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7 नव॰ 2018

परमेश्वर के लिए तुम्हारा विश्वास हो सबसे ऊँचा


  • परमेश्वर के लिए तुम्हारा विश्वास हो सबसे ऊँचा

  •  
  • I
  • गर चाहते हो तुम करना यक़ीन,
  • गर पाना चाहते हो तुम परमेश्वर को और उसकी संतुष्टि,
  • गर तुम दर्द न सहो और मेहनत न करो,
  • तुम इन चीज़ों को प्राप्त नहीं कर सकोगे।
  • तुम सब ने सुने हैं बहुत प्रचार।
  • भले ही तुमने सुना है,
  • इसका ये अर्थ नहीं है कि वचन तुम्हारे हैं।
  • तुम्हें उनको आत्मसात और परिवर्तित करना चाहिए
  • ऐसी चीज़ में जो तुम से संबन्धित हो।
  • तुम केवल परमेश्वर में विश्वास से प्राप्त करोगे,
  • गर तुम इसे मानो जीवन के महानतम चीज़ की तरह,
  • जो तुम खाते या पीते हो, जो तुम पहनते हो,
  • या धरती पर किसी भी चीज़ से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण।

6 नव॰ 2018

सच्चाई से जी कर ही तू दे सकता है गवाही


  • सच्चाई से जी कर ही तू दे सकता है गवाही

  •  
  • I
  • सत्य है जिनमें, वे ही ऐसे लोग हैं जो अपने अनुभव में,
  • मज़बूती से दे सकते हैं गवाही,
  • खड़े रह सकते हैं डटकर, परमेश्वर के पक्ष में,
  • कभी हटते नहीं पीछे, मौत आने तक मानते हैं हुक्म परमेश्वर का,
  • बनाए रखते हैं सामान्य रिश्ता उनसे, जो प्रेम करते हैं परमेश्वर से।
  • असल ज़िंदगी में तेरा अमल और अभिव्यक्ति
  • हैं गवाही परमेश्वर की।
  • जिसे इंसान को चाहिये जीना।
  • यही है असल में परमेश्वर के प्यार का आनन्द लेना।
  • जब पहुँचेगा तू यहाँ, तो हासिल होगा उपयुक्त नतीजा।

5 नव॰ 2018

परमेश्वर के वचनों की महत्ता


  • परमेश्वर के वचनों की महत्ता

  •  
  • I
  • परमेश्वर के विश्वासियों का कम से कम बर्ताव बेहतर होना चाहिये।
  • है सबसे अहम परमेश्वर के वचन रखना।
  • चाहे कुछ हो जाए, परमेश्वर के वचन से दूर न जाना।
  • परमेश्वर को जानना, ख़ुश करना, होता है उसके वचन से।
  • तमाम पंथ, देश और सम्प्रदाय
  • जीते जाएँगे भविष्य में उसके वचन से।
  • सीधे बात करेगा परमेश्वर लोगों से,
  • अपने हाथों में थामेंगे लोग उसके वचन।
  • लोग इसके ज़रिये पूर्ण बनाए जाँएगे,
  • हर जगह फैलते हैं परमेश्वर के वचन।

1 नव॰ 2018

स्वभाव में बदलाव वास्तविक जीवन से अलग नहीं हो सकता

परमेश्वर के वचनों का एक भजन

स्वभाव में बदलाव वास्तविक जीवन से अलग नहीं हो सकता 

परमेश्वर में विश्वास करने में,
यदि मानव बदलाव लाना चाहता है,
तो उसे अपने वास्तविक जीवन से
खुद को वियुक्त नहीं करना चाहिए।

