या है?




2. अंतिम दिनों में चीन में कार्य करने के लिए परमेश्वर के देह-धारण का उद्देश्य और महत्व क्या है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर के कार्य का प्रत्येक चरण सारी मानवजाति के वास्ते है, और समूची मानवजाति की ओर निर्देशित है। यद्यपि यह देह में उसका कार्य है, फिर भी इसे अब भी सारी मानवजाति की ओर निर्देशित किया गया है; वह सारी मानवजाति का परमेश्वर है, वह सभी सृजे गए और न सृजे गए प्राणियों का परमेश्वर है। यद्यपि देह में उसका कार्य एक सीमित दायरे के भीतर होता है, और इस कार्य का विषय भी सीमित होता है, फिर भी हर बार जब वह अपना कार्य करने के लिए देह धारण करता है तो वह अपने कार्य का एक विषय चुनता है जो अत्यंत प्रतिनिधिक है; वह सामान्य एवं मामूली लोगों के एक समूह को नहीं चुनता है कि उन पर कार्य करे, किन्तु इसके बजाए अपने कार्य के विषय के रूप में लोगों के ऐसे समूह को चुनता है जो देह में उसके कार्य के प्रतिनिधि होने में सक्षम हैं।

5 अग॰ 2019

1. अंतिम दिनों में परमेश्वर ने चीन में देह-धारण किया है; बाइबल की भविष्यवाणियों में और परमेश्वर के वचनों में इसके लिए क्या आधार मिलता है?

XIII. अंतिम दिनों में चीन में परमेश्वर के देह-धारण के महत्त्व पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर को महिमा


1. अंतिम दिनों में परमेश्वर ने चीन में देह-धारण किया है; बाइबल की में और परमेश्वर के वचनों में इसके लिए क्या आधार मिलता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक जाति-जाति में मेरा नाम महान् है, और हर कहीं मेरे नाम पर धूप और शुद्ध भेंट चढ़ाई जाती है" (मलाकी 1:11)।
"क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा" (मत्ती 24:27)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
कई जगहों पर, परमेश्वर ने सिनीम के देश में जीतने वालों के एक समूह को प्राप्त करने की भविष्यवाणी की है। दुनिया के पूर्व में जीतने वालों को प्राप्त किया जाता है, इसलिए परमेश्वर के दूसरे देहधारण के अवतरण का स्थान बिना किसी संदेह के, सिनीम का देश है, ठीक वहीं जहाँ बड़ा लाल अजगर कुण्डली मारे पड़ा है। वहाँ परमेश्वर बड़े लाल अजगर के वंशज को प्राप्त करेगा ताकि यह पूर्णतः पराजित और शर्मिंदा हो जाए।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "कार्य और प्रवेश (6)" से

1 अग॰ 2019

3. व्यवस्था के युग में नबियों के द्वारा दिए गए परमेश्वर के वचनों और देहधारी परमेश्वर द्वारा व्यक्त परमेश्वर के वचनों में क्या अंतर है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर के शासन

3. व्यवस्था के युग में नबियों के द्वारा दिए गए परमेश्वर के वचनों और देहधारी परमेश्वर द्वारा व्यक्त परमेश्वर के वचनों में क्या अंतर है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
अनुग्रह के युग में, यीशु ने भी काफ़ी बातचीत की और काफ़ी कार्य किया। वह यशायाह से किस प्रकार भिन्न था? वह दानिय्येल से किस प्रकार भिन्न था? क्या वह कोई भविष्यद्वक्ता था? ऐसा क्यों कहा जाता है कि वह मसीह है? उनके मध्य क्या भिन्नताएँ हैं? वे सभी मनुष्य थे जिन्होंने वचन बोले थे, और मनुष्य को उनके वचन लगभग एक से प्रतीत होते थे। उन सभी ने बातें की और कार्य किए। पुराने विधान के भविष्यवद्क्ताओं ने भविष्यवाणियाँ की, और उसी तरह से, यीशु भी वैसा ही कर सका। ऐसा क्यों है? यहाँ कार्य की प्रकृति के आधार पर भिन्नता है। इस मामले को समझने के लिए, तुम देह की प्रकृति पर विचार नहीं कर सकते हो और तुम्हें किसी व्यक्ति के वचनों की गहराई या सतहीपन पर विचार नहीं करना चाहिए। तुम्हें अवश्य हमेशा सबसे पहले उसके कार्य पर और उन प्रभावों पर विचार करना चाहिए जिसे उसका कार्य मनुष्य में प्राप्त करता है। उस समय यशायाह के द्वारा कही गई भविष्यवाणियों ने मनुष्य का जीवन प्रदान नहीं किया, और दानिय्येल जैसे लोगों द्वारा प्राप्त किए गए संदेश मात्र भविष्यवाणियाँ थीं न कि जीवन का मार्ग थीं। यदि यहोवा की ओर से प्रत्यक्ष प्रकाशन नहीं होता, तो कोई भी इस कार्य को नहीं कर सकता था, क्योंकि यह नश्वरों के लिए सम्भव नहीं है। यीशु, ने भी, बहुत बातें की, परन्तु वे वचन जीवन का मार्ग थे जिसमें से मनुष्य अभ्यास का मार्ग प्राप्त कर सकता था।

