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10 जून 2019

परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और परमेश्वर के चरण-चिन्हों का अनुसरण करो

अब, तुम लोगों को परमेश्वर की प्रजा बनने की कोशिश करनी है, और तुम सब पूरी प्रविष्टि को सही राह पर शुरू करोगे। परमेश्वर के लोग होने का अर्थ है राज्य के युग में प्रवेश करना। आज, तुम सब आधिकारिक तौर पर राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश करना शुरू कर रहे हो, और तुम लोगों के भावी जीवन अब पहले की तरह सुस्त और लापरवाह नहीं रहेंगे; ऐसे जीवन परमेश्वर द्वारा अपेक्षित मानकों को प्राप्त करने में असमर्थ होते हैं। अगर तुम्हें कोई अत्यावश्यकता महसूस नहीं होती है, तो यह दिखाता है कि तुम खुद को सुधारने की कोई इच्छा नहीं रखते हो, कि तुम्हारा अनुसरण उलझा हुआ और भ्रमित है, और तुम परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने में असमर्थ हो। राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश करने का तात्पर्य है परमेश्वर के लोगों के जीवन की शुरुआत करना—क्या तुम इस तरह के प्रशिक्षण को स्वीकार करने के लिए तैयार हो? क्या तुम तात्कालिकता की एक भावना को महसूस करने के लिए तैयार हो? क्या तुम परमेश्वर के अनुशासन के तहत जीने के लिए तैयार हो? क्या तुम परमेश्वर की ताड़ना के तहत जीने के लिए तैयार हो? जब परमेश्वर के वचन तुम पर आते हैं और तुम्हारी परीक्षा लेते हैं, तब तुम कैसे पेश आओगे? और जब तुम सभी तरह के तथ्यों का सामना करोगे तो तुम क्या करोगे? अतीत में, तुम्हारा ध्यान जीवन पर केन्द्रित नहीं था; आज, तुम्हें जीवन की वास्तविकता में प्रवेश करना होगा, और अपने जीवन के स्वभाव में बदलावों को लाने की कोशिश करनी होगी। यही है जो कि राज्य के लोगों के द्वारा हासिल किया जाना चाहिए। उन सब के पास जो परमेश्वर के लोग हैं जीवन होना चाहिए, उन्हें राज्य के प्रशिक्षण को स्वीकार करना चाहिए और उनके जीवन के स्वभाव में परिवर्तनों का अनुसरण करना चाहिए। यही है वह जो राज्य के लोगों से परमेश्वर की अपेक्षा है।

17 मई 2019

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है

परमेश्वर देहधारी इसलिए बना क्योंकि उसके कार्य का लक्ष्य शैतान की आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ नहीं, बल्कि मनुष्य है, जो माँस से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया है। ऐसा निश्चित रूप से मनुष्य की देह को भ्रष्ट कर देने की वजह से है कि परमेश्वर ने हाड़-माँस के मनुष्य को अपने कार्य का लक्ष्य बनाया है; इसके अतिरिक्त, क्योंकि मनुष्य भ्रष्टता का लक्ष्य है, इसलिए उसने उद्धार के अपने कार्य के समस्त चरणों के दौरान मनुष्य को अपने कार्य का एकमात्र लक्ष्य बनाया है। मनुष्य एक नश्वर प्राणी है, और वह हाड़-माँस तथा लहू से बना है, और एकमात्र परमेश्वर ही है जो मनुष्य को बचा सकता है। इस तरह से, परमेश्वर को अपना कार्य करने के लिए ऐसा देह बनना होगा जो मनुष्य के समान ही गुणों को धारण करता हो, ताकि उसका कार्य बेहतर प्रभावों को प्राप्त कर सके। परमेश्वर को अपने कार्य को ठीक तरह से करने के लिए निश्चित रूप से इसलिए देहधारण करना होगा क्योंकि मनुष्य हाड़-माँस से बना है, और पाप पर विजय पाने में या स्वयं को शरीर से वंचित करने में अक्षम है। यद्यपि देहधारी परमेश्वर का सार और उसकी पहचान, मनुष्य के सार और उसकी पहचान से बहुत अधिक भिन्न है, फिर भी उसका रूप-रंग मनुष्य के समान है, उसके पास किसी सामान्य व्यक्ति का रूप-रंग है, और वह एक सामान्य व्यक्ति का जीवन जीता है, और जो लोग उसे देखते हैं वे उसे किसी सामान्य व्यक्ति से भिन्न नहीं समझ सकते हैं।