27 अक्टू॰ 2018

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग चार

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II भाग चार

अय्यूब की अटल सत्यनिष्ठा ने शैतान को लज्जित किया और उसे भयातुर करके खदेड़ दिया

और परमेश्वर ने क्या किया जब अय्यूब को इस पीड़ा के अधीन किया गया था? परमेश्वर ने परिणाम का अवलोकन किया, और उसे देखा, और उसका इंतजार किया। जब परमेश्वर ने अवलोकन किया एवं देखा, तो उसने कैसा महसूस किया था? हाँ वास्तव में उसने गहरा शोक महसूस किया। परन्तु उसकी पीड़ा के परिणामस्वरूप, क्या वह शैतान को अय्यूब की परीक्षा लेने की अनुमति देने के लिए खेदित था? उसका उत्तर है, नहीं, वह खेदित नहीं था। क्योंकि वह दृढ़ता से विश्वास करता था कि अय्यूब खरा एवं सीधा था, यह कि वह परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था। परमेश्वर ने बस शैतान को अनुमति दी थी कि वह उसके सामने अय्यूब की धार्मिकता को परखे, और अपनी स्वयं की दुष्टता एवं घिनौनेपन को प्रकट करे। इसके अतिरिक्त, यह अय्यूब के लिए एक अवसर था कि वह अपनी धार्मिकता एवं परमेश्वर के प्रति अपने भय और बुराई से दूर रहने की गवाही को संसार के लोगों, शैतान, और यहाँ तक कि उन लोगों के सामने दे जो परमेश्वर का अनुसरण करते हैं। क्या अंतिम परिणाम ने यह साबित किया कि अय्यूब के विषय में परमेश्वर का आंकलन सही एवं त्रुटिहीन था। क्या अय्यूब ने वास्तव में शैतान पर विजय प्राप्त किया था? हम यहाँ पर आदर्श वचनों को पढ़ते हैं जिन्हें अय्यूब के द्वारा बोला गया था, ऐसे वचन जो इस बात का प्रमाण हैं कि उसने शैतान पर विजय पा लिया था। उसने कहा, "मैं अपनी माँ के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊँगा।" यह परमेश्वर के प्रति अय्यूब की आज्ञाकारिता की मनोवृत्ति है।

26 अक्टू॰ 2018

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग तीन

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग तीन


आगे हम अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु के द्वारा बोले गए दृष्टान्त पर नज़र डालेंगे।
3. खोई हुई भेड़ का दृष्टान्त
(मत्ती18:12-14) क्या तुम समझते हो? यदि किसी मनुष्य की सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक भटक जाए, तो क्या वह निन्यानवे को छोड़कर, और पहाड़ों पर जाकर, उस भटकी हुई को ना ढूँढ़ेगा? और यदि ऐसा हो कि उसे पाए, तो मैं तुम से सच कहता हूँ, कि वह उन निन्यानवे भेडों के लिए जो भटकी नहीं थी, इतना आनन्द नहीं करेगा जितना कि इस भेड़ के लिए करेगा। ऐसा ही तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में है यह इच्छा नहीं कि इन छोटों में से एक भी नष्ट हो।
यह एक रूपक है—इस अंश से लोग किस प्रकार का एहसास प्राप्त करते हैं? जिस तरह से इस अलंकार को प्रदर्शित किया गया है वह मानवीय भाषा में वाक्य अलंकार का उपयोग करता है; यह कुछ ऐसा है जो मनुष्य के ज्ञान के दायरे के भीतर है। यदि परमेश्वर ने व्यवस्था के युग में ऐसा कुछ कहा होता, तो लोगों ने महसूस किया होता कि वास्तव में जो परमेश्वर है यह उस के अनुरूप नहीं था, लेकिन जब मनुष्य के पुत्र ने अनुग्रह के युग में इस अंश को प्रदान किया, तब इससे लोगों को सुकून, उत्साह, और घनिष्ठता मिली। जब परमेश्वर देहधारी हुआ, जब वह एक मनुष्य के रूप में प्रकट हुआ, तो उसने मानवता पर अपने हृदय की आवाज़ को प्रकट करने के लिए बिल्कुल उचित रूपक का उपयोग किया। यह आवाज़ परमेश्वर के स्वयं की आवाज़ का और उस कार्य का प्रतिनिधित्व करता है जो वह उस युग में करना चाहता था। अनुग्रह के युग के लोगों के प्रति परमेश्वर का जो रवैय्या था यह उसे भी दर्शाता था। लोगों के प्रति परमेश्वर की मनोदृष्टि के नज़रिए से देखने से पता चलता है कि, उसने हर व्यक्ति की तुलना एक भेड़ से की है। यदि एक भेड़ खो जाती है, तो उसे खोजने के लिए जो कुछ हो सकता है वह करेगा। यह इस समय मनुष्यों के बीच परमेश्वर के कार्य के सिद्धांत को देह में दर्शाता है।

25 अक्टू॰ 2018

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग सात

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III भाग सात


अब आओ हम नीचे दिए पवित्र शास्त्र के अंश को पढ़ें
12. अपने पुनरूत्थान के बाद अपने चेलों के लिए यीशु के वचन
(यूहन्ना 20: 26-29) आठ दिन के बाद उसके चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उनके साथ था; और द्वार बंद थे, तब यीशु आया और उनके बीच में खड़े होकर कहा, "तुम्हें शान्ति मिले।" तब उसने थोमा से कहा, "अपनी उँगली यहाँ लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल, और अविश्वासी नहीं परंतु विश्वासी हो।" यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, "हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! यीशु ने उससे कहा, तू ने मुझे देखा है, क्या इसलिए विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्होंने बिना देखे विश्वास किया।"

