- आराधना गीत
- मेरा घर कहां है
- I
- अपने नन्हें काग़ज़ पर रंगों से,
- नन्हा-सा घर बनाती हूं मैं,
- प्यारी मम्मी घर में है, प्यारे पापा भी घर पर हैं।
- अपनी प्यारी बहना के संग खेलूं मैं,
- खिली-खिली धूप में,
- हम सब तपन से भर जाते हैं।
- मम्मी भी ख़ुश है, पापा भी ख़ुश हैं,
- हम दोनों बहनें भी ख़ुश हैं,
- बस ख़ुशियां ही ख़ुशियां हैं।
- काग़ज़ पर रंगों में सिमटा, ये मेरा परिवार है।
- ये मेरे मीठे सपनों का, प्यारा-सा संसार है।
- II
- अपना नन्हा बैग उठाकर,
- चल दी मैं अनजान नगर,
- पापा घर के अंदर हैं, पर मम्मी बाहर।
- मैं और मेरा नन्हा बैग जाते उस घर,
- कभी जो जाना-पहचाना था।
- मम्मी घर के अंदर है, पर पापा बाहर।
- अपना नन्हा बैग उठाकर, भटक रही हूं राहों में,
- जाना कहां, समझ नहीं पाती, भटक रही हूं राहों में।
- मेरा नन्हा बैग ही बस मेरा इकलौता साथी है,
- बस ये ही मेरा घर है जिसको, छोड़ नहीं पाती हूं मैं।