5 मई 2019

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को तब देखोगे जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुकता है


सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन “जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जबपरमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा”


क्या तुम यीशु को देखना चाहते हो? क्या तुम यीशु के साथ रहना चाहते हो? क्या तुम यीशु के द्धारा कहे गए वचनों को सुनना चाहते हो? यदि ऐसा है, तो तुम यीशु के लौटने का कैसे स्वागत करेंगे? क्या तुम पूरी तरह से तैयार हो? किस ढंग से तुम यीशु के लौटने का स्वागत करेंगे? मुझे लगता है कि प्रत्येक भाई और बहन जो यीशु का अनुसरण करतें हो यीशु का अच्छी तरह से स्वागत करना चाहेंगे। परन्तु क्या तुम लोगों ने इस पर विचार किया है: जब यीशु वापस आएगा तो क्या तुम सचमुच में उसे पहचान लोगे? क्या तुम लोग सचमुच में वह सब कुछ समझ जाएँगे जो वह कहेगा? क्या तुम लोग वे सब कार्य जो यीशु करेगा, उन्हें, बिना किसी शर्त के, सचमुच में स्वीकार कर लेंगे? वे सब जिन्होंने बाइबल पढ़ी है, यीशु के लौटने के बारे में जानते हो, और वे सब जिन्होंने बाइबल को अभिप्राय से पढ़ी है, उसके आगमन की प्रतीक्षा करते हो। तुम सब लोग उस क्षण के आने के ऊपर ग्रस्त हो गए हो, और तुम लोगों की ईमानदारी प्रशंसनीय है, तुम लोगों का विश्वास वास्तव में स्पृहणीय है, परन्तु क्या तुम लोग यह एहसास करते हो कि तुम लोगों ने एक गंभीर त्रुटी की है? यीशु किस ढंग से वापस आएगा?

11 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग तीन



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग तीन
परमेश्वर का अधिकार (II)    भाग तीन
स्वतन्त्रता: तीसरा घटनाक्रम
जब कोई व्यक्ति बचपन एवं किशोरावस्था से होकर गुज़र जाता है और आहिस्ता आहिस्ता एवं अनिवार्य रूप से परिपक्वता की ओर पहुँच जाता है, तो उनके लिए अगला कदम होता है कि वे अपनी किशोरावस्था को पूरी तरह से अलविदा कह दें, अपने अपने माता पिता को अलविदा कह दें, और एक स्वतन्त्र वयस्क के रूप में उस मार्ग का सामना करें जो सामने है। इस बिन्दु पर उन्हें सभी लोगों, घटनाओं, एवं चीज़ों का सामना करना होगा जिन्हें एक व्यस्क को सामना करना पड़ता है, और अपनी नियति की जंज़ीर की सभी कड़ियों का सामना करना होगा।यह तीसरा घटनाक्रम है जिससे होकर किसी व्यक्ति को गुज़रना होगा।

10 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग दो



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग दो
परमेश्वर का अधिकार (II)     भाग दो
एक मनुष्य के जीवन में छ: घटनाक्रम
अपने जीवन के पथक्रम में, हर एक व्यक्ति महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की एक श्रृंखला पर पहुँचता है। ये अत्याधिक बुनियादी, और अति महत्वपूर्ण कदम हैं जो जीवन में किसी व्यक्ति की नियति को निर्धारित करते हैं। जो कुछ नीचे दिया गया है वह इन मील के पत्थरों का एक संक्षिप्त विवरण है जिनसे होकर हर एक स्त्री या पुरुष को अपने जीवन के पथक्रम में गुज़रना होगा।
जन्म: पहला घटनाक्रम
जहाँ किसी व्यक्ति का जन्म होता है, जिस परिवार में उस स्त्री या पुरुष का जन्म होता है, उसका लिंग, रंग-रूप, जन्म का समय: ये किसी व्यक्ति के जीवन के प्रथम घटनाक्रम के विवरण हैं।

