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10 जुल॰ 2019

2. हर किसी को यह समझना चाहिए कि अंतिम दिनों में परमेश्वर द्वारा व्यक्त की गई सारी सच्चाई अनन्त जीवन का मार्ग है।

VII. अंतिम दिनों का मसीह जो लाता है केवल वही अनन्त जीवन का मार्ग है, इस बारे में अवश्य ही हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

2. हर किसी को यह समझना चाहिए कि अंतिम दिनों में परमेश्वर द्वारा व्यक्त की गई सारी सच्चाई अनन्त जीवन का मार्ग है।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)।
"जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। जो जय पाए, उस को दूसरी मृत्यु से हानि न पहुँचेगी" (प्रकाशितवाक्य 2:11)।
"फिर उसने मुझे बिल्‍लौर की सी झलकती हुई, जीवन के जल की नदी दिखाई, जो परमेश्‍वर और मेम्ने के सिंहासन से निकलकर उस नगर की सड़क के बीचों बीच बहती थी। नदी के इस पार और उस पार जीवन का वृक्ष था; उसमें बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस वृक्ष के पत्तों से जाति-जाति के लोग चंगे होते थे" (प्रकाशितवाक्य 22:1-2)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर स्वयं ही जीवन है, सत्य है, और उसका जीवन और सत्य साथ ही साथ रहते हैं। जो सत्य को प्राप्त करने में असफल रहते हैं वे कभी भी जीवन को प्राप्त नहीं कर सकते। बिना मार्गदर्शन, सहायता और सत्य के प्रावधान के तुम केवल संदेश, सिद्धांत और मृत्यु को ही प्राप्त करोगे। परमेश्वर का जीवन सतत विद्यमान है, और उसका सत्य और जीवन एक साथ उपस्थित रहते हैं। यदि तुम सत्य के स्रोत को नहीं प्राप्त कर पाते, तो तुम जीवन के पोषण को प्राप्त नहीं कर पाओगे; यदि तुम जीवन के प्रावधान को प्राप्त नहीं कर सकते तो तुम्हारे जीवन में निश्चय ही सत्य नहीं होगा, और इसलिए कल्पनाओं और धारणाओं से दूरी होगी, तुम्हारी सम्पूर्ण देह केवल देह होगी, तुम्हारी घिनौनी देह। ध्यान रखो कि किताबों की बातें जीवन के तौर पर नहीं गिनी जाती हैं, इतिहास के लेखों को सत्य के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता, और अतीत के सिद्धांत आज के समय में परमेश्वर के द्वारा कहे गए वचनों का लेखा-जोखा नहीं माने जा सकते। केवल वही बात जो परमेश्वर ने पृथ्वी पर आकर और लोगों के बीच रहकर कही है, सत्य, जीवन, परमेश्वर की इच्छा है और कार्य करने का असली तरीका है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है" से

9 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग एक



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग एक
परमेश्वर का अधिकार (II)    भाग एक
आज हम "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है" के विषय पर अपनी सभा को जारी रखेंगे। हम पहले से ही इस विषय पर दो सभाएँ कर चुके हैं, पहला परमेश्वर के अधिकार से सम्बन्धित था, और दूसरा परमेश्वर के धर्मी स्वभाव से सम्बन्धित था। इन दोनों सभाओं को सुनने के पश्चात्, क्या तुम लोगों ने परमेश्वर की पहचान, हैसियत, और हस्ती की नई समझ हासिल की है? क्या इन अन्तः दृष्टियों ने परमेश्वर के अस्तित्व की सच्चाई के विषय में और अधिक ठोस ज्ञान और निश्चित्ता प्राप्त करने में तुम लोगों की सहायता की है? आज मैंने "परमेश्वर के अधिकार" के शीर्षक को विस्तार से बताने की योजना बनाई है।

