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1 नव॰ 2018

स्वभाव में बदलाव वास्तविक जीवन से अलग नहीं हो सकता

परमेश्वर के वचनों का एक भजन

स्वभाव में बदलाव वास्तविक जीवन से अलग नहीं हो सकता 

परमेश्वर में विश्वास करने में,
यदि मानव बदलाव लाना चाहता है,
तो उसे अपने वास्तविक जीवन से
खुद को वियुक्त नहीं करना चाहिए।

14 अक्टू॰ 2018

हम पूरे मन से पालन करेंगे

  • आराधना गीत
  • हम पूरे मन से पालन करेंगे

  •  
  • I
  • हम ऐसी अंधेरी दुनिया में रहते थे जहां शैतान यातना देता था हमें।
  • अब हम रहते हैं कलीसिया में,
  • उस ख़ुशी में जिसे बयां करना मुमकिन नहीं।
  • हम परमेश्वर को प्रेम करने का फ़र्ज़ निभाते हैं,
  • और सच पर अमल करते हैं, कि वो ख़ुश हो।
  • हम एक दिल हो, एक-दूजे को चाहते हैं,
  • और चलते हैं उस राह पर, जो परमेश्वर दिखाता है।
  • हे परमेश्वर तुझे पता है हम क्या चाहते हैं,
  • हम बेचारे हैं, अंधे हैं, और अधम हैं।
  • हे परमेश्वर राह दिखा और हमारा दिल संभाल,
  • हम तेरे कर्मों के गवाह होंगे।
  • हे परमेश्वर तुझे पता है हम क्या चाहते हैं,
  • हम बेचारे हैं, अंधे हैं, और अधम हैं।
  • हे परमेश्वर राह दिखा और हमारा दिल संभाल,
  • हम पूरे मन से पालन करेंगे, पालन करेंगे।

12 अक्टू॰ 2018

मेरा घर कहां है

  • आराधना गीत
  • मेरा घर कहां है

  •  
  • I
  • अपने नन्हें काग़ज़ पर रंगों से,
  • नन्हा-सा घर बनाती हूं मैं,
  • प्यारी मम्मी घर में है, प्यारे पापा भी घर पर हैं।
  • अपनी प्यारी बहना के संग खेलूं मैं,
  • खिली-खिली धूप में,
  • हम सब तपन से भर जाते हैं।
  • मम्मी भी ख़ुश है, पापा भी ख़ुश हैं,
  • हम दोनों बहनें भी ख़ुश हैं,
  • बस ख़ुशियां ही ख़ुशियां हैं।
  • काग़ज़ पर रंगों में सिमटा, ये मेरा परिवार है।
  • ये मेरे मीठे सपनों का, प्यारा-सा संसार है।
  • II
  • अपना नन्हा बैग उठाकर,
  • चल दी मैं अनजान नगर,
  • पापा घर के अंदर हैं, पर मम्मी बाहर।
  • मैं और मेरा नन्हा बैग जाते उस घर,
  • कभी जो जाना-पहचाना था।
  • मम्मी घर के अंदर है, पर पापा बाहर।
  • अपना नन्हा बैग उठाकर, भटक रही हूं राहों में,
  • जाना कहां, समझ नहीं पाती, भटक रही हूं राहों में।
  • मेरा नन्हा बैग ही बस मेरा इकलौता साथी है,
  • बस ये ही मेरा घर है जिसको, छोड़ नहीं पाती हूं मैं।

