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30 अग॰ 2019

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, परमेश्वर की इच्छा, परमेश्वर को जानना
1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"जो मुझ से, 'हे प्रभु! हे प्रभु!' कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है। उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, 'हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत से आश्‍चर्यकर्म नहीं किए?' तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा, 'मैं ने तुम को कभी नहीं जाना। हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ" (मत्ती 7:21-23)।
"तू परमेश्‍वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।" (मत्ती 22:37-39)।
"यदि कोई मुझ से प्रेम रखेगा तो वह मेरे वचन को मानेगा … जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता" (युहन्ना 14:23-24)।
"यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे …" (युहन्ना 8:31)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
इस वक्त पवित्र आत्मा जिस मार्ग को अपनाता है वह परमेश्वर के वास्तविक वचन हैं। अतः उस मार्ग पर चलने के इच्छुक व्यक्ति को देहधारी परमेश्वर के वास्तविक वचनों का पालन करना चाहिए, और उन्हें खाना तथा पीना चाहिए। वह वचनों का कार्य कर रहा है, और सब कुछ उसके वचनों से कहा जाता है, और सब कुछ उसके वचनों, उसके वास्तविक वचन, पर स्थापित है। परमेश्वर का सत्य वचन।

17 अग॰ 2019

Hindi Christian Skit | क्या आपने सच्चा प्रायश्चित किया है?


Hindi Christian Video | क्या आपने सच्चा प्रायश्चित किया है?

किसी समय, झांग मिंगेन एक गृह कलीसिया में प्रचारक था। उसने बरसों प्रभु में आस्था रखी और उस दौरान, वह हर समय, प्रचार करता, कार्य करता, कष्ट उठाता, और प्रभु के लिये ख़ुद को खपाता था। इस तरह उसे लगता था कि उसने सच्चा प्रायश्चित और बदलाव हासिल कर लिया है। लेकिन, कलीसिया के चुनाव में, झांग मिंगेन ने दूसरे भाई-बहनों को अगुवा और उपयाजक चुने जाते देखा, जबकि उसे सभाओं के आयोजन का कार्य दिया गया। हालाँकि ऊपर से तो उसने स्वीकृति और समर्पण की भावना दिखाई, लेकिन वह बेहद नाख़ुश था।

29 जुल॰ 2019

6. बाइबल के साथ वास्तव में कैसे पेश आना चाहिए और उसका उपयोग किस तरह से करना चाहिए कि वह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हो? बाइबल का मूलभूत मूल्य क्या है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
आज, मैं इस रीति से बाइबल की चीरफाड़ कर रहा हूँ और इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं इस से नफरत करता हूँ, या सन्दर्भ के लिए इसके मूल्य को नकारता हूँ। अंधकार में रखे जाने से तुम्हें रोकने के लिए मैं तुम्हारे लिए बाइबल के अंतर्निहित मूल्यों और इसकी उत्पत्ति की व्याख्या कर रहा हूँ। क्योंकि बाइबल के बारे में लोगों के अनेक दृष्टिकोण हैं, और उनमें से अधिकांश ग़लत हैं; इस तरह से बाइबल पढ़ना न केवल उन्हें उन चीज़ों को प्राप्त करने से रोकता है जो उन्हें प्राप्त करनी चाहिए, बल्कि, अधिक महत्वपूर्ण यह है, कि यह उस कार्य में भी बाधा डालता है जिसे करने का मैं इरादा करता हूँ।

28 जुल॰ 2019

5. परमेश्वर में सच्चा विश्वास वास्तव में क्या है? किसी को परमेश्वर में कैसे विश्वास करना चाहिए कि वह परमेश्वर से प्रशंसा प्राप्त कर सके?



परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
यद्यपि बहुत से लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, किंतु बहुत कम लोग समझते हैं कि परमेश्वर पर विश्वास करने का अर्थ क्या है, और परमेश्वर के मन के अनुरूप बनने के लिये उन्हें क्या करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि यद्यपि लोग "परमेश्वर" शब्द और "परमेश्वर का कार्य" जैसे वाक्यांश से परिचित हैं, किंतु वे परमेश्वर को नहीं जानते हैं, और उससे भी कम वे उसके कार्य को जानते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि तब वे सभी जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं, वे दुविधायुक्त विश्वास रखते हैं। लोग परमेश्वर पर विश्वास करने को गंभीरता से नहीं लेते हैं, क्योंकि परमेश्वर पर विश्वास करना उनके लिये अत्यधिक अनजाना और अजीब है। इस प्रकार, वे परमेश्वर की माँग से कम पड़ते हैं। दूसरे शब्दों में, यदि लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं, तो वे उसके कार्य को भी नहीं जानते हैं, तब वे परमेश्वर के इस्तेमाल के योग्य नहीं हैं, और उससे भी कम यह कि वे परमेश्वर की इच्छा को पूरा नहीं कर सकते हैं। "परमेश्वर पर विश्वास" का अर्थ, यह विश्वास करना है कि परमेश्वर है; यह परमेश्वर पर विश्वास की सरलतम अवधारणा है। इससे बढ़कर यह बात है कि परमेश्वर है, यह मानना परमेश्वर पर सचमुच विश्वास करना नहीं है; बल्कि यह मजबूत धार्मिक प्रभाव के साथ एक प्रकार का सरल विश्वास है। परमेश्वर पर सच्चे विश्वास का अर्थ इस विश्वास के आधार पर परमेश्वर के वचनों और कामों का अनुभव करना है कि परमेश्वर सब वस्तुओं पर संप्रभुता रखता है। इस तरह से तुम अपने भ्रष्ट स्वभाव से मुक्त हो जाओगे, परमेश्वर की इच्छा को पूरा करोगे और परमेश्वर को जान जाओगे। केवल इस प्रकार की यात्रा के माध्यम से ही तुम्हें परमेश्वर पर विश्वास करने वाला कहा जा सकता है। मगर लोग परमेश्वर पर विश्वास को अक्सर बहुत सरल और तुच्छ मानते हैं। ऐसे लोगों का विश्वास अर्थहीन है और कभी भी परमेश्वर का अनुमोदन नहीं पा सकता है, क्योंकि वे गलत पथ पर चलते हैं। आज, अभी भी कुछ ऐसे लोग हैं जो अक्षरों में, खोखले सिद्धान्तों में परमेश्वर पर विश्वास करते हैं। वे इस बात से अनजान हैं कि परमेश्वर पर उनके विश्वास में कोई सार नहीं है, और कि वे परमेश्वर का अनुमोदन पाने में असमर्थ हैं, और तब भी वे परमेश्वर से शांति और पर्याप्त अनुग्रह के लिये प्रार्थना करते हैं। हमें रुक कर स्वयं से प्रश्न करना चाहिए: क्या परमेश्वर पर विश्वास करना पृथ्वी पर वास्तव में सबसे अधिक आसान बात है? क्या परमेश्वर पर विश्वास करने का अर्थ, परमेश्वर से अधिक अनुग्रह पाने की अपेक्षा कुछ नहीं है? क्या जो लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं पर उसे नहीं जानते हैं; और जो उस पर विश्वास तो करते हैं पर उसका विरोध करते हैं, सचमुच उसकी इच्छा को पूरा करते हैं?
"वचन देह में प्रकट होता है" से "प्रस्तावना" से

25 जुल॰ 2019

2. धार्मिक दुनिया का मानना है कि सभी शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए हैं और ये सब परमेश्वर के ही वचन हैं; इस कथन के प्रति हर किसी को क्या विवेक रखना चाहिए?

XI. परमेश्वर और बाइबल के मध्य रहे सम्बन्ध की सच्चाई के पहलू पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर की इच्छा,परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर को जानना