8 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग पांच



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग पांच

परमेश्वर का धर्मी स्वभाव     भाग पांच
     (III) पांच प्रकार के लोग
फिलहाल के लिए, मैं परमेश्वर के धर्मी स्वभाव के विषय में हमारी सभा को यहीं छोडूंगा। आगे मैं परमेश्वर के अनुयायियों को अनेक श्रेणियों में वर्गीकृत करूंगा, परमेश्वर के विषय में उनकी समझ और उसके धर्मी स्वभाव के साथ उनकी समझ और अनुभव के अनुसार, ताकि तुम सब उस अवस्था को जिससे तुम सब वर्तमान में सम्बन्धित हो साथ ही साथ अपने वर्तमान डीलडौल को जान सको। परमेश्वर के विषय में उनके ज्ञान और उसके धर्मी स्वभाव के विषय में उनकी समझ के सम्बन्ध में, वे अलग अलग अवस्थाएं एवं डीलडौल जिन्हें लोग धारण करते हैं उन्हें साधारण तौर पर पांच प्रकारों में बांटा जा सकता है। इस विषय को अद्वितीय परमेश्वर और उसके धर्मी स्वभाव को जानने के आधार पर आधारित किया गया है; इसलिए, जैसे तुम सब निम्लिखित विषयवस्तु को पढ़ते हो, तो तुम्हें सावधानीपूर्वक यह मालूम करने की कोशिश करनी चाहिए कि तुम सब के पास परमेश्वर की अद्वितीयता और उसके धर्मी स्वभाव के सम्बन्ध में वास्तव में कितनी समझ और कितना ज्ञान है, और तब तुम सब यह अनुमान लगाने के लिए इसका उपयोग कर सकते हो कि तुम सब सचमुच में किस अवस्था से सम्बन्धित हो, तुम लोगों का डीलडौल सचमुच में कितना बड़ा है, और तुम सब सचमुच में किस प्रकार के व्यक्ति हो।

5 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग दो



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग दो
परमेश्वर का धर्मी स्वभाव     भाग दो
हालाँकि परमेश्वर का क्रोध मनुष्य से छिपा हुआ और अज्ञात है, फिर भी यह किसी अपराध को नहीं सहता है
समस्त मूर्ख और अबोध मानवता के प्रति परमेश्वर का उपचार मुख्य रूप से दया और सहनशीलता पर आधारित है। दूसरी ओर, उसका क्रोध समय और चीज़ों के अति विशाल पैमाने में छिपा हुआ है; मनुष्य इससे अनजान है। परिणामस्वरूप, यह मनुष्य के लिए कठिन है कि वह परमेश्वर को उसका क्रोध प्रदर्शित करते हुए देखे, और साथ ही उसके क्रोध को समझना भी कठिन है। जैसा कहा जा चुका है, मनुष्य परमेश्वर के क्रोध को हल्के में लेता है। जब मनुष्य परमेश्वर के अंतिम कार्य और सहनशीलता के कदम और मनुष्य की क्षमा का सामना करता है - अर्थात्, जब परमेश्वर की दया का अंतिम उदाहरण और उसकी अंतिम चेतावनी उनके पास पहुँचती है - यदि वे तब भी परमेश्वर का विरोध करने के लिए उन्हीं तरीकों का इस्तेमाल करते हैं और पश्चाताप करने, अपने मार्गों को सुधारने या उसकी दया को स्वीकार करने का कोई प्रयास नहीं करते हैं, तो परमेश्वर आगे से उनको अपनी सहनशीलता और धैर्य प्रदान नहीं करेगा। इसके विपरीत, यह वह समय है जब परमेश्वर अपनी दया को वापस ले लेगा। इसके पश्चात्, वह बस अपने क्रोध को प्रकट करेगा। वह अलग अलग तरीकों से अपने क्रोध को प्रकट कर सकता है, बिलकुल वैसे ही जैसे वह लोगों को दण्ड देने और नष्ट करने के लिए अलग अलग पद्धतियों का इस्तेमाल करता है।

