परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग चार
अय्यूब की अटल सत्यनिष्ठा ने शैतान को लज्जित किया और उसे भयातुर करके खदेड़ दिया
और परमेश्वर ने क्या किया जब अय्यूब को इस पीड़ा के अधीन किया गया था? परमेश्वर ने परिणाम का अवलोकन किया, और उसे देखा, और उसका इंतजार किया। जब परमेश्वर ने अवलोकन किया एवं देखा, तो उसने कैसा महसूस किया था? हाँ वास्तव में उसने गहरा शोक महसूस किया। परन्तु उसकी पीड़ा के परिणामस्वरूप, क्या वह शैतान को अय्यूब की परीक्षा लेने की अनुमति देने के लिए खेदित था? उसका उत्तर है, नहीं, वह खेदित नहीं था। क्योंकि वह दृढ़ता से विश्वास करता था कि अय्यूब खरा एवं सीधा था, यह कि वह परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था। परमेश्वर ने बस शैतान को अनुमति दी थी कि वह उसके सामने अय्यूब की धार्मिकता को परखे, और अपनी स्वयं की दुष्टता एवं घिनौनेपन को प्रकट करे। इसके अतिरिक्त, यह अय्यूब के लिए एक अवसर था कि वह अपनी धार्मिकता एवं परमेश्वर के प्रति अपने भय और बुराई से दूर रहने की गवाही को संसार के लोगों, शैतान, और यहाँ तक कि उन लोगों के सामने दे जो परमेश्वर का अनुसरण करते हैं। क्या अंतिम परिणाम ने यह साबित किया कि अय्यूब के विषय में परमेश्वर का आंकलन सही एवं त्रुटिहीन था। क्या अय्यूब ने वास्तव में शैतान पर विजय प्राप्त किया था? हम यहाँ पर आदर्श वचनों को पढ़ते हैं जिन्हें अय्यूब के द्वारा बोला गया था, ऐसे वचन जो इस बात का प्रमाण हैं कि उसने शैतान पर विजय पा लिया था। उसने कहा, "मैं अपनी माँ के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊँगा।" यह परमेश्वर के प्रति अय्यूब की आज्ञाकारिता की मनोवृत्ति है।