- ओ मेरे प्रिय, मैं तलाश में हूं तुम्हारी
- ओ मेरे प्रिय, मैं तलाश में हूं तुम्हारी
- I
- तुम कहाँ हो, मेरे प्रिय?
- क्या तुम्हें मालूम है मुझे आती है तुम्हारी कितनी याद?
- बिना रोशनी, दर्द से भरे और मुश्किल हैं दिन।
- अंधेरे में, मुझे तलाश है तुम्हारी।
- मुझे निराशा नहीं है, आशा बनी रहती है मेरी,
- और ज़्यादा दृढ़ता से तलाश करती हूं मैं तुम्हें।
- तुम्हारे फिर से प्रकट होने का है मुझे इंतज़ार,
- जब तुम्हारा चेहरा देख पाएंगी मेरी आंखें।
