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29 अक्टू॰ 2018

ओ मेरे प्रिय, मैं तलाश में हूं तुम्हारी




  • ओ मेरे प्रिय, मैं तलाश में हूं तुम्हारी 

  • I
  • तुम कहाँ हो, मेरे प्रिय?
  • क्या तुम्हें मालूम है मुझे आती है तुम्हारी कितनी याद?
  • बिना रोशनी, दर्द से भरे और मुश्किल हैं दिन।
  • अंधेरे में, मुझे तलाश है तुम्हारी।
  • मुझे निराशा नहीं है, आशा बनी रहती है मेरी,
  • और ज़्यादा दृढ़ता से तलाश करती हूं मैं तुम्हें।
  • तुम्हारे फिर से प्रकट होने का है मुझे इंतज़ार,
  • जब तुम्हारा चेहरा देख पाएंगी मेरी आंखें।

23 अक्टू॰ 2018

परमेश्वर लाया है इंसान को नए युग में


  • परमेश्वर लाया है इंसान को नए युग में

  •  
  • I
  • परमेश्वर का कार्य राह दिखाता है पूरी कायनात को,
  • चमकती है सीधे बिजली पूरब से पश्चिम को।
  • फैलाता है अन्य देशों में अपना कार्य परमेश्वर।
  • चमकती है उसकी महिमा पूरी कायनात पर।
  • उसकी इच्छा, समाहित है फैले लोगों में,
  • सब कर रहे हैं नियत कामों को, उसके हाथ के इशारों पर।
  • प्रवेश किया है उसने अब एक नए युग में,
  • ला रहा है इंसानों को दूसरे युग में।

14 अक्टू॰ 2018

हम पूरे मन से पालन करेंगे

  • आराधना गीत
  • हम पूरे मन से पालन करेंगे

  •  
  • I
  • हम ऐसी अंधेरी दुनिया में रहते थे जहां शैतान यातना देता था हमें।
  • अब हम रहते हैं कलीसिया में,
  • उस ख़ुशी में जिसे बयां करना मुमकिन नहीं।
  • हम परमेश्वर को प्रेम करने का फ़र्ज़ निभाते हैं,
  • और सच पर अमल करते हैं, कि वो ख़ुश हो।
  • हम एक दिल हो, एक-दूजे को चाहते हैं,
  • और चलते हैं उस राह पर, जो परमेश्वर दिखाता है।
  • हे परमेश्वर तुझे पता है हम क्या चाहते हैं,
  • हम बेचारे हैं, अंधे हैं, और अधम हैं।
  • हे परमेश्वर राह दिखा और हमारा दिल संभाल,
  • हम तेरे कर्मों के गवाह होंगे।
  • हे परमेश्वर तुझे पता है हम क्या चाहते हैं,
  • हम बेचारे हैं, अंधे हैं, और अधम हैं।
  • हे परमेश्वर राह दिखा और हमारा दिल संभाल,
  • हम पूरे मन से पालन करेंगे, पालन करेंगे।

13 अक्टू॰ 2018

इरादा पक्का है परमेश्वर के अनुसरण का

  • आराधना गीत

  •  
  • I
  • परमेश्वर में आज तक आस्था रखकर,
  • आख़िर देख ली है रोशनी मैंने।
  • यातना और तकलीफ़ों की पथरीली राह पर चली हूँ मैं।
  • तज दिया संसार ने मुझको, दोस्त भी दूर-दूर रहते हैं।
  • न जाने कितनी रातें प्रार्थना में, जागकर गुज़ारी हैं मैंने।
  • ग़म और ख़ुशी के न जाने, कितने आँसू बहाए हैं मैंने।
  • दौड़ती रहती हूँ दिनभर, चैन कहीं न पाया मैंने।
  • आज़ादी महज़ नाम को है,
  • इंसान का हक न देखा मैंने।
  • शैतान से बेइंतिहा नफ़रत है मुझे,
  • मसीह आए, संभाले सत्ता, इंतज़ार है मुझे।
  • इंसानी ज़िंदगी की रोशनी तलाश करूँ मैं,
  • दुनिया की बुराई और अंधेरे, मजबूर कर रहे हैं मुझे।

11 अक्टू॰ 2018

तड़प

  • आराधना गीत
  • तड़प

  •  
  • I
  • हे प्रभु!
  • अंधेरी दुनिया है, हुकूमत है शैतान की।
  • लम्बी रात और लम्बी होती जा रही है।
  • सच्चे परमेश्वर में आस्था का पथ,
  • और जीवन का अनुसरण मुश्किल हो रहा है।
  • चीनी साम्यवादी दल तलाश में है हमारी,
  • ढाह रहा है ज़ुल्म परमेश्वर के लोगों पर।
  • गिरफ्तार कर रहे हैं, वो दे रहे हैं यातना हमें।
  • परिजन हमारे समझ पाते नहीं।
  • पड़ोसी करते बदनाम उड़ाते हँसी हमारी,
  • और दुनिया भी हमको ठुकराती।
  • सहता हूँ दुख-दर्द, पुकारता हूँ प्रभु को,
  • हे यीशु दो सामर्थ मुझे, दो सामर्थ मुझे।