29 मार्च 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग दो के क्रम में



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग दो के क्रम में

परमेश्वर का अधिकार (I)    भाग दो के क्रम में

छठवें दिन, सृष्टिकर्ता ने कहा, और हर प्रकार के जीवित प्राणी जो उसके मस्तिष्क में थे एक के बाद एक अपने आप को प्रगट करने लगे
स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर न होते हुए, सब वस्तुओं को बनाने के लिए सृष्टिकर्ता का कार्य लगातार पाँचवे दिन तक चलता रहा, उसके तुरन्त बाद सृष्टिकर्ता ने सब वस्तुओं की सृष्टि के छठवें दिन का स्वागत किया। यह दिन एक और नई शाम थी, तथा एक और असाधारण दिन था। तब, इस नए दिन की शाम के लिए सृष्टिकर्ता की क्या योजना थी? कौन से नए जीव जन्तुओं को उसने उत्पन्न, और पैदा करना चाहा? ध्यान से सुनो, यह सृष्टिकर्ता की आवाज़ है....।

26 मार्च 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I) भाग एक



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I परमेश्वर का अधिकार (I)  भाग एक

परमेश्वर का अधिकार (I)     भाग एक

मेरी पिछली अनेक सभाएँ परमेश्वर के कार्य, परमेश्वर के स्वभाव, और स्वयं परमेश्वर के विषय में थीं। इन सभाओं को सुनने के बाद, क्या तुम लोगों को एहसास होता है कि तुम सबने परमेश्वर के स्वभाव की समझ और ज्ञान को प्राप्त किया है? कितनी बड़ी समझ और ज्ञान को प्राप्त किया है? क्या तुम लोग उसे एक संख्या दे सकते हो? क्या इन सभाओं ने तुम सभी को परमेश्वर की और गहरी समझ दी है? क्या ऐसा कहा जा सकता है कि यह समझ परमेश्वर का सच्चा ज्ञान है? क्या ऐसा कहा जा सकता है कि परमेश्वर का यह ज्ञान और समझ परमेश्वर के सम्पूर्ण सार-तत्व, और जो उसके पास है और जो वह है उसका ज्ञान है? नहीं, बिलकुल नहीं!

5 जन॰ 2019

"कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच



मनुष्य की प्रविष्टि में तब ही सुधार आएगा जब परिवर्तन उसके दिल की गहराई में होगा, क्योंकि परमेश्वर का कार्य मनुष्य का—वह मनुष्य जिसे छुड़ा लिया गया है, जो अभी भी अंधेरे की शक्तियों के बीच रहता है, और जिसने कभी भी स्वयं को जगाया नहीं है—राक्षसों के एकत्रित होने के इस स्थान से पूर्ण उद्धार है; यह हो सकता है कि मनुष्य सदियों के पापों से मुक्त हो जाए, और परमेश्वर का चहेता बन जाए, और बड़े लाल अजगर को पूरी तरह से मार डाले, परमेश्वर के राज्य को स्थापित करे, और परमेश्वर के दिल को जल्द आराम पहुँचाए, यह बिना किसी रोकटोक के उस घृणा को अपने सीने से निकाल देना है, उन फफुंद से ढके रोगाणुओं को हटा देना है, तुम लोगों के लिए इस जीवन को छोड़ पाना संभव करना है जो एक बैल या घोड़े के जीवन से कुछ अलग नहीं, एक दास बनकर रहना छोड़ देना है, बड़े लाल अजगर से स्वतंत्रता से कुचले जाने या उसकी आज्ञा मानने को त्याग देना है; अब तुम लोग इस असफल राष्ट्र का हिस्सा नहीं रहोगे, अब घृणित बड़े लाल अजगर से नहीं जुड़े रहोगे, अब तुम लोग उसके दास नहीं रहोगे।