26 जुल॰ 2019

3. बाइबल मनुष्य द्वारा संकलित की गई थी, परमेश्वर द्वारा नहीं; बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (युहन्ना 5:39-40)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता" (युहन्ना 14:6)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
बाइबल इस्राएल में परमेश्वर के कार्य का ऐतिहासिक अभिलेख है, और प्राचीन नबीयों की अनेक भविष्यवाणियों और साथ ही उस समय उसके कार्य में यहोवा के कुछ कथनों को प्रलेखित करती है। इस प्रकार, सभी लोग इस पुस्तक को "पवित्र" (क्योंकि परमेश्वर पवित्र और महान है) मानते हैं। वास्तव में, यह सब यहोवा के लिए उनके आदर और परमेश्वर के लिए उनकी श्रद्धा का परिणाम है। लोग केवल इसलिए इस रीति से इस पुस्तक की ओर संकेत करते हैं क्योंकि परमेश्वर के जीवधारी अपने सृष्टिकर्ता के प्रति बहुत श्रद्धावान हैं, और ऐसे लोग भी हैं जो इस पुस्तक को एक "स्वर्गीय पुस्तक" कहते हैं। वास्तव में, यह मात्र एक मानवीय अभिलेख है। यहोवा द्वारा व्यक्तिगतरूप से इसका नाम नहीं रखा गया था, और न ही यहोवा ने व्यक्तिगत रूप से इसकी रचना कामार्गदर्शन किया था। दूसरे शब्दों में, इस पुस्तक का ग्रन्थकार परमेश्वर नहीं था, बल्कि मनुष्य था।

21 जुल॰ 2019

3. परमेश्वर की सर्वशक्तिमानता और ज्ञान मुख्यतः किन पहलुओं में प्रकट हैं?




सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर के शासन,परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर को जानना
3. परमेश्वर की सर्वशक्तिमानता और ज्ञान मुख्यतः किन पहलुओं में प्रकट हैं?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर के वचन अधिकार हैं, परमेश्वर के वचन प्रमाणित सत्य हैं, और उसके मुँह से वचन के निकलने से पहले ही, दूसरे शब्दों में, जब परमेश्वर कुछ करने का निर्णय लेता है, तब ही उस चीज़ को पहले से ही पूरा करा जा चुका होता है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" से
सृष्टिकर्ता का अधिकार और सामर्थ हर उस नई चीज़ में प्रगट हुआ जिसे उसने बनाया था, और उसके वचन और उपलब्धियाँ बिना किसी लेश मात्र विरोद्ध, और बिना किसी लेश मात्र अन्तराल के एक साथ घटित होती हैं। इन सभी नई चीज़ों का प्रकटीकरण और जन्म सृष्टिकर्ता के अधिकार और सामर्थ के प्रमाण थे; वह अपने वचन के समान ही भला है, और उसका वचन पूरा होगा, और जो पूर्ण हुआ है वो हमेशा बना रहेगा। यह सच्चाई कभी नहीं बदलीः यह भूतकाल में ऐसा था, यह वर्तमान में ऐसा है, और पूरे अनंतकाल के लिए भी ऐसा ही बना रहेगा।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" से

13 जुल॰ 2019

2. परमेश्वर के द्वारा उपयोग में लाये गए लोगों के कार्य और धार्मिक नेताओं के काम के बीच क्या अंतर है?

