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2 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग पांच



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग पांचपरमेश्वर का अधिकार (I)     भाग पांच


नीचे दिए गए वचन परमेश्वर के अधिकार को जानने के लिए अति आवश्यक हैं, और उन का अर्थ नीचे सभा के विचार विमर्श में दिया गया है। आओ हम निरन्तर पवित्र शास्त्र को पढ़ते रहें।
4. शैतान को परमेश्वर की आज्ञा
(अय्यूब 2:6) यहोवा ने शैतान से कहा, "सुन, वह तेरे हाथ में है, केवल उसका प्राण छोड़ देना।"
शैतान ने कभी सृष्टिकर्ता के अधिकार का उल्लंघन करने की हिम्मत नहीं की है, और इसी वजह से, सभी जीवित प्राणी व्यवस्था के अनुसार रहते हैं

यह अय्यूब की पुस्तक में से एक लघु अंश है, और इन वचनों में "वह " शब्द अय्यूब की ओर संकेत करता है। हालांकि यह वाक्य छोटा सा है, फिर भी यह वाक्य बहुत सारे विषयों पर प्रकाश डालता है। यह आत्मिक संसार में परमेश्वर और शैतान के बीच वार्तालाप की व्याख्या करता है, और हमें यह बताता है कि परमेश्वर के वचनों का उद्देश्य शैतान था। यह इस बात को भी दर्शाता है कि यह वाक्य परमेश्वर द्वारा विशेष रूप से क्यों कहा गया था।

1 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग चार के क्रम में



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग चार के क्रम मेंपरमेश्वर का अधिकार (I)    भाग चार के क्रम में


सभी चीज़ों व प्राणियों के ऊपर सृष्टिकर्ता के नियन्त्रण और प्रभुत्व की सच्चाई सृष्टिकर्ता के अधिकार के सच्चे अस्तित्व के विषय में बोलते हैं
उसी प्रकार से, अय्यूब के ऊपर यहोवा की आशीष अय्यूब की पुस्तक में दर्ज है। परमेश्वर ने अय्यूब को क्या दिया था? "और यहोवा ने अय्यूब के पिछले दिनों में उसको अगले दिनों से अधिक आशीष दी; और उसके चौदह हज़ार भेड़ बकरियाँ, छः हज़ार ऊँट, हज़ार जोड़ी बैल, और हज़ार गदहियाँ हो गईं" (अय्यूब 42:12)। मनुष्य के नज़रिए से, अय्यूब को दी गई ये चीज़ें क्या थीं? क्या वे मनुष्य की सम्पत्ति थी? इन सम्पत्तियों के द्वारा क्या अय्यूब उस युग में बहुत अधिक धनी हो गया था? उसे ऐसी सम्पत्तियाँ कैसे प्राप्त हुईं थीं? उसका धन कैसे बढ़ा था? यहाँ पर यह बात कही नहीं जा रही है कि परमेश्वर की आशीष के लिए धन्यवाद जिस से अय्यूब ने इन सम्पत्तियों को प्राप्त किया? अय्यूब इन सम्पत्तियों को किस नज़रिए से देखता था, और वह परमेश्वर की आशीषों को किस प्रकार महत्व देता था, ये वो बातें नहीं हैं जिन के भीतर हम जाएँगे। जब भी परमेश्वर की आशीषों की बात होती है, सभी लोग दिन और रात परमेश्वर से आशीषित होने की लालसा करते हैं, परन्तु मनुष्य के पास इसके ऊपर नियन्त्रण नहीं होता है कि वह अपने जीवनकाल के दौरान कितनी सम्पत्तियाँ प्राप्त कर सकता है, और यह कि वह परमेश्वर से आशीषों को प्राप्त करेगा भी कि नहीं - और यह एक निर्विवादित सत्य है!