9 अक्टू॰ 2018

जीवन एक नये इंसान का

  • आराधना गीत
  • जीवन एक नये इंसान का
  •  

  • I
  • चमकते चांद के मानिंद हैं वचन खुदा के,
  • जो मेरे मन को, मेरी नज़र को निर्मल करें।
  • करते रोशन और प्रबुद्ध मुझे,
  • नव-जागृत होता हृदय मेरा।
  • मिटकर अज्ञात खुदावंद की छवि,
  • दर्शन होते मुझे व्यवहारिक खुदावंद के।
  • प्रवेश करता हूँ राज्य की तालीम में मैं,
  • जहाँ आरंभ करता हूँ नया जीवन मैं।
  • देहधारण कर, मानव को पूर्ण करते खुदा,
  • और बेहद दुर्लभ है ये अवसर।
  • समर्पित करता हूँ मैं हृदय अपना खुदा को,
  • स्वीकारता हूँ मैं छानबीन खुदा की।
  • सच्चे हृदय से भय मानता हूँ मैं खुदा का
  • और अपनी इच्छा पर काम नहीं करता मैं।
  • होता है सबकुछ सत्य के सिद्धांत पर,
  • सेवा खुदा की सच्चाई से करता हूँ मैं।

7 अक्टू॰ 2018

पूरे सफ़र में साथ तुम्हारे

श्रद्धा,जीवन,प्रकाश,स्वतंत्रता,

  • आराधना गीत
  • पूरे सफ़र में साथ तुम्हारे

  •  
  • I
  • खोया-खोया-सा अंदर से बेसहारा महसूस करता हुआ,
  • घूमता हूँ, भटकता हूँ जगत में मैं।
  • तुम्हारे कोमल वचनों से जागकर,
  • देखता हूँ उभरती रोशनी मैं।
  • तुम्हारे वचनों का न्याय मुझे स्वीकार है।
  • देखता हूँ भीतर तक दूषित हूँ मैं।
  • अपने बर्ताव पर विचार करते हुए,
  • वही स्वभाव अपने भीतर पाता हूँ मैं।

25 सित॰ 2018

मेरे दिल में हो तुम

  • आराधना गीत
  • मेरे दिल में हो तुम

  •  
  • I
  • घर से दूर जब निभाता हूँ फर्ज़ अपना मैं,
  • तो आता है ख़्याल तुम्हारा, करता हूँ प्रार्थना तुमसे मैं।
  • पढ़कर वचन तुम्हारे,
  • यकीन तुम पर बढ़ा है मेरा, और सुकून मिला है दिल को मेरे।
  • गवाही देने की ख़ातिर तुम्हारी, दर्द बहुत सहता हूँ मैं,
  • कितने प्यारे हो तुम, और बेहतर ढंग से जान पाया हूँ मैं।
  • अनुसरण करके तुम्हारा, अंत तक चलता रहूँगा मैं।
  • जब बदलोगे रूप अपना तुम,
  • तुम्हारी वापसी की अगवानी करेंगे हम,
  • तुम्हारी वापसी की अगवानी करेंगे हम।

18 सित॰ 2018

परमेश्वर के साथ सामान्य रिश्ता कैसे स्थापित करें

  • परमेश्वर के साथ सामान्य रिश्ता कैसे स्थापित करें

  •  
  • I
  • परमेश्वर से सामान्य रिश्ते की
  • शुरुआत होती है परमेश्वर के सामने अपना दिल करके शांत।
  • अगर तुम्हें समझ न आए परमेश्वर की इच्छा,
  • तो भी पूरे करो उसके प्रति अपने कर्तव्य।
  • परमेश्वर की इच्छा प्रकट होने और अभ्यास में लाने के लिए
  • इंतज़ार करने में बहुत देर नहीं हुई।
  • जब परमेश्वर से तुम्हारा रिश्ता होगा सही,
  • तो अपने आस-पास के लोगों के साथ भी रिश्ता होगा सही।
  • परमेश्वर से सामान्य रिश्ता होता है संदेह से मुक्त,
  • परमेश्वर के कार्य का करता है पालन।
  • सही इरादों के साथ आओ सिंहासन के सामने,
  • ख़ुद को रख दो अलग।
  • परमेश्वर की खोज करो स्वीकार, परमेश्वर के सामने हो समर्पित,
  • उसके परिवार के हितों को रखो आगे।