VIII. परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के बीच अंतर से सम्बंधित सच्चाई पर हर किसी को स्पष्ट रूप से अवश्य ही सहभागिता करनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य,परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर को जानना

2. परमेश्वर के द्वारा उपयोग में लाये गए लोगों के कार्य और धार्मिक नेताओं के काम के बीच क्या अंतर है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तब यहोवा ने कहा, '… परन्तु मेरा दास मूसा ऐसा नहीं है; वह तो मेरे सब घरानों में विश्‍वासयोग्य है'" (गिनती 12:6-7)।
"हाय इस्राएल के चरवाहों पर जो अपने अपने पेट भरते हैं! क्या चरवाहों को भेड़-बकरियों का पेट न भरना चाहिए? तुम लोग चर्बी खाते, ऊन पहिनते और मोटे मोटे पशुओं को काटते हो; परन्तु भेड़-बकरियों को तुम नहीं चराते। तुम ने बीमारों को बलवान न किया, न रोगियों को चंगा किया, न घायलों के घावों को बाँधा, न निकाली हुई को लौटा लाए, न खोई हुई को खोजा, परन्तु तुम ने बल और जबरदस्ती से अधिकार चलाया है। वे चरवाहे के न होने के कारण तितर-बितर हुईं; और सब वनपशुओं का आहार हो गईं। मेरी भेड़-बकरियाँ तितर-बितर हुई हैं; वे सारे पहाड़ों और ऊँचे ऊँचे टीलों पर भटकती थीं; मेरी भेड़-बकरियाँ सारी पृथ्वी के ऊपर तितर-बितर हुईं; और न तो कोई उनकी सुधि लेता था, न कोई उनको ढूँढ़ता था" (यहेजकेल 34:2-6)।
"हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम मनुष्यों के लिए स्वर्ग के राज्य का द्वार बन्द करते हो, न तो स्वयं ही उसमें प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करनेवालों को प्रवेश करने देते हो। [हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम विधवाओं के घरों को खा जाते हो, और दिखाने के लिए बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हो: इसलिये तुम्हें अधिक दण्ड मिलेगा।] हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो, और जब वह मत में आ जाता है तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो" (मत्ती 23:13-15)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्यक्ति के द्वारा किए जाने वाले कार्य का इस्तेमाल परमेश्वर, मसीह और पवित्र आत्मा के कार्य के साथ सहयोग करने के लिए करता है। यह मनुष्य परमेश्वर के द्वारा मनुष्य के बीच में खड़ा किया गया है, वह परमेश्वर के चुने हुए लोगों का नेतृत्व करने के लिए है, और परमेश्वर ने उसे मानवीय सहयोग का कार्य करने के लिए भी खड़ा किया है। इस तरह का व्यक्ति, जो मानवीय सहयोग का कार्य करने में सक्षम है, मनुष्य से परमेश्वर की अपेक्षाओं और जो कार्य पवित्र आत्मा के द्वारा किया जाना चाहिए, वह उसके माध्यम से पूरा किया जाता है। इसे दूसरे शब्दों में कहने का तरीका यह है: इस मनुष्य को इस्तेमाल करने में परमेश्वर का उद्देश्य यह है कि वे सब जो परमेश्वर का अनुसरण करते हैं परमेश्वर की इच्छा को और अच्छी तरह समझ सकें, और परमेश्वर की अपेक्षाओं को पूरा कर सकें।

12 जुल॰ 2019

1. परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के बीच सारभूत अंतर क्या है?