30 मार्च 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग तीन



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग तीन

परमेश्वर का अधिकार (I)     भाग तीन
2. परमेश्वर ने मनुष्य के साथ एक वाचा बाँधने के लिए अपने वचनों को उपयोग किया।
(उत्पत्ति 9:11-13) "और मैं तुम्हारे साथ अपनी यह वाचा बाँधता हूँ कि सब प्राणी फिर जलप्रलय से नाश न होंगेः और पृथ्वी के नाश करने के लिए फिर जलप्रलय न होगा।” फिर परमेश्वर ने कहा, “जो वाचा मैं तुम्हारे साथ, और जितने प्राणी तुम्हारे संग हैं उन सब के साथ भी युग युग की पीढ़ियों के लिए बाँधता हूँ, उसका यह चिन्ह हैः कि मैं ने बादल में अपना धनुष रखा है, वह मेरे और पृथ्वी के बीच में वाचा का चिन्ह होगा।"

29 मार्च 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग दो के क्रम में



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग दो के क्रम में

परमेश्वर का अधिकार (I)    भाग दो के क्रम में

छठवें दिन, सृष्टिकर्ता ने कहा, और हर प्रकार के जीवित प्राणी जो उसके मस्तिष्क में थे एक के बाद एक अपने आप को प्रगट करने लगे
स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर न होते हुए, सब वस्तुओं को बनाने के लिए सृष्टिकर्ता का कार्य लगातार पाँचवे दिन तक चलता रहा, उसके तुरन्त बाद सृष्टिकर्ता ने सब वस्तुओं की सृष्टि के छठवें दिन का स्वागत किया। यह दिन एक और नई शाम थी, तथा एक और असाधारण दिन था। तब, इस नए दिन की शाम के लिए सृष्टिकर्ता की क्या योजना थी? कौन से नए जीव जन्तुओं को उसने उत्पन्न, और पैदा करना चाहा? ध्यान से सुनो, यह सृष्टिकर्ता की आवाज़ है....।

23 मार्च 2019

आराधना के गी-ज्योति है परमेश्वर का वचन



  •  
  • I
  • जगा दिया मुझे पूरब की बिजली ने,
  • देखा परमेश्वर का वचन देह में प्रकट होते मैंने।
  • न्याय और ताड़ना के वचन,
  • जीतते और बचाते हैं मुझे।
  • टुकड़े-टुकड़े कर दिये मेरे, नाकामियों, इम्तहानों, यातनाओं ने।
  • उजागर हुई भ्रष्टता मेरी
  • अहंकारी था मैं, सिर झुका लिया मैंने।

22 नव॰ 2018

एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है



एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है
भ्रष्टाचार के हजारों सालों बाद, मनुष्य सुन्न और मूर्ख बन गया है, एक दुष्ट आत्मा जो परमेश्वर का विरोध करती है, इस हद तक कि परमेश्वर के प्रति मनुष्य की विद्रोहशीलता इतिहास की पुस्तकों में दर्ज है, और यहाँ तक कि मनुष्य खुद भी अपने विद्रोही स्वभाव का पूरा लेखा देने के अयोग्य है—क्योंकि मनुष्य शैतान के द्वारा पूरी तरह से भ्रष्ट किया जा चुका है, और शैतान के द्वारा रास्ते से भटका दिया गया है कि नहीं जानता कि कहाँ मुड़ना हैं।

14 नव॰ 2018

संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन



संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन
जिस दिन सभी चीज़ें पुनर्जीवित हुईं थीं, मैं मनुष्यों के बीच आया, और मैंने उसके साथ अद्भुत दिन और रात बिताये हैं। केवल इस अवसर पर ही मनुष्य मेरी सुलभता को थोड़ा सा समझता है, और जैसे-जैसे मेरे साथ उसकी अंतःक्रिया बार-बार होने लगती है, तो वह जो मेरे पास है और जो मैं हूँ उसमें से थोड़ा सा देखता है—और परिणामस्वरूप, उसे मेरे बारे में कुछ ज्ञान प्राप्त हो जाता है।

8 नव॰ 2018

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI परमेश्वर की पवित्रता (III) भाग चार