23 अक्टू॰ 2018

परमेश्वर लाया है इंसान को नए युग में


  • परमेश्वर लाया है इंसान को नए युग में

  •  
  • I
  • परमेश्वर का कार्य राह दिखाता है पूरी कायनात को,
  • चमकती है सीधे बिजली पूरब से पश्चिम को।
  • फैलाता है अन्य देशों में अपना कार्य परमेश्वर।
  • चमकती है उसकी महिमा पूरी कायनात पर।
  • उसकी इच्छा, समाहित है फैले लोगों में,
  • सब कर रहे हैं नियत कामों को, उसके हाथ के इशारों पर।
  • प्रवेश किया है उसने अब एक नए युग में,
  • ला रहा है इंसानों को दूसरे युग में।

17 अक्टू॰ 2018

एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है

एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है

मनुष्य का प्रबंधन करना मेरा कार्य है, और मेरे द्वारा उसे जीत लिया जाना और भी अधिक कुछ चीज़ है जो तब नियत की गई थी जब मैंने संसार की रचना की थी। हो सकता है कि लोग नहीं जानते हों कि अंत के दिनों में मैं उन्हें पूरी तरह से जीत लूँगा और हो सकता है कि वे इस बारे में भी अनजान हों कि मानवजाति में से विद्रोही लोगों को जीत लेना ही शैतान को मेरे द्वारा हराने का प्रमाण है। परन्तु जब मेरा शत्रु मेरे साथ संघर्ष में शामिल हुआ, तो मैंने उसे पहले से ही बता दिया था कि मैं उन सभी को जिन्हें शैतान ने बंदी बना लिया था और अपनी संतान बना लिया था और उसके घर की निगरानी करने वाले उसके वफादार सेवकों को जीतने वाला बनूँगा। जीतने का मूल अर्थ है—परास्त करना, अपमान के अधीन करना है। इस्राएलियों की भाषा में, इसका अर्थ पूरी तरह से परास्त करना, नष्ट करना, और मेरे विरुद्ध आगे विद्रोह करने में अक्षम कर देना है। परन्तु आज जैसे कि तुम लोगों के बीच उपयोग किया जाता है, इसका अर्थ है जीतना। तुम लोगों को पता होना चाहिए कि मेरा अभिप्राय मानवजाति से शैतान को पूरी तरह से समाप्त और निकाल बाहर करना है, ताकि वह मेरे विरुद्ध अब और विद्रोह न कर सके, मेरे कार्य में अवरोध उत्पन्न करने या उसे अस्तव्यस्त करने के लिए तो दम भी न ले सके। इस प्रकार, जहाँ तक मनुष्य का सवाल है, इसका अर्थ जीतना हो गया है। शब्द के चाहे कुछ भी अर्थ हों, मेरा कार्य मानवजाति को हराना है। क्योंकि, जबकि यह सत्य है कि मानवजाति मेरे प्रबंधन में एक अनुबंध है, परन्तु सटीक रूप से कहें तो, मानवजाति मेरी शत्रु के अलावा अन्य कुछ नहीं है। मानवजाति वह बुराई है जो मेरा विरोध और मेरी अवज्ञा करती है। मानवजाति मेरे द्वारा श्रापित दुष्ट की संतान के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है। मानव जाति उस प्रधान दूत के वंशज के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है जिसने मेरे साथ विश्वासघात किया था। मानव जाति उस शैतान की विरासत के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है जो बहुत पहले ही मेरे द्वारा ठुकराया गया, हमेशा से मेरा कट्टर विरोधी शत्रु रहा है।

14 अक्टू॰ 2018

हम पूरे मन से पालन करेंगे

  • आराधना गीत
  • हम पूरे मन से पालन करेंगे

  •  
  • I
  • हम ऐसी अंधेरी दुनिया में रहते थे जहां शैतान यातना देता था हमें।
  • अब हम रहते हैं कलीसिया में,
  • उस ख़ुशी में जिसे बयां करना मुमकिन नहीं।
  • हम परमेश्वर को प्रेम करने का फ़र्ज़ निभाते हैं,
  • और सच पर अमल करते हैं, कि वो ख़ुश हो।
  • हम एक दिल हो, एक-दूजे को चाहते हैं,
  • और चलते हैं उस राह पर, जो परमेश्वर दिखाता है।
  • हे परमेश्वर तुझे पता है हम क्या चाहते हैं,
  • हम बेचारे हैं, अंधे हैं, और अधम हैं।
  • हे परमेश्वर राह दिखा और हमारा दिल संभाल,
  • हम तेरे कर्मों के गवाह होंगे।
  • हे परमेश्वर तुझे पता है हम क्या चाहते हैं,
  • हम बेचारे हैं, अंधे हैं, और अधम हैं।
  • हे परमेश्वर राह दिखा और हमारा दिल संभाल,
  • हम पूरे मन से पालन करेंगे, पालन करेंगे।