VIII. परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के बीच अंतर से सम्बंधित सच्चाई पर हर किसी को स्पष्ट रूप से अवश्य ही सहभागिता करनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर का देहधारण,परमेश्वर को जानना,

1. परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के बीच सारभूत अंतर क्या है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
स्वयं परमेश्वर के कार्य में सम्पूर्ण मानवजाति का कार्य सम्मिलित है, और यह सम्पूर्ण युग के कार्य का भी प्रतिनिधित्व करता है। कहने का तात्पर्य है, परमेश्वर का स्वयं का कार्य पवित्र आत्मा के सभी कार्य की गति एवं प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि प्रेरितों का कार्य परमेश्वर के स्वयं के कार्य का अनुसरण करता है और युग की अगुवाई नहीं करता है, न ही यह सम्पूर्ण युग में पवित्र आत्मा के कार्य करने की प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है। वे केवल वही कार्य करते हैं जिसे मनुष्य को अवश्य करना चाहिए, जो प्रबंधकीय कार्य को बिलकुल भी शामिल नहीं करता है। परमेश्वर का स्वयं का कार्य प्रबंधकीय कार्य के भीतर एक परियोजना है। मनुष्य का कार्य केवल उन मनुष्यों का कर्तव्य है जिन्हें उपयोग किया जाता है और इसका प्रबंधकीय कार्य से कोई सम्बन्ध नहीं है। कार्य के विभिन्न पहचान एवं विभिन्न प्रतिनिधित्व के कारण, तथा इस तथ्य के बावजूद कि वे दोनों ही पवित्र आत्मा के कार्य हैं, परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के मध्य स्पष्ट एवं ठोस अन्तर हैं।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम" से

9 जुल॰ 2019

1. हर किसी को यह समझना चाहिए कि प्रभु यीशु द्वारा अनुग्रह के युग में फैलाया गया संदेश केवल पश्चाताप का मार्ग था।

VII. अंतिम दिनों का मसीह जो लाता है केवल वही अनन्त जीवन का मार्ग है, इस बारे में अवश्य ही हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

1. हर किसी को यह समझना चाहिए कि प्रभु यीशु द्वारा अनुग्रह के युग में फैलाया गया संदेश केवल पश्चाताप का मार्ग था।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है" (मत्ती 4:17)।
"क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये fपापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है" (मत्ती 26:28)।
"और यरूशलेम से लेकर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा" (लूका 24:47)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
आरम्भ में, यीशु ने सुसमाचार को फैलाया और पश्चाताप के मार्ग का उपदेश दिया, फिर वह मनुष्य को बपतिस्मा देने लगा, बीमारियों को चंगा करने लगा, और दुष्टात्माओं को निकालने लगा। अंत में, उसने मानवजाति को पाप से छुटकारा दिया और सम्पूर्ण युग के अपने कार्य को पूरा किया।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "देहधारण का रहस्य (1)" से

6 जुल॰ 2019

अनुग्रह के युग की तुलना में राज्य के युग में, कलीसियाई जीवन में क्या अंतर है?

अनुग्रह के युग की तुलना में राज्य के युग में, कलीसियाई जीवन में क्या अंतर है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"जब वे खा रहे थे तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष माँगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, 'लो, खाओ; यह मेरी देह है।' फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और उन्हें देकर कहा, 'तुम सब इसमें से पीओ, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है'" (मत्ती 26:26-28)।

"मैं ने स्वर्गदूत के पास जाकर कहा, 'यह छोटी पुस्तक मुझे दे।' उसने मुझ से कहा, 'ले, इसे खा ले; यह तेरा पेट कड़वा तो करेगी, पर तेरे मुँह में मधु सी मीठी लगेगी'" (प्रकाशितवाक्य 10:9)।

5 जुल॰ 2019

2. अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु के कार्य करने के तरीके और जिस तरह राज्य के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर कार्य करता है, इनके बीच क्या अंतर है?

V. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य और अनुग्रह के युग में उसके छुटकारे के कार्य के बीच रहे अंतर से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को अवश्य गवाही देनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य,परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर के न्याय,परमेश्वर को जानना

2. अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु के कार्य करने के तरीके और जिस तरह राज्य के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर कार्य करता है, इनके बीच क्या अंतर है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
अपने पहले देहधारण के दौरान, बीमारों को चंगा करना और दुष्टात्माओं को निकालना परमेश्वर के लिए आवश्यक था क्योंकि उसका कार्य छुटकारा दिलाना था। सम्पूर्ण मानव जाति को छुटकारा दिलाने के लिए, उसे दयालु और क्षमाशील होने की आवश्यकता थी। सलीब पर चढ़ने से पहले उसने जो कार्य किया वह बीमार को चंगा करना और दुष्टात्माओं को निकालना था, जो उसके द्वारा मनुष्य के पाप और गंदगी से उद्धार के पूर्वलक्षण थे। क्योंकि यह अनुग्रह का युग था, इसलिए बीमारों को चंगा करना, उसके द्वारा संकेतों और चमत्कारों को दिखाना परमेश्वर के लिए आवश्यक था, जो उस युग में अनुग्रह के प्रतिनिधि थे; क्योंकि अनुग्रह का युग अनुग्रह प्रदान करने के आस-पास केन्द्रित था, जिसका प्रतीक शान्ति, आनन्द और भौतिक आशीष थे, जो कि सभी यीशु में लोगों के विश्वास की निशानियाँ थी। अर्थात् बीमार को चंगा करना, दुष्टात्माओं को निकालना, और अनुग्रह प्रदान करना, अनुग्रह के युग में यीशु की देह की सहज क्षमताएँ थीं, ये देह में साकार हुए पवित्रात्मा के कार्य थे।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार" से

2 जुल॰ 2019

3. परमेश्वर का नाम बदल सकता है, लेकिन उसका सार कभी नहीं बदलेगा।

IV. परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों और उसके नामों के बीच रहे संबंध के विषय में सच्चाई के पहलू पर हर किसी को अवश्य गवाही देनी चाहिए

3. परमेश्वर का नाम बदल सकता है, लेकिन उसका सार कभी नहीं बदलेगा।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि परमेश्वर अपरिवर्तशील है। यह सही है, किन्तु यह परमेश्वर के स्वभाव और सार की अपरिवर्तनशीलता का संकेत करता है। उसके नाम और कार्य में परिवर्तन से यह साबित नहीं होता है कि उसका सार बदल गया है; दूसरे शब्दों में, परमेश्वर हमेशा परमेश्वर रहेगा, और यह कभी नहीं बदलेगा। यदि तुम कहते हो कि परमेश्वर का कार्य हमेशा वैसा ही बना रहता है, तो क्या वह अपनी छः-हजार वर्षीय प्रबंधन योजना को पूरा करने में सक्षम होगा? तुम केवल यह जानते हो कि परमेश्वर हमेशा ही अपरिवर्तनीय है, किन्तु क्या तुम जानते हो कि परमेश्वर हमेशा नया रहता है और कभी पुराना नहीं पड़ता है? यदि परमेश्वर का कार्य कभी नहीं बदला था, तो क्या वह मानवजाति को आज के दिन तक ला सकता था? यदि परमेश्वर अपरिवर्तशील है, तो ऐसा क्यों है कि उसने पहले ही दो युगों का कार्य कर लिया है?

1 जुल॰ 2019

परमेश्वर के कार्य के हर चरण और उसके नाम के बीच क्या संबंध है?

2. परमेश्वर के कार्य के हर चरण और उसके नाम के बीच क्या संबंध है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"फिर परमेश्‍वर ने मूसा से यह भी कहा, 'तू इस्राएलियों से यह कहना, "तुम्हारे पितरों का परमेश्‍वर, अर्थात् अब्राहम का परमेश्‍वर, इसहाक का परमेश्‍वर, और याक़ूब का परमेश्‍वर, यहोवा, उसी ने मुझ को तुम्हारे पास भेजा है।" देख, सदा तक मेरा नाम यही रहेगा, और पीढ़ी पीढ़ी में मेरा स्मरण इसी से हुआ करेगा'" (निर्गमन 3:15)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
"यहोवा" वह नाम है जिसे मैंने इस्राएल में अपने कार्य के दौरान अपनाया था, और इसका अर्थ है इस्राएलियों (परमेश्वर के चुने हुए लोग) का परमेश्वर जो मनुष्य पर दया कर सकता है, मनुष्य को शाप दे सकता है, और मनुष्य के जीवन को मार्गदर्शन दे सकता है। इसका अर्थ है वह परमेश्वर जिसके पास बड़ी सामर्थ्य है और जो बुद्धि से भरपूर है। … अर्थात्, केवल यहोवा ही इस्राएल के चुने हुए लोगों का परमेश्वर, इब्राहीम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर, याकूब का परमेश्वर, मूसा का परमेश्वर, और इस्राएल के सभी लोगों का परमेश्वर है। और इसलिए वर्तमान युग में, यहूदा के कुटुम्ब के अलावा सभी इस्राएली यहोवा की आराधना करते हैं। वे वेदी पर उसके लिए बलिदान करते हैं, और याजकीय लबादे पहनकर मन्दिर में उसकी सेवा करते हैं। वे यहोवा के पुनः-प्रकट होने की आशा करते हैं। … यहोवा का नाम इस्राएल के लोगों के लिए एक विशेष नाम है जो व्यवस्था के अधीन जीए थे। प्रत्येक युग में और कार्य के प्रत्येक चरण में, मेरा नाम आधारहीन नहीं है, किन्तु प्रतिनिधिक महत्व रखता हैः प्रत्येक नाम एक युग का प्रतिनिधित्व करता है। "यहोवा" व्यवस्था के युग का प्रतिनिधित्व करता है, और यह उस परमेश्वर के लिए सम्मानसूचक है जिसकी आराधना इस्राएल के लोगों के द्वारा की जाती है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है" से