4 जन॰ 2019

"कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे


सृष्टि से लेकर अब तक, परमेश्वर ने इतनी पीड़ा सहन की है, और इतने सारे हमलों का सामना किया है। पर आज भी, मनुष्य परमेश्वर से अपनी माँगे कम नहीं करता है, वह आज भी परमेश्वर की जाँच करता है, आज भी उसमें उसके प्रति कोई सहिष्णुता नहीं है, और उसे सलाह देने, आलोचना करने और अनुशासित करने के अलावा मनुष्य और कुछ भी नहीं करता है, जैसे कि उसे गहरा भय हो कि परमेश्वर भटक जाएगा, कि पृथ्वी पर परमेश्वर पाशविक और अनुचित है, या दंगा कर रहा है, या वह कुछ भी काम का न रह जाएगा। मनुष्य का परमेश्वर के प्रति हमेशा इस तरह का रवैया रहा है। यह कैसे परमेश्वर को दुखी नहीं करता?

6 दिस॰ 2018

सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो


पौलुस के द्वारा किए गए कार्य को मनुष्य के सामने प्रदर्शित किया गया था, किन्तु परमेश्वर के लिए उसका प्रेम कितना शुद्ध था, उसके हृदय की गहराई में परमेश्वर के लिए उसका प्रेम कितना अधिक था—इन्हें मनुष्य के द्वारा देखा नहीं जा सकता है। मनुष्य केवल उस कार्य को देख सकता है जिसे उसने किया था, जिससे मनुष्य जान जाता है उसे निश्चित रूप से पवित्र आत्मा के द्वारा उपयोग किया गया था, और इस प्रकार मनुष्य सोचता है कि पौलुस पतरस की अपेक्षा बेहतर था, यह कि उसका कार्य अधिक बड़ा था, क्योंकि वह कलीसियाओं की आपूर्ति करने में सक्षम था।

28 नव॰ 2018

क्या आप जाग उठे हैं?


क्या आप जाग उठे हैं?
जब आप सामान्य मनुष्यत्व से बाहर निकलकर जीवन व्यतित करना प्राप्त कर लेते हैं, और पूर्ण कर दिए गए हैं, तो हालांकि आप भविष्यवाणी करने, या कोई रहस्य बताने में असमर्थ होंगे, आप एक मनुष्य के स्वरूप को प्रगट करेंगे और जीवन व्यतित करेंगे। परमेश्वर ने मनुष्य की रचना की, जिसके बाद मनुष्य शैतान द्वारा भ्रष्ट किया गया, और इस भ्रष्टाचार ने मनुष्यों को मृत देह बना दिया - और परिणामस्वरूप आपके बदलने के बाद, आप इन मृत देहों से भिन्न हो जाएंगे। वह परमेश्वर के वचन हैं जो लोगों की आत्मा को जीवन देते हैं और उन्हें नया जन्म देते हैं, और जब लोगों की आत्माएं नया जन्म लेंगी वे जाग उठेंगे। 'मृतक' का

14 नव॰ 2018

संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन



संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन
जिस दिन सभी चीज़ें पुनर्जीवित हुईं थीं, मैं मनुष्यों के बीच आया, और मैंने उसके साथ अद्भुत दिन और रात बिताये हैं। केवल इस अवसर पर ही मनुष्य मेरी सुलभता को थोड़ा सा समझता है, और जैसे-जैसे मेरे साथ उसकी अंतःक्रिया बार-बार होने लगती है, तो वह जो मेरे पास है और जो मैं हूँ उसमें से थोड़ा सा देखता है—और परिणामस्वरूप, उसे मेरे बारे में कुछ ज्ञान प्राप्त हो जाता है।

5 नव॰ 2018

परमेश्वर के वचनों की महत्ता


  • परमेश्वर के वचनों की महत्ता

  •  
  • I
  • परमेश्वर के विश्वासियों का कम से कम बर्ताव बेहतर होना चाहिये।
  • है सबसे अहम परमेश्वर के वचन रखना।
  • चाहे कुछ हो जाए, परमेश्वर के वचन से दूर न जाना।
  • परमेश्वर को जानना, ख़ुश करना, होता है उसके वचन से।
  • तमाम पंथ, देश और सम्प्रदाय
  • जीते जाएँगे भविष्य में उसके वचन से।
  • सीधे बात करेगा परमेश्वर लोगों से,
  • अपने हाथों में थामेंगे लोग उसके वचन।
  • लोग इसके ज़रिये पूर्ण बनाए जाँएगे,
  • हर जगह फैलते हैं परमेश्वर के वचन।