2. धार्मिक दुनिया का मानना है कि सभी शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए हैं और ये सब परमेश्वर के ही वचन हैं; इस कथन के प्रति हर किसी को क्या विवेक रखना चाहिए?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
बाइबल की हर चीज़ परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रूप से बोले गए वचनों का लिखित दस्तावेज़ नहीं है। बाइबल सामान्यतः परमेश्वर के कार्य की पिछली दो अवस्थाओं का आलेख करती है, उसमें से एक भाग है जो पैग़म्बरों की भविष्यवाणियों का लिखित दस्तावेज़ है, और एक भाग वह अनुभव और ज्ञान है जिन्हें युगों के दौरान उन लोगों के द्वारा लिखा गया था जिन्हें परमेश्वर के द्वारा इस्तेमाल किया गया था। मानवीय अनुभवों को मानवीय अनुमानों और ज्ञान के साथ दूषित किया गया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। बाइबल की बहुत सी पुस्तकों में मानवीय धारणाएँ, मानवीय पक्षपात, और मनुष्यों के बेतुके अनुवाद हैं। हाँ वास्तव में, बहुत सारे वचन पवित्र आत्मा के प्रकाशन और अलौकिक ज्ञान का परिणाम हैं और वे सही अनुवाद हैं - फिर भी यह अभी नहीं कहा जा सकता है कि वे पूरी तरह सत्य की सही अभिव्यक्ति हैं। कुछ निश्चित चीज़ों पर उनका दृष्टिकोण व्यक्तिगत अनुभव के ज्ञान, या पवित्र आत्मा के प्रकाशन से बढ़कर और कुछ भी नहीं है। पैग़म्बरों के पूर्वकथनों को परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रीति से निर्देशित किया गया थाः यशायाह, दानिय्येल, एज्रा, यिर्मयाह और यहेजकेल की भविष्यवाणियाँ पवित्र आत्मा के सीधे निर्देशन से आई थीं। ये लोग दर्शी थे, उन्होंने भविष्यवाणी की आत्मा को प्राप्त किया था, और वे सभी पुराने नियम के पैग़म्बर थे। व्यवस्था के युग के दौरान इन लोगों ने, जिन्होंने यहोवा की अभिप्रेरणाओं को प्राप्त किया था, अनेक भविष्यवाणियाँ की थीं, जिन्हें सीधे यहोवा के द्वारा निर्देशित किया गया था।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (3)" से

19 जुल॰ 2019

1. परमेश्वर को जानना वास्तव में क्या है? क्या बाइबल की जानकारी और धार्मिक सिद्धांत को समझना, परमेश्वर को जानना माना जा सकता है?

X. परमेश्वर को कैसे जाना जाए, इससे सम्बंधित सच्चाई के पहलू पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-प्रभु यीशु की वापसी,परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर को जानना

1. परमेश्वर को जानना वास्तव में क्या है? क्या बाइबल की जानकारी और धार्मिक सिद्धांत को समझना, परमेश्वर को जानना माना जा सकता है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर को जानने का क्या अभिप्राय है? इसका अभिप्राय है कि मनुष्य परमेश्वर की भावनाओं के विस्तार को जानता है, परमेश्वर को जानना यही है। आप कहते हैं कि आपने परमेश्वर को देखा है, फिर भी आप परमेश्वर की भावनाओं के विस्तार को नहीं जानते हैं, उनके स्वभाव को नहीं जानते हैं, और उनकी धार्मिकता को भी नहीं जानते हैं। आपको उनकी दयालुता की कोई समझ नहीं है, और आप नहीं जानते हैं कि वे किससे घृणा करते हैं। इसे परमेश्वर को जानना नहीं कहा जा सकता है। इसलिए, कुछ लोग परमेश्वर का अनुसरण करने में सक्षम हैं, किन्तु वे आवश्यक रूप से परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते हैं।

28 जून 2019

अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के महत्व को, अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य से प्राप्त परिणामों में, देखा जा सकता है।

(1) अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय का कार्य मनुष्य को शुद्ध करने, बचाने और सिद्ध बनाने, तथा विजय प्राप्त करने वालों का एक समूह बनाने के लिए किया जाता है।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
“तू ने मेरे धीरज के वचन को थामा है, इसलिये मैं भी तुझे परीक्षा के उस समय बचा रखूँगा जो पृथ्वी पर रहनेवालों के परखने के लिये सारे संसार पर आनेवाला है। मैं शीघ्र ही आनेवाला हूँ; जो कुछ तेरे पास है उसे थामे रह कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले। जो जय पाए उसे मैं अपने परमेश्‍वर के मन्दिर में एक खंभा बनाऊँगा, और वह फिर कभी बाहर न निकलेगा; और मैं अपने परमेश्‍वर का नाम और अपने परमेश्‍वर के नगर अर्थात् नये यरूशलेम का नाम, जो मेरे परमेश्‍वर के पास से स्वर्ग पर से उतरनेवाला है, और अपना नया नाम उस पर लिखूँगा” (प्रकाशितवाक्‍य 3:10-12)।
“ये वे हैं जो स्त्रियों के साथ अशुद्ध नहीं हुए, पर कुँवारे हैं; ये वे ही हैं कि जहाँ कहीं मेम्ना जाता है, वे उसके पीछे हो लेते हैं; ये तो परमेश्‍वर के निमित्त पहले फल होने के लिये मनुष्यों में से मोल लिए गए हैं। उनके मुँह से कभी झूठ न निकला था, वे निर्दोष हैं” (प्रकाशितवाक्‍य 14:4-5)।