27 जून 2019

अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य किस तरह मानवजाति को शुद्ध करता और बचाता है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:


"यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता; क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा" (युहन्ना 12:47-48)।
"मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (युहन्ना 16:12-13)।

21 जून 2019

मानव जाति के प्रबंधन से सम्बंधित परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों के उद्देश्य को जानो।

परमेश्वर, परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, परमेश्वर को जानना, यीशु

1. मानव जाति के प्रबंधन से सम्बंधित परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों के उद्देश्य को जानो।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
मेरी सम्पूर्ण प्रबन्धन योजना, ऐसी योजना जो छः हज़ार सालों तक फैली हुई है, तीन चरणों या तीन युगों को शामिल करती हैः आरंभ में व्यवस्था का युग; अनुग्रह का युग (जो छुटकारे का युग भी है); और अंत के दिनों में राज्य का युग। प्रत्येक युग की प्रकृति के अनुसार मेरा कार्य इन तीनों युगों में तत्वतः अलग-अलग है, परन्तु प्रत्येक चरण में यह मनुष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप है—या बल्कि, अधिक स्पष्ट कहें तो, यह उन छलकपटों के अनुसार किया जाता है जो शैतान उस युद्ध में काम में लाता है जो मैं उसके विरुद्ध शुरू करता हूँ। मेरे कार्य का उद्धेश्य शैतान को हराना, अपनी बुद्धि और सर्वशक्तिमत्ता को व्यक्त करना, शैतान के सभी छलकपटों को उजागर करना और परिणामस्वरूप समस्त मानवजाति को बचाना है, जो उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन रहती है। यह मेरी बुद्धि और सर्वशक्तिमत्ता को दिखाने के लिए है जबकि उसके साथ-साथ ही शैतान की असहनीय करालता को प्रकट करती है। इससे भी अधिक, यह मेरी रचनाओं को अच्छे और बुरे के बीच में अन्तर करना सिखाने के लिए है, यह पहचानना सिखाने के लिए है कि मैं सभी चीज़ों का शासक हूँ, यह देखना सिखाने के लिए है कि शैतान मानवजाति का शत्रु है, व अधम से भी अधम है, दुष्ट है, और अच्छे एवं बुरे, सत्य एवं झूठ, पवित्रता एवं गन्दगी, और महान और हेय के बीच पूर्ण निश्चितता के साथ अंतर करना सिखाने के लिए है। इस तरह, अज्ञानी मानवजाति मेरी गवाही देने में समर्थ हो सकती है कि वह मैं नहीं हूँ जो मानवजाति को भ्रष्ट करता है, और केवल मैं—सृष्टि का प्रभु—ही मानवजाति को बचा सकता हूँ, मनुष्य को उसके आनन्द की वस्तुएँ प्रदान कर सकता हूँ; और उन्हें पता चल जाएगा कि मैं सभी चीज़ों का शासक हूँ और शैतान मात्र उन प्राणियों में से एक है जिनकी मैंने रचना की है और जो बाद में मेरे विरूद्ध हो गया। मेरी छः-हज़ार-सालों की प्रबंधन योजना को तीन अवस्थाओं में विभाजित किया जाता है ताकि निम्नलिखित प्रभाव को प्राप्त किया जाए: मेरी रचनाओं को मेरा गवाह बनने में सक्षम बनाना, मेरी इच्छा को समझना, और यह जानना कि मैं ही सत्य हूँ।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" से