स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI

    परमेश्वर की पवित्रता (III)     भाग चार

आओ हम इसके विषय में बात करने के लिए पीछे जाएँ कि शैतान मनुष्य को भ्रष्ट करने के लिए कौन से माध्यमों को काम में लाता है। हमने अभी अभी परमेश्वर के विभिन्न तरीकों के विषय में बात की है जिसके अंतर्गत परमेश्वर मनुष्य पर कार्य करता है जिसे तुम लोगों में से हर एक स्वयं के लिए अनुभव कर सकता है, अतः मैं अधिक विस्तार में नहीं जाऊँगा। परन्तु अपने हृदयों में कदाचित् तुम लोग उन साधनों के बारे में अस्पष्ट हो जिन्हें शैतान मनुष्य को भ्रष्ट करने के लिए इस्तेमाल करता है, या तुम विस्तृत रूप से उसके बारे में नहीं जानते हो, अतः इसके बारे में बात करना तुम लोगों को लाभ पहुँचाएगा। क्या तुम लोग इसे समझना चाहते हो? (हाँ।) हो सकता है कि तुम लोगों में से कुछ लोग पूछोगेः "शैतान के बारे में फिर से बात क्यों करना? हमने पहले ही देख लिया है कि शैतान दुष्ट है और हमने पहले से ही शैतान से घृणा की है, अतः क्या शैतान हमें अभी भी भ्रष्ट कर सकता है?" वास्तव में, हालाँकि हो सकता है कि तुम लोग शैतान से घृणा करो, फिर भी तुम लोग इसकी सही प्रकृति का पूरी तरह से पता नहीं लगा सकते हो। ऐसी कुछ चीज़ें हैं जिन्हें तुम लोगों को सामना करने की आवश्यकता है, अन्यथा तुम लोग वास्तव में शैतान के प्रभाव से अलग नहीं हो सकते हो।

4 अक्टू॰ 2018

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो


मनुष्य को शैतान के द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया है, और वह परमेश्वर के सभी जीवधारियों में सबसे ऊपर है, अतः मनुष्य को परमेश्वर के उद्धार की आवश्यकता है। परमेश्वर के उद्धार का विषय मनुष्य है, न कि शैतान, और जिसे बचाया जाना चाहिए वह मनुष्य की देह है, एवं मनुष्य का प्राण है, और शैतान नहीं है। शैतान परमेश्वर के सम्पूर्ण विनाश का विषय है, मनुष्य परमेश्वर के उद्धार का विषय है, और मनुष्य के शरीर को शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया जा चुका है, अतः जिसे पहले बचाना है वह मनुष्य का शरीर ही होगा। मनुष्य की देह को बहुत ज़्यादा भ्रष्ट किया जा चुका है, और यह कुछ ऐसा बन गया है जो परमेश्वर का विरोध करता है, जो यहाँ तक कि खुले तौर पर परमेश्वर का विरोध करता है और उसके अस्तित्व को भी नकारता है। इस भ्रष्ट देह का उपचार करना बहुत ही मुश्किल है, और देह के भ्रष्ट स्वभाव की अपेक्षा किसी और चीज़ के साथ निपटना या उसे बदलना ज़्यादा कठिन नहीं है। शैतान परेशानियां खड़ी करने के लिए मनुष्य की देह के भीतर आता है, और परमेश्वर के कार्य में गड़बड़ी डालने के लिए मनुष्य की देह का उपयोग करता है, और परमेश्वर की योजना को बाधित करता है, और इस प्रकार मनुष्य शैतान, एवं परमेश्वर का शत्रु बन चुका है। मनुष्य को बचाने के लिए, पहले उस पर विजय पाना होगा। यही कारण है कि परमेश्वर चुनौती के लिए उठता है, और देह में होकर आता है कि वह कार्य करे जिसे उसने करने का इरादा किया है, और शैतान के साथ लड़े। उसका उद्देश्य मनुष्य का उद्धार है, जिसे भ्रष्ट किया जा चुका है, और शैतान की पराजय एवं उसका सम्पूर्ण विनाश है, जो उसके विरुद्ध विद्रोह करता है। वह मनुष्य पर विजय पाने के अपने कार्य के जरिए शैतान को पराजित करता है, और ठीक उसी समय भ्रष्ट मानवजाति का उद्धार करता है।

11 सित॰ 2018

हम हैं सबसे अधिक धन्य

  • हम हैं सबसे अधिक धन्य

  •  
  • I
  • है सब परमेश्वर का अनुग्रह कि हम देख सकते हैं उसकी सुंदरता,
  • कि आज हम करते हैं उसे प्रेम करने की कोशिश,
  • कि हम चाहते हैं स्वीकार करना
  • हमारे समय के राज्य का प्रशिक्षण।

