6 नव॰ 2018

सच्चाई से जी कर ही तू दे सकता है गवाही


  • सच्चाई से जी कर ही तू दे सकता है गवाही

  •  
  • I
  • सत्य है जिनमें, वे ही ऐसे लोग हैं जो अपने अनुभव में,
  • मज़बूती से दे सकते हैं गवाही,
  • खड़े रह सकते हैं डटकर, परमेश्वर के पक्ष में,
  • कभी हटते नहीं पीछे, मौत आने तक मानते हैं हुक्म परमेश्वर का,
  • बनाए रखते हैं सामान्य रिश्ता उनसे, जो प्रेम करते हैं परमेश्वर से।
  • असल ज़िंदगी में तेरा अमल और अभिव्यक्ति
  • हैं गवाही परमेश्वर की।
  • जिसे इंसान को चाहिये जीना।
  • यही है असल में परमेश्वर के प्यार का आनन्द लेना।
  • जब पहुँचेगा तू यहाँ, तो हासिल होगा उपयुक्त नतीजा।
  • II
  • तेरे पास है असल बर्ताव सत्य के अमल का।
  • तेरा हर काम सराहा जाता है दूसरों द्वारा।
  • सादा है तेरा बाहरी रूप मगर, जीता है धर्मपरायणता का जीवन तू।
  • परमेश्वर करता है प्रबुद्ध तुझे, जब साझा करता है परमेश्वर के वचनों को तू।
  • III
  • अपने शब्दों से इच्छा परमेश्वर की तू बोल पाता है,
  • सच्चाई बोलता है, आत्मा में सेवा को समझता है,
  • अपनी ज़बान में तू खरा है,
  • शालीन है, सरल है, अशांत नहीं है,
  • परमेश्वर की योजना का पालन कर सकता है,
  • अपनी गवाही में डटा रह सकता है।
  • जब आ जाती है कोई बात तुझ पर, तो तू शांत-स्थिर रहता है।
  • परमेश्वर के प्यार को ऐसे ही इंसान ने देखा है।
  • असल ज़िंदगी में तेरा अमल और अभिव्यक्ति
  • हैं गवाही परमेश्वर की,
  • जिसे इंसान को चाहिये जीना।
  • यही है असल में परमेश्वर के प्यार का आनन्द लेना।
  • जब पहुँचेगा तू यहाँ, तो हासिल होगा उपयुक्त नतीजा।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से

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