स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग चार
परमेश्वर का धर्मी स्वभाव भाग चार
नीनवे के लोगों के हृदयों में सच्चे पश्चाताप से उन्होंने परमेश्वर की दया को प्राप्त किया और उस ने उनके अंत को बदल दिया
क्या वहां परमेश्वर के हृदय के बदलाव और उसके क्रोध के बीच कोई परस्पर विरोध था? नहीं, बिलकुल भी नहीं! यह इसलिए है क्योंकि उस विशेष समय पर परमेश्वर की सहनशीलता का अपना कारण था। इसका कारण क्या हो सकता है? यह वह है जिसे बाईबिल में दिया गया है: "प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने कुमार्ग से फिर गया," और अपने हाथों के उपद्रवी कार्यों को तज दिया।
यह "कुमार्ग" कुछ मुटठीभर बुरे कार्यों की और संकेत नहीं करता है, परन्तु लोगों के व्यवहार के पीछे पाए जाने वाले बुरे स्रोत की और संकेत करता है। "अपने कुमार्ग से फिर जाना" इसका अर्थ है कि जिन पर सन्देह है वे कभी भी इन कार्यों को दोबारा नहीं करेंगे। दूसरे शब्दों में, वे पुन: इस बुरे तरीके से व्यवहार नहीं करेंगे;