17 सित॰ 2018

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो


मनुष्य के भीतर परमेश्वर के द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कार्य के चरण में, बाहर से यह लोगों के मध्य परस्पर क्रिया के समान प्रतीत होता है, जैसे कि यह मानव प्रबंधों के द्वारा उत्पन्न हुआ हो, या मानविक हस्तक्षेप के माध्यम से। परन्तु पर्दे के पीछे, कार्य का प्रत्येक चरण, और घटित होने वाला सब कुछ, शैतान के द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई बाज़ी होती है और परमेश्वर के लिए एक दृढ़ गवाह बने रहने के लिए लोगों से अपेक्षा की जाती है। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब की परीक्षा ली जा रही थी: पर्दे के पीछे, शैतान परमेश्वर के सामने शर्त लगा रहा था, और अय्यूब के साथ जो हुआ वह मनुष्यों के कार्य थे, और मनुष्यों का हस्तक्षेप था। हर कदम के पीछे जो परमेश्वर ने शैतान के साथ बाज़ी में परमेश्वर ने तेरे लिए उठाए—उन सभी के पीछे एक युद्ध था। उदाहरण के लिए, यदि तू अपने भाइयों और बहनों के प्रति पक्षपातपूर्ण भावना रखता है, तो तेरे पास वे शब्द होंगे जो तू कहना चाहता है—वे शब्द जो परमेश्वर को अप्रसन्न करने वाले हो सकते हैं—परन्तु यह तेरे लिए भीतरी तौर पर कठिन होगा, और इस क्षण में, तेरे भीतर एक युद्ध आरंभ होगा: क्या मैं बोलूँ या नहीं? यही एक युद्ध है। इस प्रकार से, सभी बातों में एक युद्ध होता है, और जब तेरे भीतर एक युद्ध चल रहा हो, तो भला हो तेरे वास्तविक सहयोग और पीड़ा का, परमेश्वर तेरे भीतर कार्य करता है। अंत में, अंदर तू मामले को एक तरफ रख पाता है और क्रोध स्वाभाविक रूप से समाप्त हो जाता है। परमेश्वर के साथ तेरे सहयोग का यही प्रभाव होता है। हर एक चीज़ जो तू करता है उसके प्रयासों के लिए तुझे एक कीमत चुकानी होती है। बिना वास्तविक कठिनाई के, तू परमेश्वर को संतुष्ट नहीं कर सकता है, यह परमेश्वर को संतुष्ट करने के कुछ करीब तक भी नहीं पहुंचता है, और तुम केवल खोखले नारे लगा रहे हो! क्या ये खोखली बातें परमेश्वर को संतुष्ट कर सकती है?

16 सित॰ 2018

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक

आज, जैसे तुम लोग परमेश्वर को जानने और प्रेम करने की कोशिश करते हो, एक प्रकार से तुम लोगों को कठिनाई और परिष्करण से होकर जाना होगा और दूसरे में, तुम लोगों को एक मूल्य चुकाना होगा। परमेश्वर को प्रेम करने के सबक से ज्यादा कुछ भी गहरा सबक नहीं है और ऐसा कहा जा सकता है कि सबक जो मनुष्य जीवन भर विश्वास करने से सीखते हैं वह परमेश्वर को किस प्रकार से प्रेम करना होता है। अर्थात् यदि तू परमेश्वर पर विश्वास करता है तो तुझे उसे प्रेम करना होगा। यदि तू केवल परमेश्वर पर विश्वास करता है परन्तु उससे प्रेम नहीं करता है, परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त नहीं किया है, और कभी भी परमेश्वर को अपने हृदय से निकलने वाले सच्चे प्रेम से प्रेम नहीं किया है, तो परमेश्वर पर तेरा विश्वास करना व्यर्थ है; यदि परमेश्वर पर अपने विश्वास में, तू परमेश्वर से प्रेम नहीं करता है, तो तू व्यर्थ में ही जी रहा है, और तेरा सम्पूर्ण जीवन सभी जीवन से सबसे निम्न स्तर पर है। यदि, तूने अपने सम्पूर्ण जीवन भर में कभी भी परमेश्वर को प्रेम नहीं किया या संतुष्ट नहीं किया, तो तेरे जीने का क्या अर्थ रहा? और परमेश्वर पर तेरे विश्वास करने का क्या अर्थ हुआ?