27 सित॰ 2018

"जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक

"जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक

1. मनुष्यजाति, जो शैतान के द्वारा अत्यधिक भ्रष्ट कर दी गई है, नहीं जानती है कि एक परमेश्वर भी है और इसने परमेश्वर की आराधना करना भी समाप्त कर दिया है। आरम्भ में, जब आदम और हव्वा को रचा गया था, यहोवा का प्रताप और साक्ष्य सर्वदा उपस्थित था। परन्तु भ्रष्ट होने के पश्चात, मनुष्य ने उस प्रताप और साक्ष्य को खो दिया, क्योंकि सभी ने परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह किया और उसका सम्मान करना पूर्णतया बन्द कर दिया। आज का विजय कार्य उस सम्पूर्ण साक्ष्य और उस सम्पूर्ण प्रताप को पुनः प्राप्त करने, और सभी मनुष्यों से परमेश्वर की आराधना करवाने के लिए है, जिससे सृष्ट वस्तुओं में साक्ष्य हो। कार्य के इस पड़ाव में यही किए जाने की आवश्यकता है। मनुष्यजाति को किस प्रकार जीता जाए? मनुष्य को सम्पूर्ण रीति से कायल करने के लिए वचनों के इस कार्य का प्रयोग किया जायेगा; उसे पूर्णत: अधीन बनाने के लिए, न्याय, ताड़ना, निर्दयी श्राप और प्रकटीकरण का प्रयोग किया जायेगा; और मनुष्य के विद्रोहीपन को ज़ाहिर करने और उसके विरोध का न्याय करने के द्वारा किया जाएगा; जिससे वह मानवता की अधार्मिकता और अशुद्धता को जान सके, जिसका प्रयोग परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव की विशिष्टता दर्शाने के लिए किया जाएगा। मुख्यतः, यह इन वचनों का प्रयोग होगा, जो मनुष्य को जीतते और उसे पूर्णत: कायल करते हैं। शब्द मनुष्यजाति को अन्तिम रूप से जीत लेने के साधन हैं, और वे सभी जो इस जीत लिए जाने को स्वीकार करते हैं, उन्हें इन वचनों के प्रहार और न्याय को भी स्वीकार करना आवश्यक है। बोलने की वर्तमान प्रक्रिया, जीतने की प्रक्रिया है। लोगों को किस प्रकार उपयुक्त सहयोग देना चाहिए? इन वचनों को प्रभावशाली रीति से खाने और पीने से और उन्हें समझने के द्वारा। लोगों को उन्हीं के द्वारा जीता नहीं जा सकता। उन्हें, इन वचनों को खाने और पीने के द्वारा, अपनी भ्रष्टता और अशुद्धता, अपने विद्रोहीपन और अधार्मिकता को जानना है, और परमेश्वर के समक्ष दण्डवत हो जाना है। यदि तुम परमेश्वर की इच्छा को समझ सकते हो और इसे अभ्यास में ला सकते हो, और आगे, दर्शन प्राप्त कर सकते हो, और यदि तुम इन वचनों का पूरी तरह से पालन कर सकते और अपनी ओर से कोई चुनाव नहीं करते हो, तब तुम्हें जीत लिया जाएगा। और ये वह शब्द होंगे, जिन्होंने तुम्हें जीता है। मनुष्यजाति ने वह साक्ष्य क्यों खो दिया? क्योंकि कोई भी अब परमेश्वर पर विश्वास नहीं करता और परमेश्वर को अपने हृदय में कदापि नही रखता। मनुष्यजाति को जीतने का अर्थ लोगों में इस विश्वास को पुनर्स्थापित करना है। लोगों का ध्यान सर्वदा संसार, अनेक आशाएँ रखने, अपने भविष्य के लिए बहुत अधिक चाहने और अनेक अनावश्यक मांग करने की ओर रहता है। वे सर्वदा अपने शरीर के विषय में सोचते और योजना बनाते रहते हैं और कभी परमेश्वर में विश्वास करने के मार्ग की खोज में रुचि नहीं रखते हैं। उनके हृदयों को शैतान के द्वारा कब्ज़े में कर लिया गया है, उन्होंने परमेश्वर के लिए अपने सम्मान को खो दिया है, और वे अपना हृदय शैतान को समर्पित कर रहे हैं। परन्तु मनुष्य की सृष्टि परमेश्वर के द्वारा की गई थी। मनुष्य परमेश्वर के साक्ष्य को खो चुका है, अर्थात वह परमेश्वर के प्रताप को खो चुका है। मनुष्य को जीतने का उद्देश्य परमेश्वर के लिए मनुष्य के सम्मान के प्रताप को पुनः प्राप्त करना है।