9 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग एक



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग एक
परमेश्वर का अधिकार (II)    भाग एक
आज हम "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है" के विषय पर अपनी सभा को जारी रखेंगे। हम पहले से ही इस विषय पर दो सभाएँ कर चुके हैं, पहला परमेश्वर के अधिकार से सम्बन्धित था, और दूसरा परमेश्वर के धर्मी स्वभाव से सम्बन्धित था। इन दोनों सभाओं को सुनने के पश्चात्, क्या तुम लोगों ने परमेश्वर की पहचान, हैसियत, और हस्ती की नई समझ हासिल की है? क्या इन अन्तः दृष्टियों ने परमेश्वर के अस्तित्व की सच्चाई के विषय में और अधिक ठोस ज्ञान और निश्चित्ता प्राप्त करने में तुम लोगों की सहायता की है? आज मैंने "परमेश्वर के अधिकार" के शीर्षक को विस्तार से बताने की योजना बनाई है।

8 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग पांच



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग पांच

परमेश्वर का धर्मी स्वभाव     भाग पांच
     (III) पांच प्रकार के लोग
फिलहाल के लिए, मैं परमेश्वर के धर्मी स्वभाव के विषय में हमारी सभा को यहीं छोडूंगा। आगे मैं परमेश्वर के अनुयायियों को अनेक श्रेणियों में वर्गीकृत करूंगा, परमेश्वर के विषय में उनकी समझ और उसके धर्मी स्वभाव के साथ उनकी समझ और अनुभव के अनुसार, ताकि तुम सब उस अवस्था को जिससे तुम सब वर्तमान में सम्बन्धित हो साथ ही साथ अपने वर्तमान डीलडौल को जान सको। परमेश्वर के विषय में उनके ज्ञान और उसके धर्मी स्वभाव के विषय में उनकी समझ के सम्बन्ध में, वे अलग अलग अवस्थाएं एवं डीलडौल जिन्हें लोग धारण करते हैं उन्हें साधारण तौर पर पांच प्रकारों में बांटा जा सकता है। इस विषय को अद्वितीय परमेश्वर और उसके धर्मी स्वभाव को जानने के आधार पर आधारित किया गया है; इसलिए, जैसे तुम सब निम्लिखित विषयवस्तु को पढ़ते हो, तो तुम्हें सावधानीपूर्वक यह मालूम करने की कोशिश करनी चाहिए कि तुम सब के पास परमेश्वर की अद्वितीयता और उसके धर्मी स्वभाव के सम्बन्ध में वास्तव में कितनी समझ और कितना ज्ञान है, और तब तुम सब यह अनुमान लगाने के लिए इसका उपयोग कर सकते हो कि तुम सब सचमुच में किस अवस्था से सम्बन्धित हो, तुम लोगों का डीलडौल सचमुच में कितना बड़ा है, और तुम सब सचमुच में किस प्रकार के व्यक्ति हो।

7 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग चार



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग चार 

परमेश्वर का धर्मी स्वभाव     भाग चार
नीनवे के लोगों के हृदयों में सच्चे पश्चाताप से उन्होंने परमेश्वर की दया को प्राप्त किया और उस ने उनके अंत को बदल दिया
क्या वहां परमेश्वर के हृदय के बदलाव और उसके क्रोध के बीच कोई परस्पर विरोध था? नहीं, बिलकुल भी नहीं! यह इसलिए है क्योंकि उस विशेष समय पर परमेश्वर की सहनशीलता का अपना कारण था। इसका कारण क्या हो सकता है? यह वह है जिसे बाईबिल में दिया गया है: "प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने कुमार्ग से फिर गया," और अपने हाथों के उपद्रवी कार्यों को तज दिया।
यह "कुमार्ग" कुछ मुटठीभर बुरे कार्यों की और संकेत नहीं करता है, परन्तु लोगों के व्यवहार के पीछे पाए जाने वाले बुरे स्रोत की और संकेत करता है। "अपने कुमार्ग से फिर जाना" इसका अर्थ है कि जिन पर सन्देह है वे कभी भी इन कार्यों को दोबारा नहीं करेंगे। दूसरे शब्दों में, वे पुन: इस बुरे तरीके से व्यवहार नहीं करेंगे;