6 सित॰ 2018

केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है

केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है


प्रत्येक व्यक्ति यह महसूस करता है कि परमेश्वर का प्रबंधन अजीब है, क्योंकि लोग यह सोचते हैं कि परमेश्वर का प्रबंधन पूरी तरह से मनुष्य से सम्बन्धित नहीं है। वे यह सोचते हैं कि यह प्रबंधन केवल परमेश्वर का ही कार्य है, यह उसी के मतलब का है, और इसलिए मनुष्य परमेश्वर के प्रबंधन के प्रति बिल्कुल तटस्थहै। इस प्रकार से, मानवजाति का उद्धार अस्पष्ट और अनिश्चित हो गया है, और अब केवल खाली भाषणबाजी है। हालांकि मनुष्य परमेश्वर का अनुसरण करता है ताकि वह बच जाए और खूबसूरत गंतव्य में प्रवेश कर जाए, मनुष्य को कुछ भी चिंता नहीं है कि परमेश्वर अपना कार्य किस प्रकार से करता है। मनुष्य चिंता नहीं करता कि परमेश्वर की क्या करने की योजना है और बचने के लिए उसे क्या भूमिका अदा करनी होगी। यह कितना दुखद है! मनुष्य का उद्धार परमेश्वर के प्रबंधकारणीय कार्य से अविभाज्य है, यह परमेश्वर की योजना से अलग तो किया ही नहीं जा सकता है। फिर भी मनुष्य परमेश्वर के प्रबंधकारणीय कार्य के बारे में कुछ भी नहीं सोचता है, और इस प्रकार से वह परमेश्वर से और भी अधिक दूर होता जाता है।

24 अग॰ 2018

परमेश्वर मूल्यवान मानता है उनको जो उसकी सुनते और उसका आदेश मानते हैं

  • परमेश्वर मूल्यवान मानता है उनको
  • जो उसकी सुनते और उसका आदेश मानते हैं

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  • I
  • परमेश्वर को नहीं फर्क पड़ता हो मनुष्य नम्र या महान।

13 जुल॰ 2018

Hindi Christian Song | "परमेश्वर के देहधारण से ही इंसान उसका विश्वासपात्र बन सकता है" | God Is Love

Hindi Christian Song | "परमेश्वर के देहधारण से ही इंसान उसका विश्वासपात्र बन सकता है" | God Is Love

जब परमेश्वर बनाता है खुद को विनम्र और देहधारण कर रहता है इंसानों के बीच, तभी इंसां बन सकते हैं उसके हमराज़, और हो सकती है दोस्ती उनके बीच। जब परमेश्वर बनाता है खुद को विनम्र और देहधारण कर रहता है इंसानों के बीच, तभी इंसां बन सकते हैं उसके हमराज़, और हो सकती है दोस्ती उनके बीच। परमेश्वर है असाधारण, आत्मा का और समझ से परे, इंसां उसका हमराज़ बने भी तो कैसे बने? परमेश्वर के देहधारण से ही इंसां उसका विश्वासपात्र बन सकता है। परमेश्वर के देहधारण से ही इंसां उसका विश्वासपात्र बन सकता है। जब ले लेता है वो उसी मानव देह का रूप, केवल तब ही, इंसां समझ पाता है उसकी मर्ज़ी, और परमेश्वर को होती है उसकी प्राप्ति। देह में ही परमेश्वर बोलता और कार्य करता है, इंसां के क्लेश, गम और खुशियों को साझा करता है, उनके संसार में जीते हुए, उनकी रक्षा करता और मार्ग दिखाता है, और वे उसकी कृपा और मुक्ति पा सकें इसलिए उन्हें शुद्ध बनाता है। परमेश्वर है असाधारण, आत्मा का और समझ से परे, इंसां उसका हमराज़ बने भी तो कैसे बने? परमेश्वर के देहधारण से ही इंसां उसका विश्वासपात्र बन सकता है। इसके द्वारा ही इंसां सच में समझ पाता है परमेश्वर की इच्छा, और बन जाता है उसका हमराज़; यही तो है व्यावहारिकता। अगर परमेश्वर हो अदृश्य और हो दूर इंसां की पहुँच से, तो इंसां परमेश्वर का हमराज़ बने कैसे? ये सिद्धांत बेमतलब नहीं तो क्या है? परमेश्वर के देहधारण से ही इंसां उसका विश्वासपात्र बन सकता है। परमेश्वर के देहधारण से ही इंसां उसका विश्वासपात्र बन सकता है। परमेश्वर के देहधारण से ही इंसां उसका विश्वासपात्र बन सकता है। "वचन देह में प्रकट होता है" से
चमकती पूर्वी बिजली, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का सृजन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकट होने और उनका काम, परमेश्वर यीशु के दूसरे आगमन, अंतिम दिनों के मसीह की वजह से किया गया था। यह उन सभी लोगों से बना है जो अंतिम दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और उसके वचनों के द्वारा जीते और बचाए जाते हैं। यह पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्थापित किया गया था और चरवाहे के रूप में उन्हीं के द्वारा नेतृत्व किया जाता है। इसे निश्चित रूप से किसी मानव द्वारा नहीं बनाया गया था। मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन है। परमेश्वर की भेड़ परमेश्वर की आवाज़ सुनती है। जब तक आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं, आप देखेंगे कि परमेश्वर प्रकट हो गए हैं।

