- आराधना गीत
- जीवन एक नये इंसान का
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- I
- चमकते चांद के मानिंद हैं वचन खुदा के,
- जो मेरे मन को, मेरी नज़र को निर्मल करें।
- करते रोशन और प्रबुद्ध मुझे,
- नव-जागृत होता हृदय मेरा।
- मिटकर अज्ञात खुदावंद की छवि,
- दर्शन होते मुझे व्यवहारिक खुदावंद के।
- प्रवेश करता हूँ राज्य की तालीम में मैं,
- जहाँ आरंभ करता हूँ नया जीवन मैं।
- देहधारण कर, मानव को पूर्ण करते खुदा,
- और बेहद दुर्लभ है ये अवसर।
- समर्पित करता हूँ मैं हृदय अपना खुदा को,
- स्वीकारता हूँ मैं छानबीन खुदा की।
- सच्चे हृदय से भय मानता हूँ मैं खुदा का
- और अपनी इच्छा पर काम नहीं करता मैं।
- होता है सबकुछ सत्य के सिद्धांत पर,
- सेवा खुदा की सच्चाई से करता हूँ मैं।