16 सित॰ 2018

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक

आज, जैसे तुम लोग परमेश्वर को जानने और प्रेम करने की कोशिश करते हो, एक प्रकार से तुम लोगों को कठिनाई और परिष्करण से होकर जाना होगा और दूसरे में, तुम लोगों को एक मूल्य चुकाना होगा। परमेश्वर को प्रेम करने के सबक से ज्यादा कुछ भी गहरा सबक नहीं है और ऐसा कहा जा सकता है कि सबक जो मनुष्य जीवन भर विश्वास करने से सीखते हैं वह परमेश्वर को किस प्रकार से प्रेम करना होता है। अर्थात् यदि तू परमेश्वर पर विश्वास करता है तो तुझे उसे प्रेम करना होगा। यदि तू केवल परमेश्वर पर विश्वास करता है परन्तु उससे प्रेम नहीं करता है, परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त नहीं किया है, और कभी भी परमेश्वर को अपने हृदय से निकलने वाले सच्चे प्रेम से प्रेम नहीं किया है, तो परमेश्वर पर तेरा विश्वास करना व्यर्थ है; यदि परमेश्वर पर अपने विश्वास में, तू परमेश्वर से प्रेम नहीं करता है, तो तू व्यर्थ में ही जी रहा है, और तेरा सम्पूर्ण जीवन सभी जीवन से सबसे निम्न स्तर पर है। यदि, तूने अपने सम्पूर्ण जीवन भर में कभी भी परमेश्वर को प्रेम नहीं किया या संतुष्ट नहीं किया, तो तेरे जीने का क्या अर्थ रहा? और परमेश्वर पर तेरे विश्वास करने का क्या अर्थ हुआ?

10 सित॰ 2018

परीक्षण माँग करते हैं आस्था की

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • परीक्षण माँग करते हैं आस्था की

  •  
  • I
  • इम्तहानों के वक्त कमज़ोर हो सकता है इन्सान,
  • आ सकते हैं मन में उसके गलत ख़्याल।
  • परमेश्वर की इच्छा को लेकर हो सकता है स्पष्टता का अभाव उसमें,
  • या कौन-सा मार्ग बेहतरीन है अमल वो जिस पर करे।