6 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग तीन



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग तीन

परमेश्वर का धर्मी स्वभाव     भाग तीन

(II) सच्चे पश्चाताप के जरिए मानवता परमेश्वर की करुणा और सहनशीलता को प्राप्त करती है।
जो आगे दिया गया है वह "परमेश्वर द्वारा नीनवे का उद्धार" की बाइबल की कहानी है।
(योना 1:1-2) यहोवा का यह वचन अमित्तै के पुत्र योना के पास पहुंचा। "उठकर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरुद्ध प्रचार कर क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में बढ़ गई है।"
(योना 3) "तब यहोवा का यह वचन दूसरी बार योना के पास पहुंचा। "उठकर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और जो बात मैं तुझ से कहूँगा उसका उस में प्रचार कर।" तब योना यहोवा के वचन के अनुसार नीनवे को गया। नीनवे एक बहुत बड़ा नगर था, वह तीन दिन की यात्रा का था। योना ने नगर में प्रवेश करके एक दिन की यात्रा पूरी की और यह प्रचार करता गया, "अब से चालीस दिन के बीतने पर नीनवे उलट दिया जाएगा।" तब नीनवे के मनुष्यों ने परमेश्वर के वचन की प्रतीति की, और उपवास का प्रचार किया गया और बड़े से लेकर छोटे तक सभी ने टाट ओढ़ा। तब यह समाचार नीनवे के राजा के कान में पहुंचा, और उसने सिंहासन पर से उठ, अपने राजकीय वस्त्र उतारकर टाट ओढ़ लिया, और राख पर बैठ गया। राजा ने प्रधानों से सम्मति लेकर नीनवे में इस आज्ञा का ढिंढोरा पिटवायाः राजा और उसके सरदारों के आदेश से, कहते हुए, "क्या मनुष्य, क्या गाय-बैल, क्या भेड़-बकरी, या अन्य पशु, कोई कुछ भी न खाने पाए, वे न खाएं और न पानी पिएं।" मनुष्य और पशु दोनों टाट ओढ़ें और वे परमेश्वर की दोहाई चिल्ला-चिल्ला कर दें, और अपने कुमार्ग से फिरें, और उस उपद्रव से, जो वे करते है, पश्चाताप करें। संभव है, परमेश्वर दया करे और अपनी इच्छा बदल ले और उसका भड़का हुआ कोप शांत हो जाए और हम नष्ट होने से बच जाएँ। जब परमेश्वर ने उनके कामों को देखा, कि वे कुमार्ग से फिर रहे हैं, तब परमेश्वर ने अपनी इच्छा बदल दी, और उनकी जो हानि करने की ठानी थी, उसको न किया।"

5 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग दो



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग दो
परमेश्वर का धर्मी स्वभाव     भाग दो
हालाँकि परमेश्वर का क्रोध मनुष्य से छिपा हुआ और अज्ञात है, फिर भी यह किसी अपराध को नहीं सहता है
समस्त मूर्ख और अबोध मानवता के प्रति परमेश्वर का उपचार मुख्य रूप से दया और सहनशीलता पर आधारित है। दूसरी ओर, उसका क्रोध समय और चीज़ों के अति विशाल पैमाने में छिपा हुआ है; मनुष्य इससे अनजान है। परिणामस्वरूप, यह मनुष्य के लिए कठिन है कि वह परमेश्वर को उसका क्रोध प्रदर्शित करते हुए देखे, और साथ ही उसके क्रोध को समझना भी कठिन है। जैसा कहा जा चुका है, मनुष्य परमेश्वर के क्रोध को हल्के में लेता है। जब मनुष्य परमेश्वर के अंतिम कार्य और सहनशीलता के कदम और मनुष्य की क्षमा का सामना करता है - अर्थात्, जब परमेश्वर की दया का अंतिम उदाहरण और उसकी अंतिम चेतावनी उनके पास पहुँचती है - यदि वे तब भी परमेश्वर का विरोध करने के लिए उन्हीं तरीकों का इस्तेमाल करते हैं और पश्चाताप करने, अपने मार्गों को सुधारने या उसकी दया को स्वीकार करने का कोई प्रयास नहीं करते हैं, तो परमेश्वर आगे से उनको अपनी सहनशीलता और धैर्य प्रदान नहीं करेगा। इसके विपरीत, यह वह समय है जब परमेश्वर अपनी दया को वापस ले लेगा। इसके पश्चात्, वह बस अपने क्रोध को प्रकट करेगा। वह अलग अलग तरीकों से अपने क्रोध को प्रकट कर सकता है, बिलकुल वैसे ही जैसे वह लोगों को दण्ड देने और नष्ट करने के लिए अलग अलग पद्धतियों का इस्तेमाल करता है।

