7 अक्टू॰ 2018

पूरे सफ़र में साथ तुम्हारे

श्रद्धा,जीवन,प्रकाश,स्वतंत्रता,

  • आराधना गीत
  • पूरे सफ़र में साथ तुम्हारे

  •  
  • I
  • खोया-खोया-सा अंदर से बेसहारा महसूस करता हुआ,
  • घूमता हूँ, भटकता हूँ जगत में मैं।
  • तुम्हारे कोमल वचनों से जागकर,
  • देखता हूँ उभरती रोशनी मैं।
  • तुम्हारे वचनों का न्याय मुझे स्वीकार है।
  • देखता हूँ भीतर तक दूषित हूँ मैं।
  • अपने बर्ताव पर विचार करते हुए,
  • वही स्वभाव अपने भीतर पाता हूँ मैं।
  • न शैतान के चोट पहुँचाने का भय है,
  • न सूनेपन का जो रात लाती है,
  • जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
  • न ख़तरों से रूबरू होने का डर है,
  • न सफ़र की मुश्किलों का, जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
  • मुसीबतों की खुरदुरी राहों के बाद,
  • एक ख़ूबसूरत कल का स्वागत करता हूँ मैं,
  • करता हूँ मैं, करता हूँ मैं।
  • II
  • अपने भीतर होता है मलाल मुझे,
  • एहसानमन्द हूँ कि बचा लिया गया हूँ मैं।
  • महान करुणा जो दिखाई तुमने,
  • अपनी राह बना पाता हूँ मैं।
  • जब दूर होता हूँ तो वचन तुम्हारे पुकारते हैं मुझे।
  • तुम बचाते हो मुझे अनिष्ट से, महफ़ूज़ हूँ मैं।
  • मैं विद्रोह करता हूँ, तब छुप जाते हो तुम।
  • तब फिर असीम वेदना में चला जाता हूँ मैं।
  • तुम दया दिखाते हो, मुस्कराते हो,
  • नज़दीक लाते हो, जब लौटता हूँ मैं।
  • जब शैतान ज़ख़्म देता है, कोड़े बरसाता है,
  • स्नेह तुम्हारा घाव भरता, दिलासा देता है मुझे।
  • मेरे दुख-दर्द को करते हो साझा,
  • शैतान की गिरफ़्त में जब आता हूँ मैं।
  • फिर सुबह होगी, आसमाँ फिर से नीला होगा,
  • है विश्वास मुझे, है विश्वास मुझे, है विश्वास मुझे।
  • न शैतान के चोट पहुँचाने का भय है,
  • न सूनेपन का जो रात लाती है,
  • जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
  • न ख़तरों से रूबरू होने का डर है,
  • न सफ़र की मुश्किलों का, जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
  • मुसीबतों की खुरदुरी राहों के बाद,
  • एक ख़ूबसूरत कल का स्वागत करता हूँ मैं, करता हूँ मैं।
  • III
  • तुम्हारे वचन मेरा जीवन हैं मेरे प्रभु।
  • तुम्हारे वचनों का आनंद लेता हूँ हर दिन।
  • घेर लेता है जब शैतान मुझे,
  • तुम्हारे वचन देते हैं शक्ति और विवेक मुझे।
  • जब यातना सहता हूँ, नाकाम होता हूँ,
  • तो मुश्किल वक्त में तुम्हारे वचन राह दिखाते हैं मुझे।
  • जब होता हूँ मैं उदास या कमज़ोर,
  • वचन तुम्हारे देते हैं सहारा और आपूर्ति मुझे।
  • IV
  • होता है जब इम्तहान मेरा, तो गवाही देने की ख़ातिर,
  • राह दिखाते हैं मुझे वचन तुम्हारे।
  • साथ रहता हूँ, बातें करता हूँ तुम से,
  • कोई दूरी नहीं है बीच हमारे।
  • न शैतान के चोट पहुँचाने का भय है,
  • न सूनेपन का जो रात लाती है,
  • जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
  • न ख़तरों से रूबरू होने का डर है,
  • न सफ़र की मुश्किलों का, जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
  • मुसीबतों की खुरदुरी राहों के बाद,
  • एक ख़ूबसूरत कल का स्वागत करता हूँ मैं, साथ तुम्हारे,
  • करता हूँ मैं, साथ तुम्हारे, करता हूँ मैं।
  •  
  • "मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से
  • अनुशंसित: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-अंतिम दिनों के मसीह

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XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...