- आराधना गीत
- पूरे सफ़र में साथ तुम्हारे
- I
- खोया-खोया-सा अंदर से बेसहारा महसूस करता हुआ,
- घूमता हूँ, भटकता हूँ जगत में मैं।
- तुम्हारे कोमल वचनों से जागकर,
- देखता हूँ उभरती रोशनी मैं।
- तुम्हारे वचनों का न्याय मुझे स्वीकार है।
- देखता हूँ भीतर तक दूषित हूँ मैं।
- अपने बर्ताव पर विचार करते हुए,
- वही स्वभाव अपने भीतर पाता हूँ मैं।
- न शैतान के चोट पहुँचाने का भय है,
- न सूनेपन का जो रात लाती है,
- जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
- न ख़तरों से रूबरू होने का डर है,
- न सफ़र की मुश्किलों का, जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
- मुसीबतों की खुरदुरी राहों के बाद,
- एक ख़ूबसूरत कल का स्वागत करता हूँ मैं,
- करता हूँ मैं, करता हूँ मैं।
- II
- अपने भीतर होता है मलाल मुझे,
- एहसानमन्द हूँ कि बचा लिया गया हूँ मैं।
- महान करुणा जो दिखाई तुमने,
- अपनी राह बना पाता हूँ मैं।
- जब दूर होता हूँ तो वचन तुम्हारे पुकारते हैं मुझे।
- तुम बचाते हो मुझे अनिष्ट से, महफ़ूज़ हूँ मैं।
- मैं विद्रोह करता हूँ, तब छुप जाते हो तुम।
- तब फिर असीम वेदना में चला जाता हूँ मैं।
- तुम दया दिखाते हो, मुस्कराते हो,
- नज़दीक लाते हो, जब लौटता हूँ मैं।
- जब शैतान ज़ख़्म देता है, कोड़े बरसाता है,
- स्नेह तुम्हारा घाव भरता, दिलासा देता है मुझे।
- मेरे दुख-दर्द को करते हो साझा,
- शैतान की गिरफ़्त में जब आता हूँ मैं।
- फिर सुबह होगी, आसमाँ फिर से नीला होगा,
- है विश्वास मुझे, है विश्वास मुझे, है विश्वास मुझे।
- न शैतान के चोट पहुँचाने का भय है,
- न सूनेपन का जो रात लाती है,
- जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
- न ख़तरों से रूबरू होने का डर है,
- न सफ़र की मुश्किलों का, जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
- मुसीबतों की खुरदुरी राहों के बाद,
- एक ख़ूबसूरत कल का स्वागत करता हूँ मैं, करता हूँ मैं।
- III
- तुम्हारे वचन मेरा जीवन हैं मेरे प्रभु।
- तुम्हारे वचनों का आनंद लेता हूँ हर दिन।
- घेर लेता है जब शैतान मुझे,
- तुम्हारे वचन देते हैं शक्ति और विवेक मुझे।
- जब यातना सहता हूँ, नाकाम होता हूँ,
- तो मुश्किल वक्त में तुम्हारे वचन राह दिखाते हैं मुझे।
- जब होता हूँ मैं उदास या कमज़ोर,
- वचन तुम्हारे देते हैं सहारा और आपूर्ति मुझे।
- IV
- होता है जब इम्तहान मेरा, तो गवाही देने की ख़ातिर,
- राह दिखाते हैं मुझे वचन तुम्हारे।
- साथ रहता हूँ, बातें करता हूँ तुम से,
- कोई दूरी नहीं है बीच हमारे।
- न शैतान के चोट पहुँचाने का भय है,
- न सूनेपन का जो रात लाती है,
- जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
- न ख़तरों से रूबरू होने का डर है,
- न सफ़र की मुश्किलों का, जब तुम्हारे साथ होता हूँ मैं।
- मुसीबतों की खुरदुरी राहों के बाद,
- एक ख़ूबसूरत कल का स्वागत करता हूँ मैं, साथ तुम्हारे,
- करता हूँ मैं, साथ तुम्हारे, करता हूँ मैं।
- "मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से
- अनुशंसित: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-अंतिम दिनों के मसीह

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