28 अप्रैल 2019

कलिसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन"

कलिसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: “मनुष्य से पृथक होने और फिर एक होने के आनन्द और दुःखों में, हम मनोभावों का आदान-प्रदान करने में असमर्थ होते है। ऊपर स्वर्ग और नीचे पृथ्वी पर पृथक हुए, मैं और मनुष्य नियमित रूप से मिलने में असमर्थ हैं। पूर्व की भावनाओं के विषाद से कौन मुक्त हो सकता है? कौन अतीत के बारे में स्मरण करने से अपने आप को रोक सकता है? कौन अतीत के मनोभावों की निरंतरता की आशा नहीं करेगा? कौन मेरी वापसी की अभिलाषा नहीं करेगा? कौन मनुष्य के साथ मेरे फिर से एक हो जाने की लालसा नहीं करेगा? मेरा हृदय अत्यंत अशांत है, और मनुष्य की आत्मा गहराई तक चिंतित हैं।

20 अप्रैल 2019

Hindi Christian Song | परमेश्वर ख़ामोशी से प्रबंध करता है हर एक का | The Grace of God Is Great


Hindi Christian Song | परमेश्वर ख़ामोशी से प्रबंध करता है हर एक का | The Grace of God Is Great

परमेश्वर हर जगह, हर वक्त, हर इंसान की ज़रूरत पूरी करता है। किस तरह लोगों के ख़्याल, और दिल बदलते हैं, वह नज़र रखता है। उन्हें दिलासा देता है, जोश भरता है और राह दिखलाता है। जो उसे चाहता है, उसका अनुसरण करता है, परमेश्वर कोई कसर नहीं रखता, वो अपनी दुआएं बरसाता है। उन सभी को अनुग्रह देता है, उसकी दया का प्रवाह व्यापक है। वो जो है, जो उसके पास है, दिल खोलकर लुटाता है।

18 अप्रैल 2019

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर के वचन के भजन-परमेश्वर अपनी उम्मीद रखता है पूरी तरह इंसान पर




परमेश्वर के वचन के भजन-
भजन के आॅडियो, परमेश्वर की इच्छा, परमेश्वर का प्रेम
परमेश्वर के वचन के भजन-परमेश्वर अपनी उम्मीद रखता है पूरी तरह इंसान पर

  • I
  • प्रारंभ से लेकर आजतक,
  • बस इंसान ही कर पाया बात परमेश्वर से।
  • उसके बनाए गए सभी जीवित प्राणियों के बीच,
  • बस इंसान ही कर पाता है बात परमेश्वर से।
  • इंसान सुनता है कानों से और देखता है आँखों से,
  • सोच और भाषा के साथ है उसके पास इच्छा की आज़ादी।
  • इंसान के पास हैं सभी क्षमताएं ज़रूरी
  • परमेश्वर को सुनने के लिए, उसकी इच्छा समझने के लिए,
  • परमेश्वर का आदेश स्वीकारने के लिए,
  • परमेश्वर के दिए आदेश को अपनाने के लिए।

17 अप्रैल 2019

परमेश्वर स्वयं के लिए इंसान की सच्ची आस्था और प्रेम पाने की करता है आशा



परमेश्वर स्वयं के लिए इंसान की सच्ची आस्था और प्रेम पाने की करता है आशा

  • I
  • परमेश्वर करता है आशा, जब तुम समझो,
  • उसके सच्चे रूप को,
  • तुम हो जाओगे उनके और करीब;
  • सच्चे दिल से समझोगे उनके प्रेम को,
  • इंसानियत के लिए उनकी चिंता की करोगे सच्ची तारीफ़;
  • अपने दिल को सौंप दोगे उनके हाथ में,
  • न रहेगा शंका न होगा कोई संदेह उनके बारे में,
  • इंसान के लिए वो सब कुछ करते हैं, लेकिन चुपके से,
  • उनकी सच्चाई, निष्ठा और प्यार मिलता है इंसान को चुपके से।