4 सित॰ 2018

परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो

परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो


परमेश्वर द्वारा इस युग में बोले गये वचन, व्यवस्था के युग के दौरान बोले गए वचनों से भिन्न हैं, और इसलिए, वे अनुग्रह के युग के दौरान बोले गये वचनों से भी भिन्न हैं। अनुग्रह के युग में, परमेश्वर ने वचन का कार्य नहीं किया, किन्तु समस्त मानवजाति को छुटकारा दिलाने के लिए केवल सलीब पर चढ़ने का वर्णन किया। बाइबिल में केवल यह वर्णन किया गया है कि यीशु को क्यों सलीब पर चढ़ाया जाना था, और सलीब पर उसने कौन-कौन सी तकलीफें सही, और कैसे मनुष्य को परमेश्वर के लिये सलीब पर चढ़ना जाना चाहिए। उस युग के दौरान, परमेश्वर द्वारा किया गया समस्त कार्य सलीब पर चढ़ने के आस-पास केंद्रित था। राज्य के युग के दौरान, देहधारी परमेश्वर ने उन सभी लोगों को जीतने के लिए वचन बोले जिन्होंने उस पर विश्वास किया। यह "वचन का देह में प्रकट होना" है; परमेश्वर इस कार्य को करने के लिए अंत के दिनों में आया है, जिसका अर्थ है कि वह वचन का देह में प्रकट होना के वास्तविक महत्व को कार्यान्वित करने के लिए आया।

15 अग॰ 2018

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "पृथ्वी पर सहस्राब्दि राज्य का आगमन ही पृथ्वी पर परमेश्वर के वचनों का आगमन है। नए यरूशलेम का स्वर्ग से अवरोहण मनुष्य के बीच में रहने, मनुष्य की प्रत्येक क्रिया और उसके अंतरतम विचारों में साथ देने के लिए, परमेश्वर के वचन का आगमन है। यह भी एक सत्य है जिसे, और सहस्राब्दि राज्य के अद्भुत दृश्य को परमेश्वर पूर्ण करेगा। यह परमेश्वर के द्वारा निर्धारित योजना हैः उसके शब्द एक हज़ार वर्षों तक पृथ्वी पर प्रकट होंगे और वे उसके सभी कर्मों को व्यक्त करेंगे और पृथ्वी पर उसके समस्त कार्य को पूर्ण करेंगे, जिसके बाद मानवजाति के इस चरण का अंत हो जाएगा।"

30 जून 2018

मसीह के कथन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (भाग चार के क्रम में)

मसीह के कथन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (भाग चार के क्रम में)

इस वीडियो में परमेश्वर के वचन "वचन देह में प्रकट हुआ से आगे जारी" पुस्तक से हैं। इस वीडियो की सामग्री: परमेश्वर की मनोवृत्ति को समझना और परमेश्वर के विषय में सभी गलत अवधारणाओं को छोड़ देना मनुष्य के परिणाम को कौन निर्धारित करता है लोग अनुभव के आधार पर परमेश्वर को परिभाषित करने के लिए प्रवृत्त होते हैं ऐसे लोगों के प्रति परमेश्वर की मनोवृत्ति जो उसके कार्य के दौरान भाग जाते हैं

28 जून 2018

New Hindi Christian Song 2018 | सत्य जीवन का सबसे ऊंचा सूत्र है

         New Hindi Christian Song 2018 | सत्य जीवन का सबसे ऊंचा सूत्र है

"सत्य" जीवन के सब सूत्रों में सबसे सच्चा है, और मानवता में सबसे ऊंचा है। जीवन का वह सूत्र है क्योंकि वो है, वो है जो परमेश्वर इंसान से चाहता और वह काम जो उसने खुद किया है, परमेश्वर इंसान से चाहता और वह काम जो उसने खुद किया है। यह किन्हीं बातों से बनाई उक्ति नहीं है, ना कहावत किसी महत की, महत की।

27 जून 2018

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए"


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "बीते समयों में, अनेक लोग मनुष्य की महत्वाकांक्षा और धारणाओं के साथ मनुष्य की आशाओं के लिए आगे बढ़े। अब इन मामलों पर चर्चा नहीं की जाएगी। कुंजी है अभ्यास का ऐसा ढंग खोजना जो तुम में से हर एक को परमेश्वर के सम्मुख एक सामान्य स्थिति बनाये रखने और धीरे-धीरे शैतान के प्रभाव की बेड़ियों को तोड़ डालने में सक्षम करे, ताकि तुम परमेश्वर को प्राप्त हो सको और पृथ्वी पर वैसे जियो जैसे परमेश्वर तुमसे चाहता है।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...