7 सित॰ 2018

पतरस के पथ पर कैसे चलें

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • पतरस के पथ पर कैसे चलें
  •  
  • I
  • पतरस की राह पर चलना, है सत्य की राह पर चलना।
  • सच में ख़ुद को जान पाने की, सच में अपने स्वभाव को बदल पाने की
  • है राह यह, है राह यह।
  • सिर्फ़ पतरस की राह ले जाती है परमेश्वर की पूर्णता की ओर।
  • जानो इस राह को लेना और अभ्यास में लाना।
  • सबसे पहले छोड़ दो अपने इरादे, परिवार,
  • छोड़ दो अनुचित चाह, अपनी देह की चीज़ें।
  • परमेश्वर के वचन के प्रति हो जाओ पूरी तरह समर्पित,
  • खाओ और पीओ उसके वचन, ढो उसकी इच्छा और सच्चाई।
  • हां, यह अभ्यास है सबसे बुनियादी और ज़रूरी।
  • यीशु को देखने के बाद यही किया पतरस ने।
  • इस तरह अभ्यास देता है सबसे अच्छे नतीजे।

1 सित॰ 2018

इंसान का सच्चा जीवन

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • इंसान का सच्चा जीवन
  •  
  • I
  • जब इंसान पाता है धरती पर सच्चा जीवन,
  • शैतान की सभी शक्तियां जाती हैं बंध।
  • इंसान जिएगा पृथ्वी पर आराम से।
  • उलझनें हो जाएंगी ग़ायब।

28 अग॰ 2018

सत्य को जितना अधिक अमल में लाओगे उतनी तेज़ी से प्रगति करोगे

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • सत्य को जितना अधिक अमल में लाओगे उतनी तेज़ी से प्रगति करोगे
  •  
  • I
  • जिस सत्य की ज़रूरत है इंसान को, वो मिलता है परमेश्वर के वचन में।
  • सत्य जो लाभकारी है, सहायक है, इंसान के लिये सबसे ज़्यादा।
  • तुम्हारे तन को ज़रूरत जिसकी ऐसा पोषक-तत्व है सत्य,
  • सत्य जो समाहित हो इंसान में।
  • उसे मिलती है मदद इससे, सामान्य इंसानियत फिर से पाने में।
  • अमल करोगे जितना ज़्यादा परमेश्वर के वचन पर,
  • उतनी तेज़ी से खिलेगा जीवन तुम्हारा।
  • परमेश्वर के वचन पर, अमल करोगे जितना ज़्यादा
  • सत्य साफ़ होगा उतना ज़्यादा।

24 जून 2018

New Hindi Christian Song 2018 | इंसान को परमेश्वर के वचनों के अनुसार चलना चाहिये

New Hindi Christian Song 2018 | इंसान को परमेश्वर के वचनों के अनुसार चलना चाहिये

इंसान को परमेश्वर के वचनों के अनुसार चलना चाहिये। हर युग में, जब परमेश्वर अपना काम करता है, तो इंसान को कुछ वचन प्रदान करता है। कुछ सच्चाई व्यक्त करता है। कुछ सच्चाई व्यक्त करता है। ये वो सच्चाई है जिस पर इंसान को चलना चाहिये, ये वो राह है जिस पर इंसान को चलना चाहिये। ये वो राह है जिस पर चलकर इंसान, परमेश्वर का भय माने, और बुराई से दूर रहे, ज़िंदगी के सफ़र में इंसान जिस पर अमल करे।

3 मार्च 2018

Come Meet God | Hindi Best Christian Music Video | "हमारा जीवन व्यर्थ में नहीं है" (A Cappella)


 Come Meet God | Hindi Best Christian Music Video | "हमारा जीवन व्यर्थ में नहीं है" (A Cappella)


हो.. ये जीवन व्यर्थ नहीं। हो.. ये जीवन व्यर्थ नहीं। 

मिलें हम परमेश्वर से, अनुभव करें उसके कार्य।
हमने देहधारी परमेश्वर को जाना है।
हमने देखे उसके कार्य, भव्य और चमत्कारिक।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...