2 जून 2018

The True Meaning of Faith in God | Hindi Gospel Movie Trailer | "परमेश्वर में आस्था"

The True Meaning of Faith in God | Hindi Gospel Movie Trailer | "परमेश्वर में आस्था"

यू कोंगगुआंग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के लिए सुसमाचार देता है। सुसमाचार देते समय चीन की साम्यवादी सरकार उसके पीछे लगी रहती थी। वह पहाड़ों में भाग गया, जहाँ उसे स्थानीय गृह कलीसिया के एक सहकर्मी, झेंग सुन से मदद मिली। जब वे पहली बार एक दूसरे से मिले, उन्हें ऐसा लगा कि वे पहले ही बहुत समय से एक दूसरे को जानते हैं। झेंग सुन, यू कोंगगुआंग को एक फूस की झोपड़ी में ले गए जहाँ वह और उनके सह-कर्मी इकट्ठे हुए।

31 मई 2018

मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना (भाग तीन)

मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना (भाग तीन)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "जब एक बार विजय के कार्य को पूरा कर लिया जाता है, तब मनुष्य को एक सुन्दर संसार में पहुंचाया जाएगा। निश्चित रूप से, यह जीवन तब भी पृथ्वी पर ही होगा, परन्तु यह मनुष्य के आज के जीवन से पूरी तरह से भिन्न होगा। यह वह जीवन है जो मानवजाति के तब पास होगा जब सम्पूर्ण मानवजाति पर विजय प्राप्त कर लिया जाता है, यह पृथ्वी पर मनुष्य के लिए, और मानवजाति के लिए एक नई शुरुआत होगी कि उसके पास ऐसा जीवन हो जो इस बात का सबूत होगा कि मानवजाति ने एक नए एवं सुन्दर आयाम में प्रवेश कर लिया है।

18 अप्रैल 2018

God Is Love | New Hindi Christian Song 2018 | शुद्ध प्रेम बिना दोष के

 God Is Love | New Hindi Christian Song 2018 | शुद्ध प्रेम बिना दोष के

शुद्ध प्रेम बिना दोष के प्रेम एक शुद्ध भावना है, शुद्ध बिना किसी भी दोष के। अपने हृदय का प्रयोग करो, प्रेम के लिए, अनुभूति के लिए और परवाह करने के लिए। प्रेम नियत नहीं करता, शर्तें, बाधाएँ या दूरी।

18 मार्च 2018

Hindi Best Christian Song | सबसे बड़ी आशीष जो ईश्वर मानव को प्रदान करता है

Hindi Best Christian Song | सबसे बड़ी आशीष जो ईश्वर मानव को प्रदान करता है

परमेश्वर के शब्दों के समापन के साथ, उसका साम्राज्य है बन रहा। फिर से मानव के होने से सामान्य, प्रभु का साम्राज्य बना। साम्राज्य में रहते परमेश्वर के जन, फिर पाओगे तुम मनुष्योचित जीवन। आज, तुम जीते हो प्रभु के समक्ष; उसके साम्राज्य में जिओगे तुम कल।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...