परमेश्वर के वचन के भजन- परमेश्वर के वचन के भजन-परमेश्वर अपनी उम्मीद रखता है पूरी तरह इंसान पर
- I
- प्रारंभ से लेकर आजतक,
- बस इंसान ही कर पाया बात परमेश्वर से।
- उसके बनाए गए सभी जीवित प्राणियों के बीच,
- बस इंसान ही कर पाता है बात परमेश्वर से।
- इंसान सुनता है कानों से और देखता है आँखों से,
- सोच और भाषा के साथ है उसके पास इच्छा की आज़ादी।
- इंसान के पास हैं सभी क्षमताएं ज़रूरी
- परमेश्वर को सुनने के लिए, उसकी इच्छा समझने के लिए,
- परमेश्वर का आदेश स्वीकारने के लिए,
- परमेश्वर के दिए आदेश को अपनाने के लिए।
- इसलिए परमेश्वर रखता है अपनी पूरी उम्मीद इंसान पर,
- पूरी उम्मीद इंसान पर।
- वो चाहता है इंसान को बनाना अपना साथी,
- जो उसके साथ एक ही दिल और दिमाग़ का रहे,
- जो उसके साथ मिलकर चलता रहे।
- II
- जबसे परमेश्वर ने किया शुरू अपना प्रबंधन,
- वो करता रहा इंतज़ार कि कब इंसान दे अपना दिल,
- दे उसे अपना दिल हर वक़्त,
- ताकि वो कर सके शुद्ध और तैयार उसे,
- ताकि इंसान करे उसे संतुष्ट, करे परमेश्वर उसे प्रेम,
- ताकि इंसान भयभीत हो परमेश्वर से और बुराई से हो दूर।
- परमेश्वर करता रहा उम्मीद और इंतज़ार
- इस परिणाम का इंतज़ार हर वक़्त,
- ताकि इंसान करे उसे संतुष्ट, करे परमेश्वर उसे प्रेम,
- ताकि इंसान भयभीत हो परमेश्वर से और बुराई से हो दूर।
- परमेश्वर करता रहा उम्मीद और इंतज़ार
- इस परिणाम का इंतज़ार हर वक़्त।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- अधिक: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर के वचन के भजन-परमेश्वर स्वयं के लिए इंसान की सच्ची आस्था और प्रेम पाने की करता है आशा

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