4 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग एक



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग एक

परमेश्वर का धर्मी स्वभाव     भाग एक


तुम सब परमेश्वर के अधिकार के बारे में पिछली सभा में सुन चुके हो, अब मैं आश्वस्त हूं कि तुम सब उस मुद्दे पर शब्दों की व्यूह रचना के साथ पूर्ण रूप से सुसज्जित हो गए हो। तुम सब कितना अधिक स्वीकार कर सकते हो, आभास कर सकते और समझ सकते हो यह इस पर निर्भर करता है कि तुम सब उसके लिए कितना प्रयास करोगे। यह मेरी आशा है कि तुम सब इस मुद्दे तक बड़े उत्साह से पहुंच सको; तुम लोगों को किसी भी कीमत पर इसके साथ अधूरे मन से व्यवहार नहीं करना चाहिए। अब, क्या परमेश्वर के अधिकार को जानना परमेश्वर की सम्पूर्णता को जानने के समान है? कोई कह सकता है कि परमेश्वर के अधिकार को जानना स्वयं अद्वितीय परमेश्वर को जानने की शुरुआत है, और कोई यह भी कह सकता है कि परमेश्वर के अधिकार को जानने का अर्थ है कि किसी ने स्वयं अद्वितीय परमेश्वर की हस्ती को जानने हेतु पहले से ही द्वार के भीतर कदम रख दिया है। यह समझ परमेश्वर को जानने का एक भाग है। दूसरा भाग क्या है? यह वह विषय है जिसके बारे मैं आज विचार विमर्श करना चाहूंगा - परमेश्वर का धर्मी स्वभाव।

3 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग पांच के क्रम में



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग पांच के क्रम में

परमेश्वर का अधिकार (I)     भाग पांच के क्रम में
क्या अब तुम लोगों के पास परमेश्वर के अधिकार का एक नया ज्ञान है? पहला, परमेश्वर का अधिकार जिसका अभी जिक्र किया गया, और मनुष्य की सामर्थ में एक अन्तर है। और वह अन्तर क्या है? कुछ लोग कहते हैं कि दोनों के बीच कोई तुलना नहीं की जा सकती है। यह सही है! यद्यपि लोग कहते हैं कि दोनों के बीच में कोई तुलना नहीं की जा सकती है, फिर भी मनुष्य के विचारों और धारणाओं में कई बार उन दोनों को अगल बगल रखकर तुलना करते हुए मनुष्य की सामर्थ अकसर अधिकार के साथ भ्रम में पड़ जाती है। यहाँ पर क्या हो रहा है? क्या लोग असावधानी से एक को दूसरे से बदलने की ग़लती नहीं कर रहे हैं? ये दोनों जुड़े हुए नहीं हैं, उनके बीच में कोई तुलना नहीं है, फिर भी लोग अपने आपकी सहायता नहीं कर सकते हैं। इस का समाधान कैसे किया जाना चाहिए? यदि तुम सचमुच में एक समाधान चाहते हो, तो उसका एकमात्र तरीका परमेश्वर के अधिकार को समझना और जानना है। सृष्टिकर्ता के अधिकार और सामर्थ को समझने और जानने के बाद, तुम एक ही साँस में मनुष्य की सामर्थ और परमेश्वर के अधिकार का जिक्र नहीं करोगे।

2 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग पांच



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग पांचपरमेश्वर का अधिकार (I)     भाग पांच