12 अप्रैल 2019

परमेश्वर की इच्छा खुली रही है सबके लिए

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • परमेश्वर की इच्छा खुली रही है सबके लिए
  •  
  • I
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।

22 जन॰ 2019

परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है


तुम में से प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर में विश्वास करके नए सिरे से अपने जीवन की जांच करके यह देख सकता है कि क्या परमेश्वर को खोजते समय, तुम सच्चे रूप में समझ पाए हो, सच्चे रूप में पूर्णत: समझ गये हो, और सच्चे रूप में परमेश्वर को जाने हो, और यह कि तुम सच्चे रूप में जान गये हो कि, विभिन्न मनुष्यों के प्रति परमेश्वर का मनोभाव क्या है, और यह कि तुम वास्तव में यह समझ गये हो कि परमेश्वर तुम पर क्या कार्य कर रहा है और परमेश्वर कैसे उसके प्रत्येक कार्य को व्यक्त करता है।

16 जन॰ 2019

जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन


जब परमेश्वर ने अपने दो चरणों का कार्य इज़राइल में किया, तो इज़राइलियों और गैर-यहूदी जातियों ने समान रूप से यह धारणा अपना ली: यद्यपि यह सत्य है कि परमेश्वर ने सभी चीज़ें बनाई हैं, वह केवल इज़राइलियों का परमेश्वर बनने को तैयार है, गैर-यहूदियों का परमेश्वर नहीं। इज़राइली निम्नलिखित पर विश्वास करते हैं: परमेश्वर केवल हमारा परमेश्वर हो सकता है, तुम सभी गैर-यहूदियों का परमेश्वर नहीं, और क्योंकि तुम लोग यहोवा को नहीं मानते हो, यहोवा—हमारा परमेश्वर—तुम लोगों से घृणा करता है। इसके अतिरिक्त, उन यहुदियों का यह भी मानना है: प्रभु यीशु ने हम यहूदियों की छवि ग्रहण की थी और यह एक ऐसा परमेश्वर है जिस पर यहूदियों का चिन्ह उपस्थित है। हमारे बीच ही परमेश्वर कार्य करता है। परमेश्वर की छवि और हमारी छवि समान हैं; हमारी छवि परमेश्वर के करीब है। प्रभु यीशु हम यहूदियों का राजा है; अन्य जातियाँ ऐसा महान उद्धार प्राप्त करने के योग्य नहीं हैं।

23 दिस॰ 2018

परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक


मनुष्य के बीच परमेश्वर के कार्य को मनुष्य से अलग नहीं किया जा सकता है, क्योंकि मनुष्य इस कार्य का उद्देश्य है, और परमेश्वर के द्वारा रचा गया एकमात्र ऐसा प्राणी है जो परमेश्वर की गवाही दे सकता है। मनुष्य का जीवन एवं मनुष्य की सम्पूर्ण क्रियाएं परमेश्वर से अविभाज्य हैं, और उन सब को परमेश्वर के हाथों के द्वारा नियन्त्रित किया जाता है, और यह भी कहा जा सकता है कि कोई भी व्यक्ति परमेश्वर से स्वाधीन होकर अस्तित्व में नहीं रह सकता है। कोई भी इसका इंकार नहीं कर सकता है, क्योंकि यह एक तथ्य है। वह सब कुछ जो परमेश्वर करता है वह मानवजाति के लाभ के लिए है, और शैतान के षडयन्त्रों की ओर निर्देशित होता है।

22 दिस॰ 2018

परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो


जिसमें दर्शन शामिल हैं वह मुख्यतः स्वयं परमेश्वर के कार्य की ओर संकेत करता है, और जिसमें रीति व्यवहार शामिल होता है उसे मनुष्य के द्वारा किया जाना चाहिए, और इसका परमेश्वर से कोई सम्बन्ध नहीं होता है। परमेश्वर के कार्य को स्वयं परमेश्वर के द्वारा पूर्ण किया गया है, और मनुष्य के रीति व्यवहार को स्वयं मनुष्य के द्वारा हासिल किया गया है। जिसे स्वयं परमेश्वर द्वारा किया जाना चाहिए उसे मनुष्य के द्वारा किए जाने की आवश्यकता नहीं है, और जिसका मनुष्य के द्वारा अभ्यास किया जाना चाहिए उससे परमेश्वर का कोई सम्बन्ध नहीं है। परमेश्वर का कार्य स्वयं उसकी सेवकाई है, और इसका मनुष्य से कोई सम्बन्ध नहीं है। इस कार्य को मनुष्य के द्वारा किए जाने की कोई जरूरत नहीं है, और, इससे बढ़कर, मनुष्य उस कार्य को करने में असमर्थ है जिसे परमेश्वर के द्वारा किया जाना है।