9 अक्टू॰ 2018

जीवन एक नये इंसान का

  • आराधना गीत
  • जीवन एक नये इंसान का
  •  

  • I
  • चमकते चांद के मानिंद हैं वचन खुदा के,
  • जो मेरे मन को, मेरी नज़र को निर्मल करें।
  • करते रोशन और प्रबुद्ध मुझे,
  • नव-जागृत होता हृदय मेरा।
  • मिटकर अज्ञात खुदावंद की छवि,
  • दर्शन होते मुझे व्यवहारिक खुदावंद के।
  • प्रवेश करता हूँ राज्य की तालीम में मैं,
  • जहाँ आरंभ करता हूँ नया जीवन मैं।
  • देहधारण कर, मानव को पूर्ण करते खुदा,
  • और बेहद दुर्लभ है ये अवसर।
  • समर्पित करता हूँ मैं हृदय अपना खुदा को,
  • स्वीकारता हूँ मैं छानबीन खुदा की।
  • सच्चे हृदय से भय मानता हूँ मैं खुदा का
  • और अपनी इच्छा पर काम नहीं करता मैं।
  • होता है सबकुछ सत्य के सिद्धांत पर,
  • सेवा खुदा की सच्चाई से करता हूँ मैं।

7 अक्टू॰ 2018

पूरे सफ़र में साथ तुम्हारे

श्रद्धा,जीवन,प्रकाश,स्वतंत्रता,

  • आराधना गीत
  • पूरे सफ़र में साथ तुम्हारे

  •  
  • I
  • खोया-खोया-सा अंदर से बेसहारा महसूस करता हुआ,
  • घूमता हूँ, भटकता हूँ जगत में मैं।
  • तुम्हारे कोमल वचनों से जागकर,
  • देखता हूँ उभरती रोशनी मैं।
  • तुम्हारे वचनों का न्याय मुझे स्वीकार है।
  • देखता हूँ भीतर तक दूषित हूँ मैं।
  • अपने बर्ताव पर विचार करते हुए,
  • वही स्वभाव अपने भीतर पाता हूँ मैं।

28 सित॰ 2018

पतरस की छवि - विजय का ध्वज

  • आराधना गीत
  • पतरस की छवि - विजय का ध्वज

  •  
  • I
  • देह में प्रकट होने वाला वचन परमेश्वर स्वयं है।
  • वही है असली सच्चा परमेश्वर हमारी आंखों के सामने।
  • कई युगों पहले, अंत के दिनों में, उसने तय किया मेरा जन्म।
  • उसने जीता, बचाया, जीवन दिया मुझे।
  • परमेश्वर के साथ इस परम प्यार को मज़बूत करता हूं मैं,
  • अंत के दिनों में पतरस की छवि दिखाई देती है।
  • परमेश्वर की रचनात्मक शक्ति है असीमित,
  • अपनी छवि में नए लोग बनाए हैं उसने।
  • कुछ भी हो, व्यावहारिक परमेश्वर के पीछे चलने का संकल्प है मेरा।
  • जब तक जान नहीं लेता परमेश्वर को, मैं विश्राम न करूंगा।
  • उसके लिए पीड़ा सह न पाऊं अगर,
  • तो इंसान कहलाने के लायक नहीं मैं।

20 सित॰ 2018

क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो?

क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो?


हो सकता है कि परमेश्वर में तुम्हारे विश्वास की यात्रा एक या दो वर्ष पुरानी हो, और हो सकता है कि इन वर्षों से अधिक भी हो जिसमें तुमने कठिनाइयों को देखा हो; या शायद तुम कठिनाइयों में होकर ही न गए हो और इसके बजाय अत्यधिक अनुग्रह को प्राप्त किया हो। ऐसा भी हो सकता है कि तुमने न ही कठिनाइयों का और न ही अनुग्रह का अनुभव किया हो, परन्तु इसके बजाए बहुत ही साधारण सा जीवन व्यतीत किया हो। चाहे कुछ भी हो, फिर भी तुम परमेश्वर के एक अनुयायी हो, इसलिए आओ उसके पीछे चलने के बारे में बातचीत करें। हालांकि, मैं उन सभी को जो यह वचन पढ़ रहे हैं यह बताना चाहता हूं कि वे सभी जो परमेश्वर को स्वीकारते और उसका अनुसरण करते हैं, परमेश्वर का वचन उनके लिये है, परन्तु वृहत तौर पर सभी लोगों के लिए नहीं, इनमें वे भी हैं जो परमेश्वर का स्वीकार नहीं करते। यदि तुम यह विश्वास करते हो कि परमेश्वर भीड़ से बातचीत कर रहा है, संसार के सभी लोगों से, तो परमेश्वर के वचन का प्रभाव तुम्हारे जीवन पर कुछ भी नहीं पड़ेगा। इसलिए, तुम्हें इन सभी वचनों को अपने हृदय के समीप रखना है, और उनके प्रभाव से अपने आप को बाहर नहीं करना है। जो भी हो, आओ हमारे घरों में क्या होता है उस पर बातचीत करें।