नीचे दिए गए वचन परमेश्वर के अधिकार को जानने के लिए अति आवश्यक हैं, और उन का अर्थ नीचे सभा के विचार विमर्श में दिया गया है। आओ हम निरन्तर पवित्र शास्त्र को पढ़ते रहें।
4. शैतान को परमेश्वर की आज्ञा
(अय्यूब 2:6) यहोवा ने शैतान से कहा, "सुन, वह तेरे हाथ में है, केवल उसका प्राण छोड़ देना।"
शैतान ने कभी सृष्टिकर्ता के अधिकार का उल्लंघन करने की हिम्मत नहीं की है, और इसी वजह से, सभी जीवित प्राणी व्यवस्था के अनुसार रहते हैं

यह अय्यूब की पुस्तक में से एक लघु अंश है, और इन वचनों में "वह " शब्द अय्यूब की ओर संकेत करता है। हालांकि यह वाक्य छोटा सा है, फिर भी यह वाक्य बहुत सारे विषयों पर प्रकाश डालता है। यह आत्मिक संसार में परमेश्वर और शैतान के बीच वार्तालाप की व्याख्या करता है, और हमें यह बताता है कि परमेश्वर के वचनों का उद्देश्य शैतान था। यह इस बात को भी दर्शाता है कि यह वाक्य परमेश्वर द्वारा विशेष रूप से क्यों कहा गया था।

30 मार्च 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग तीन



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग तीन

परमेश्वर का अधिकार (I)     भाग तीन
2. परमेश्वर ने मनुष्य के साथ एक वाचा बाँधने के लिए अपने वचनों को उपयोग किया।
(उत्पत्ति 9:11-13) "और मैं तुम्हारे साथ अपनी यह वाचा बाँधता हूँ कि सब प्राणी फिर जलप्रलय से नाश न होंगेः और पृथ्वी के नाश करने के लिए फिर जलप्रलय न होगा।” फिर परमेश्वर ने कहा, “जो वाचा मैं तुम्हारे साथ, और जितने प्राणी तुम्हारे संग हैं उन सब के साथ भी युग युग की पीढ़ियों के लिए बाँधता हूँ, उसका यह चिन्ह हैः कि मैं ने बादल में अपना धनुष रखा है, वह मेरे और पृथ्वी के बीच में वाचा का चिन्ह होगा।"

29 मार्च 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग दो के क्रम में



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग दो के क्रम में

परमेश्वर का अधिकार (I)    भाग दो के क्रम में

छठवें दिन, सृष्टिकर्ता ने कहा, और हर प्रकार के जीवित प्राणी जो उसके मस्तिष्क में थे एक के बाद एक अपने आप को प्रगट करने लगे
स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर न होते हुए, सब वस्तुओं को बनाने के लिए सृष्टिकर्ता का कार्य लगातार पाँचवे दिन तक चलता रहा, उसके तुरन्त बाद सृष्टिकर्ता ने सब वस्तुओं की सृष्टि के छठवें दिन का स्वागत किया। यह दिन एक और नई शाम थी, तथा एक और असाधारण दिन था। तब, इस नए दिन की शाम के लिए सृष्टिकर्ता की क्या योजना थी? कौन से नए जीव जन्तुओं को उसने उत्पन्न, और पैदा करना चाहा? ध्यान से सुनो, यह सृष्टिकर्ता की आवाज़ है....।

7 जन॰ 2019

कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन


 पुरुषों के बीच में शायद ही कोई परमेश्वर के हृदय की तीव्र इच्छा को समझता है क्योंकि लोगों की क्षमता बहुत कम है और उनकी आध्यात्मिक संवेदनशीलता काफी सुस्त है, और क्योंकि वे सभी न तो देखते हैं और न ही ध्यान देते हैं कि परमेश्वर क्या कर रहा है। इसलिए परमेश्वर मनुष्य के बारे में चिंता करता रहता है, मानो कि मनुष्य की पाशविक प्रकृति किसी भी क्षण बाहर आ सकती हो। यह आगे दर्शाता है कि परमेश्वर का पृथ्वी पर आना बड़े प्रलोभनों के साथ-साथ है। किन्तु लोगों के एक समूह को पूरा करने के वास्ते, महिमा से लदे हुए, परमेश्वर ने मनुष्य को अपने हर अभिप्राय के बारे में, कुछ भी नहीं छिपाते हुए, बता दिया।

31 मार्च 2018

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है"