10 जून 2019

परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और परमेश्वर के चरण-चिन्हों का अनुसरण करो

अब, तुम लोगों को परमेश्वर की प्रजा बनने की कोशिश करनी है, और तुम सब पूरी प्रविष्टि को सही राह पर शुरू करोगे। परमेश्वर के लोग होने का अर्थ है राज्य के युग में प्रवेश करना। आज, तुम सब आधिकारिक तौर पर राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश करना शुरू कर रहे हो, और तुम लोगों के भावी जीवन अब पहले की तरह सुस्त और लापरवाह नहीं रहेंगे; ऐसे जीवन परमेश्वर द्वारा अपेक्षित मानकों को प्राप्त करने में असमर्थ होते हैं। अगर तुम्हें कोई अत्यावश्यकता महसूस नहीं होती है, तो यह दिखाता है कि तुम खुद को सुधारने की कोई इच्छा नहीं रखते हो, कि तुम्हारा अनुसरण उलझा हुआ और भ्रमित है, और तुम परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने में असमर्थ हो। राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश करने का तात्पर्य है परमेश्वर के लोगों के जीवन की शुरुआत करना—क्या तुम इस तरह के प्रशिक्षण को स्वीकार करने के लिए तैयार हो? क्या तुम तात्कालिकता की एक भावना को महसूस करने के लिए तैयार हो? क्या तुम परमेश्वर के अनुशासन के तहत जीने के लिए तैयार हो? क्या तुम परमेश्वर की ताड़ना के तहत जीने के लिए तैयार हो? जब परमेश्वर के वचन तुम पर आते हैं और तुम्हारी परीक्षा लेते हैं, तब तुम कैसे पेश आओगे? और जब तुम सभी तरह के तथ्यों का सामना करोगे तो तुम क्या करोगे? अतीत में, तुम्हारा ध्यान जीवन पर केन्द्रित नहीं था; आज, तुम्हें जीवन की वास्तविकता में प्रवेश करना होगा, और अपने जीवन के स्वभाव में बदलावों को लाने की कोशिश करनी होगी। यही है जो कि राज्य के लोगों के द्वारा हासिल किया जाना चाहिए। उन सब के पास जो परमेश्वर के लोग हैं जीवन होना चाहिए, उन्हें राज्य के प्रशिक्षण को स्वीकार करना चाहिए और उनके जीवन के स्वभाव में परिवर्तनों का अनुसरण करना चाहिए। यही है वह जो राज्य के लोगों से परमेश्वर की अपेक्षा है।

14 मई 2019

फूलों की दो टोकरियों से प्रबोधन

शू फन
अपने खाली समय के दौरान, मैंने इंटरनेट पर सुलैमान के बारे में एक कहानी पढ़ी। एक पड़ोसी देश के राजा ने, भेंट के तौर पर, दो असाधारण और दुर्लभ फूलों की टोकरियाँ सुलैमान को दीं। एक टोकरी के फूल वास्तविक थे और दूसरी टोकरी के फूल नकली थे। बहरहाल, दोनों टोकरी के फूल बेहद समान दिखते थे। केवल देखकर वास्तविक फूलों को नकली फूलों से अलग पहचानने का लगभग कोई रास्ता नहीं था। पड़ोसी देश के उस राज्याधिकारी ने जो फूलों की टोकरियाँ लेकर आया था, सुलैमान के ज्ञान के बारे में सुना था। इसलिए, उसने सुलैमान से असली फूलों और नकली फूलों के बीच भेद करने के लिए कहा। सुलैमान ने कुछ लोगों से अपने बगीचे में फूलों की उन दो टोकरियों को लाने के लिए कहा। कोई भी समझ नहीं पाया था कि सुलैमान के इरादे क्या थे। सुलैमान ने सभी को बगीचे में इकट्ठा होने के लिए कहा और वहीं वे समझ पाए कि उसने बगीचे में टोकरियों को लाने के लिए क्यों कहा था। असली फूलों ने कई मधुमक्खियों को आकर्षित किया, जब कि नकली फूलों के पास कोई भी मधुमक्खी नहीं थी।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...