9 सित॰ 2018

परमेश्वर के अधिकार को जानने का मार्ग

  • परमेश्वर के अधिकार को जानने का मार्ग

  •  
  • I
  • परमेश्वर के अधिकार के ज्ञान को,
  • उसकी सामर्थ्य को, पहचान को और सार को,
  • तुम हासिल कर नहीं सकते
  • अपनी कल्पनाओं से।
  • कल्पना न करो, के मायने ये नहीं कि तुम कुछ न करो,
  • या बस बैठकर तबाही का इंतज़ार करो।
  • इसके मायने हैं – तर्क से अनुमान ना लगाओ,
  • ना जानकारी या विज्ञान के ज़रिये अध्ययन करो।
  • परमेश्वर के वचनों को खा-पीकर,
  • अनुभव करो और उन वचनों की संगति करो,
  • परमेश्वर के अधिकार का तुम अनुभव करोगे, उसे सत्यापित करोगे,
  • और धीरे-धीरे उसकी समझ और ज्ञान को हासिल करोगे।

8 सित॰ 2018

सत्य के लिए तुम्हें सब कुछ त्याग देना चाहिए

  • सत्य के लिए तुम्हें सब कुछ त्याग देना चाहिए

  •  
  • I
  • सच्चाई के रास्ते पर मुश्किलों का सामना करना होगा तुम्हें।
  • देना होगा ख़ुद को पूरी तरह तुम्हें।
  • सहना होगा अपमान, गले लगानी होगी और पीड़ा।
  • हासिल करने के लिए ज़्यादा सच्चाई करना होगा ऐसा।
  • जो भी सुंदर है उसे पाने की कोशिश करनी होगी तुम्हें।
  • जो भी अच्छा है उसे पाने की कोशिश करनी होगी तुम्हें,
  • जीवन की सार्थक राह पाने की कोशिश करनी होगी तुम्हें।
  • सच्चाई के लिए सभी सुखों को त्याग दो, देह को त्याग दो।

7 सित॰ 2018

पतरस के पथ पर कैसे चलें

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • पतरस के पथ पर कैसे चलें
  •  
  • I
  • पतरस की राह पर चलना, है सत्य की राह पर चलना।
  • सच में ख़ुद को जान पाने की, सच में अपने स्वभाव को बदल पाने की
  • है राह यह, है राह यह।
  • सिर्फ़ पतरस की राह ले जाती है परमेश्वर की पूर्णता की ओर।
  • जानो इस राह को लेना और अभ्यास में लाना।
  • सबसे पहले छोड़ दो अपने इरादे, परिवार,
  • छोड़ दो अनुचित चाह, अपनी देह की चीज़ें।
  • परमेश्वर के वचन के प्रति हो जाओ पूरी तरह समर्पित,
  • खाओ और पीओ उसके वचन, ढो उसकी इच्छा और सच्चाई।
  • हां, यह अभ्यास है सबसे बुनियादी और ज़रूरी।
  • यीशु को देखने के बाद यही किया पतरस ने।
  • इस तरह अभ्यास देता है सबसे अच्छे नतीजे।

3 सित॰ 2018

सत्य का अनुसरण करते हैं जो, पसंद करता है उन्हें परमेश्वर

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • सत्य का अनुसरण करते हैं जो, पसंद करता है उन्हें परमेश्वर
  •  
  • I
  • परमेश्वर की इच्छा के मुताबिक सत्य का अनुसरण करते हो तुम अगर,
  • तुम्हारी दिशा सही है अगर, तो पथ से थोड़ा भटक भी जाओ अगर,
  • हो जाओ कमज़ोर या नाकाम अगर तो परमेश्वर उपेक्षा कर देगा उसकी,
  • बल्कि मदद के लिये होगा तुम्हारे साथ परमेश्वर।
  • किस तरह के इंसान को पसंद करता है परमेश्वर?
  • सत्य का अनुसरण करता है जो,
  • मज़बूत इरादे वाला है जो,
  • अज्ञानता में रहकर भी सच्चा है जो,
  • पसंद करता है उसे परमेश्वर।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...