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं "परमेश्वर के जीवन की महानता और सामर्थ्य किसी भी प्राणी के द्वारा मापी नहीं जा सकती। यह ऐसा ही है, ऐसा ही था और आने वाले समय में भी इसी प्रकार से रहेगा। और दूसरा रहस्य है: सभी प्राणियों के लिये परमेश्वर के द्वारा ही जीवन का स्रोत आता है, चाहे वह किसी भी रूप या स्वरूप में हो। तुम किसी भी प्रकार के प्राणी हो, तुम परमेश्वर के द्वारा निर्धारित जीवन के मार्ग को बदल नहीं सकते। किसी भी मामले में, मैं मनुष्य के लिए यही इच्छा करता हूं कि मनुष्य यह समझें कि बिना देखभाल, सुरक्षा और परमेश्वर के प्रावधान के, मनुष्य जो प्राप्त करने के लिए रचा गया है वह प्राप्त नहीं कर सकता, चाहे वह कितना भी अधिक प्रयास या संघर्ष कर ले। परमेश्वर की ओर से प्रदान किये गये जीवन के बिना, मनुष्य अपने जीवन के मूल्य और उद्देश्य को खो देता है।"

26 फ़र॰ 2018

परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है

परमेश्वर,वचन,सत्य,सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन
सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन
मानवजाति का सदस्य और सच्चे ईसाई होने के नाते, अपने मन और शरीर को परमेश्वर के आदेश को पूरा करने के लिए समर्पित करना हम सभी की ज़िम्मेदारी और दायित्व है, क्योंकि हमारा सम्पूर्ण अस्तित्व परमेश्वर से आया है, और यह परमेश्वर की संप्रभुता के कारण अस्तित्व में है।

17 फ़र॰ 2018

तुम्हें अपने मार्ग के अंतिम चरण में कैसे चलना चाहिए

यीशु,परमेश्वर,सत्य
चमकती पूर्वी बिजली,सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया
तुम सब अब अपने मार्ग के अंतिम चरण में हो, और यह इसका एक महत्वपूर्ण भाग है। शायद तुमने काफी दुःख सहा है, बहुत कार्य किया है, बहुत से मार्गों पर यात्रा की है, और बहुत संदेशों को सुना है, और यहाँ तक पहुँचना सरल नहीं रहा है। यदि तुम उस दुःख को सह नहीं सकते जो तुम्हारे सामने है और यदि तुम वही करते रहते हो जो तुमने अतीत में किया था तो तुम सिद्ध नहीं किए जा सकते।

31 अक्टू॰ 2017

एक योग्य चरवाहे को किन साजो-सामान से युक्त होना चाहिए

एक योग्य चरवाहे को किन साजो-सामान से युक्त होना चाहिए

जब पवित्र आत्मा लोगों पर काम करता है तो वे लोग जिन परिस्थितियों में होंगे, उनकी तुम्हें समझ होनी चाहिए। विशेष कर, जो लोग ईश्वर की सेवा करने के लिए समन्वय करते हैं, उन्हें उन विभिन्न परिस्थितियों की और भी बेहतर समझ होनी चाहिए जो पवित्र आत्मा के लोगों पर कार्य करने से पैदा होती हैं। यदि तुम अनेक अनुभवों और प्रवेश करने के कई तरीकों के बारे में केवल बात करते हो, तो यह दिखाता है कि तुम्हारा अनुभव बेहद एक तरफा है। यथार्थ में कई स्थितियों को समझे बिना, तुम अपने स्वभाव में परिवर्तन ला पाने में असमर्थ हो। यदि तुम कई स्थितियों को समझ गए हो, तो तुम पवित्र आत्मा के काम की विभिन्न अभिव्यक्तियों को समझ पाओगे, और स्पष्ट रूप से आर-पार देख सकोगे और बुरी आत्माओं के बहुत से कामों को समझ पाओगे। तुम्हें लोगों के कई विचारों को बेनकाब कर सीधे मुद्दे के केंद्रबिंदु पर आना चाहिए; तुम्हें लोगों के अभ्यास में आने वाले भटकाव या परमेश्वर पर विश्वास करने में होने वाली समस्याओं पर भी ध्यान ले जाना चाहिए ताकि वे उन्हें पहचान सकें। कम से कम, तुम्हें उन्हें नकारात्मक या निष्क्रिय महसूस नहीं कराना चाहिए।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...