30 अग॰ 2018

आख़िरकार कर सकता हूँ प्रेम मैं परमेश्वर से

  • आराधना गीत
  • आख़िरकार कर सकता हूँ प्रेम मैं परमेश्वर से
  •  
  • I
  • है सच्चा-निर्मल प्रेम तुम्हारा परमेश्वर।
  • है खरा-दयालु हृदय तुम्हारा परमेश्वर।
  • हमें बचाने की ख़ातिर अपना सबकुछ,
  • किया है तुमने न्योछावर हे परमेश्वर।
  • तुम होते हो तो मैं थर्रा जाता हूँ,
  • तुम पर ही है प्रेम-भरोसा परमेश्वर।
  • तुम संग ही मैं इम्तहान से गुज़रा हूँ,
  • कभी न मेरा साथ छोड़ना परमेश्वर।
  • रह सकता हूँ मैं प्रकाश में, मैं प्रकाश में,
  • पाकर तुम्हारी रहनुमाई परमेश्वर।
  • करूँगा सबकुछ जो भी मैं कर सकता हूँ,
  • सीखूँगा करना प्रेम तुम्हें हे परमेश्वर।
  • संग तुम्हारे हृदय तुम्हारा जान सका हूँ।
  • कर सकता हूँ प्रेम अंतत: तुमको मैं,
  • बना हूँ मैं इस लायक आख़िर परमेश्वर।
  • आख़िर जान सकता हूँ मैं हृदय तुम्हारा,
  • कर सकता हूँ प्रेम तुम्हें हे परमेश्वर।
  • II
  • दिखती है मुझको तुम्हारी सुंदरता,
  • जान गया हूँ तुम्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर।
  • मिलते हैं सदा सुखद आश्चर्य मुझको,
  • पाता हूँ भरपूर तुम्हीं से परमेश्वर।
  • अपना सारा प्रेम मुझे दे देते हो,
  • तुम संग मेरा समय कीमती परमेश्वर।
  • मुझे तुम्हारे कोमल प्रेम ने जगा दिया,
  • निष्ठावान रहूँगा तुमसे परमेश्वर।
  • रह सकता हूँ मैं प्रकाश में, मैं प्रकाश में,
  • पाकर तुम्हारी रहनुमाई परमेश्वर।
  • करूँगा सबकुछ जो भी मैं कर सकता हूँ,
  • सीखूँगा करना प्रेम तुम्हें हे परमेश्वर।
  • संग तुम्हारे हृदय तुम्हारा जान सका हूँ।
  • कर सकता हूँ प्रेम अंतत: तुमको मैं,
  • बना हूँ मैं इस लायक आख़िर परमेश्वर।
  • आख़िर जान सकता हूँ मैं हृदय तुम्हारा,
  • कर सकता हूँ प्रेम तुम्हें हे परमेश्वर।
  • III
  • वचन तुम्हारे राह दिखाएँ, अगुवाई करें,
  • मदद करें देह त्यागूँ अपना परमेश्वर।
  • कितनी बार किया मैंने विद्रोह मगर,
  • वचन तुम्हारे देते हैं जीवन मुझको।
  • इम्तहान जब आ जाते हैं;
  • जानूँ कैसे निष्ठावान मुझे रहना है;
  • दूँगा गवाही, छोड़ सभी कुछ,
  • चलूँगा पीछे तुम्हारे, तुम्हारे।
  • देते हो तुम सत्य मुझे, पथ मेरा आगे उज्ज्वल है।
  • महसूस किया है मैंने तुम्हारा अचल प्रेम।
  • सर्वशक्तिमान परमेश्वर जान लिया है मैंने तुम्हें।
  • आज पास है जो कुछ मेरे, सब कृपा तुम्हारी।
  • जानूं न मैं धन्यवाद कैसे दूँ तुमको, दूँ तुमको।
  •  
  • "मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...