13 अक्टू॰ 2018

इरादा पक्का है परमेश्वर के अनुसरण का

  • आराधना गीत

  •  
  • I
  • परमेश्वर में आज तक आस्था रखकर,
  • आख़िर देख ली है रोशनी मैंने।
  • यातना और तकलीफ़ों की पथरीली राह पर चली हूँ मैं।
  • तज दिया संसार ने मुझको, दोस्त भी दूर-दूर रहते हैं।
  • न जाने कितनी रातें प्रार्थना में, जागकर गुज़ारी हैं मैंने।
  • ग़म और ख़ुशी के न जाने, कितने आँसू बहाए हैं मैंने।
  • दौड़ती रहती हूँ दिनभर, चैन कहीं न पाया मैंने।
  • आज़ादी महज़ नाम को है,
  • इंसान का हक न देखा मैंने।
  • शैतान से बेइंतिहा नफ़रत है मुझे,
  • मसीह आए, संभाले सत्ता, इंतज़ार है मुझे।
  • इंसानी ज़िंदगी की रोशनी तलाश करूँ मैं,
  • दुनिया की बुराई और अंधेरे, मजबूर कर रहे हैं मुझे।

11 अक्टू॰ 2018

तड़प

  • आराधना गीत
  • तड़प

  •  
  • I
  • हे प्रभु!
  • अंधेरी दुनिया है, हुकूमत है शैतान की।
  • लम्बी रात और लम्बी होती जा रही है।
  • सच्चे परमेश्वर में आस्था का पथ,
  • और जीवन का अनुसरण मुश्किल हो रहा है।
  • चीनी साम्यवादी दल तलाश में है हमारी,
  • ढाह रहा है ज़ुल्म परमेश्वर के लोगों पर।
  • गिरफ्तार कर रहे हैं, वो दे रहे हैं यातना हमें।
  • परिजन हमारे समझ पाते नहीं।
  • पड़ोसी करते बदनाम उड़ाते हँसी हमारी,
  • और दुनिया भी हमको ठुकराती।
  • सहता हूँ दुख-दर्द, पुकारता हूँ प्रभु को,
  • हे यीशु दो सामर्थ मुझे, दो सामर्थ मुझे।

9 अक्टू॰ 2018

जीवन एक नये इंसान का

  • आराधना गीत
  • जीवन एक नये इंसान का
  •  

  • I
  • चमकते चांद के मानिंद हैं वचन खुदा के,
  • जो मेरे मन को, मेरी नज़र को निर्मल करें।
  • करते रोशन और प्रबुद्ध मुझे,
  • नव-जागृत होता हृदय मेरा।
  • मिटकर अज्ञात खुदावंद की छवि,
  • दर्शन होते मुझे व्यवहारिक खुदावंद के।
  • प्रवेश करता हूँ राज्य की तालीम में मैं,
  • जहाँ आरंभ करता हूँ नया जीवन मैं।
  • देहधारण कर, मानव को पूर्ण करते खुदा,
  • और बेहद दुर्लभ है ये अवसर।
  • समर्पित करता हूँ मैं हृदय अपना खुदा को,
  • स्वीकारता हूँ मैं छानबीन खुदा की।
  • सच्चे हृदय से भय मानता हूँ मैं खुदा का
  • और अपनी इच्छा पर काम नहीं करता मैं।
  • होता है सबकुछ सत्य के सिद्धांत पर,
  • सेवा खुदा की सच्चाई से करता हूँ मैं।

7 अक्टू॰ 2018

पूरे सफ़र में साथ तुम्हारे

श्रद्धा,जीवन,प्रकाश,स्वतंत्रता,

  • आराधना गीत
  • पूरे सफ़र में साथ तुम्हारे

  •  
  • I
  • खोया-खोया-सा अंदर से बेसहारा महसूस करता हुआ,
  • घूमता हूँ, भटकता हूँ जगत में मैं।
  • तुम्हारे कोमल वचनों से जागकर,
  • देखता हूँ उभरती रोशनी मैं।
  • तुम्हारे वचनों का न्याय मुझे स्वीकार है।
  • देखता हूँ भीतर तक दूषित हूँ मैं।
  • अपने बर्ताव पर विचार करते हुए,
  • वही स्वभाव अपने भीतर पाता हूँ मैं।