21 दिस॰ 2018

परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन


पवित्र आत्मा के कार्य का प्रत्येक चरण उसी समय मनुष्य की गवाही की भी अपेक्षा करता है। कार्य का प्रत्येक चरण परमेश्वर एवं शैतान के मध्य एक युद्ध है, और इस युद्ध का लक्ष्य शैतान है, जबकि वह शख्स जिसे इस कार्य के द्वारा पूर्ण बनाया जाएगा वह मनुष्य है। परमेश्वर का कार्य फलवन्त हो सकता है या नहीं यह परमेश्वर के प्रति मनुष्य की गवाही के तरीके पर निर्भर करता है। यह गवाही वह बात है जिसकी अपेक्षा परमेश्वर उन लोगों से करता जो उसका अनुसरण करते हैं; यह वह गवाही है जिसे शैतान के सामने दी जाती है, और यह उसके कार्य के प्रभावों का प्रमाण भी है।

7 दिस॰ 2018

सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है


अधिकांश लोग अपनी भविष्य की नियति के लिए, या अल्पकालिक आनन्द के लिए परमेश्वर में विश्वास करते हैं। क्योंकि ऐसे लोग जो किसी व्यवहार से होकर नहीं गुज़रे हैं, परमेश्वर में उनका विश्वास स्वर्ग में प्रवेश करने के लिए, एवं प्रतिफल अर्जित करने के लिए होता है। यह सिद्ध किए जाने के लिए, या परमेश्वर के किसी प्राणी के कर्तव्य को निभाने के लिए नहीं होता है। कहने का तात्पर्य है कि अधिकांश लोग अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए, या अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए परमेश्वर में विश्वास नहीं करते हैं। अर्थपूर्ण ज़िन्दगियों को जीने के लिए बिरले ही लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, और न ही ऐसे लोग हैं जो विश्वास करते हैं कि जबसे मनुष्य जीवित है, उन्हें परमेश्वर से प्रेम करना चाहिए क्योंकि यह स्वर्ग की व्यवस्था है और पृथ्वी का सिद्धान्त है कि ऐसा करें, और यह मनुष्य का स्वाभाविक पेशा है।

22 नव॰ 2018

एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है



एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है
भ्रष्टाचार के हजारों सालों बाद, मनुष्य सुन्न और मूर्ख बन गया है, एक दुष्ट आत्मा जो परमेश्वर का विरोध करती है, इस हद तक कि परमेश्वर के प्रति मनुष्य की विद्रोहशीलता इतिहास की पुस्तकों में दर्ज है, और यहाँ तक कि मनुष्य खुद भी अपने विद्रोही स्वभाव का पूरा लेखा देने के अयोग्य है—क्योंकि मनुष्य शैतान के द्वारा पूरी तरह से भ्रष्ट किया जा चुका है, और शैतान के द्वारा रास्ते से भटका दिया गया है कि नहीं जानता कि कहाँ मुड़ना हैं।

20 नव॰ 2018

तीन चेतावनियाँ



तीन चेतावनियाँ
परमेश्वर में विश्वासी के रूप में, तुम लोगों को सभी बातों में परमेश्वर के अलावा और किसी के प्रति वफादार नहीं होना चाहिए और सभी बातों में उसकी इच्छा के अनुरूप होने में समर्थ होना चाहिए। तथापि, यद्यपि हर कोई इस सिद्धांत को समझता है, फिर भी ये सच्चाइयाँ जो अत्यधिक स्पष्ट और बुनियादी हैं, जहाँ तक मनुष्य का संबंध है, उसकी अज्ञानता, बेहूदगी, और भ्रष्टता जैसी नानाविध मनोव्यथाओं के कारण उसमें पूरी तरह से नहीं देखी जा सकती है। इसलिए, तुम लोगों का अंत निर्धारित करने से पहले, मुझे सबसे पहले तुम लोगों को कुछ चीज़ें बतानी चाहिए, जो तुम लोगों के लिए अत्यधिक महत्व की हैं।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...