12 अप्रैल 2019

परमेश्वर की इच्छा खुली रही है सबके लिए

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • परमेश्वर की इच्छा खुली रही है सबके लिए
  •  
  • I
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।
  • II
  • परमेश्वर ने जानकर अपना सार छुपाया नहीं कभी,
  • न अपना स्वभाव, न इच्छा ही।
  • चूँकि इन्सान नहीं देता उसके कार्य, इच्छा पर ध्यान,
  • इन्सान की परमेश्वर के बारे में समझ है अति कमज़ोर।
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।
  • III
  • मायने हैं इसके कि जब परमेश्वर अपना व्यक्तित्व छुपाता है,
  • वो इन्सान के साथ ही हर समय खड़ा रहता है,
  • हर पल अपनी इच्छा, स्वभाव और सार प्रकट करता है।
  • एक अर्थ में, परमेश्वर का व्यक्तित्व सबके लिए खुला है।
  • चूँकि इन्सान अनाज्ञाकारी और अँधा है,
  • परमेश्वर के प्रकटन को वो देख नहीं पाता है,
  • परमेश्वर के प्रकटन को देख नहीं पाता है।
  • इन्सान के सृजन से,
  • परमेश्वर का स्वरूप, उसकी इच्छा, स्वभाव और वो जो है,
  • रहा है खुला, खुला सभी के लिए, रहा है खुला, खुला सभी के लिए।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • Source From: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी
  • अनुशंसित: सुसमाचारीय संगीत | इंसान के लिये परमेश्वर की इच्छा कभी नहीं बदलेगी

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1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

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