6 अक्टू॰ 2018

परमेश्वर का कार्य सचमुच है शानदार


  • आराधना गीत
  • परमेश्वर का कार्य सचमुच है शानदार
  •  
  • I
  • बादल पर्वत को घेरकर, जाने के इच्छुक नहीं होते।
  • तुम्हारा प्रेम हमारे ह्रदय के तार को अपनी तरफ खींचता है,
  • हज़ारों-लाखों जोशीले हृदयों पर अपना प्रभाव छोड़ता है,
  • हमें अपने और भी करीब लाता है।
  • हे परमेश्वर, तुमने सारी महिमा प्राप्त कर ली
  • और सिय्योन पर्वत पर लौट गए।
  • तुम्हारे वचन रहते हैं हमारे साथ, क्रियाशील हैं हमारे भीतर।
  • तुम्हारे वचन घोषणा करते हैं,
  • स्वर्ग और धरती में आता है बड़ा बदलाव,
  • मृत को मिल जाता जीवन।

3 अक्टू॰ 2018

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक


भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक

परमेश्वर ने देहधारण किया क्योंकि शैतान का आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ उसके कार्य का विषय नहीं है, परन्तु मनुष्य है, जो शरीर से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया गया है। निश्चित रूप से चूँकि मनुष्य की देह को भ्रष्ट किया गया है इसलिए परमेश्वर ने हाड़-मांस के मनुष्य को अपने कार्य का विषय बनाया है; इसके अतिरिक्त, क्योंकि मनुष्य भ्रष्टता का विषय है, उसने मनुष्य को अपने उद्धार के कार्य के समस्त चरणों के दौरान अपने कार्य का एकमात्र विषय बनाया है। मनुष्य एक नश्वर प्राणी है, और वह हाड़-मांस एवं लहू से बना हुआ है, और एकमात्र परमेश्वर ही है जो मनुष्य को बचा सकता है। इस रीति से, परमेश्वर को अपना कार्य करने के लिए ऐसा देह बनना होगा जो मनुष्य के समान ही गुणों को धारण करता है, ताकि उसका कार्य बेहतर प्रभावों को हासिल कर सके। परमेश्वर को अपने कार्य को ठीक तरह से करने के लिए देहधारण करना होगा क्योंकि मनुष्य देह से बना हुआ है, और पाप पर विजय पाने में या स्वयं को शरीर से अलग करने में असमर्थ है।

1 अक्टू॰ 2018

परमेश्वर स्वर्ग में है और धरती पर भी

  • परमेश्वर स्वर्ग में है और धरती पर भी


  •  
  • I
  • परमेश्वर, परमेश्वर।
  • परमेश्वर जब धरती पर होता है,
  • तो इंसानों के दिल में वो व्यवहारिक होता है।
  • स्वर्ग में वो सब जीवों का स्वामी होता है।
  • नदियाँ लांघी, पर्वत पर भी एकबार चढ़ा है परमेश्वर।
  • इंसानों के बीच कभी घूमा-फिरा है परमेश्वर।
  • स्वयं व्यवहारिक परमेश्वर का खुले-आम विरोध करे, किसमें साहस?

28 सित॰ 2018

पतरस की छवि - विजय का ध्वज

  • आराधना गीत
  • पतरस की छवि - विजय का ध्वज

  •  
  • I
  • देह में प्रकट होने वाला वचन परमेश्वर स्वयं है।
  • वही है असली सच्चा परमेश्वर हमारी आंखों के सामने।
  • कई युगों पहले, अंत के दिनों में, उसने तय किया मेरा जन्म।
  • उसने जीता, बचाया, जीवन दिया मुझे।
  • परमेश्वर के साथ इस परम प्यार को मज़बूत करता हूं मैं,
  • अंत के दिनों में पतरस की छवि दिखाई देती है।
  • परमेश्वर की रचनात्मक शक्ति है असीमित,
  • अपनी छवि में नए लोग बनाए हैं उसने।
  • कुछ भी हो, व्यावहारिक परमेश्वर के पीछे चलने का संकल्प है मेरा।
  • जब तक जान नहीं लेता परमेश्वर को, मैं विश्राम न करूंगा।
  • उसके लिए पीड़ा सह न पाऊं अगर,
  • तो इंसान कहलाने के लायक नहीं मैं।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...