25 मार्च 2019

आराधना के गी-अंत तक अनुसरण करने के लिये आत्मा के कार्य का पालन करो



  • अंत तक अनुसरण करने के लिये आत्मा के कार्य का पालन करो

  •  
  • I
  • पवित्र आत्मा का कार्य दिन ब दिन बदलता है,
  • उच्च प्रकटीकरण के साथ कदम दर कदम ऊपर चढ़ता है।
  • ऐसे ही इंसान को पूर्ण करने के लिए परमेश्वर करता है काम।
  • "इंसान अगर चल पाता नहीं इस गति से,
  • तो छूट सकता है वो पीछे।"
  • एक आज्ञाकारी हृदय के बिना,
  • अंत तक अनुसरण कर सकता नहीं इंसान।
  • II
  • पुराना युग गुज़र गया है, आया है एक नया युग।
  • नए युग में, नया कार्य करना है ज़रूरी।
  • अंतिम युग में जब परमेश्वर करता है इंसान को पूर्ण
  • परमेश्वर पहले से ज़्यादा तेज़ी से करेगा नया काम।
  • इसलिए, अपने हृदय में आज्ञाकारिता के बिना,
  • परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करना इंसान के लिए होगा मुश्किल।
  • III
  • परमेश्वर का कार्य बदल नहीं सकता, करता नहीं नियमों का पालन।
  • बल्कि, होता है उसका कार्य हमेशा ज़्यादा नया, ज़्यादा ऊँचा।
  • हर एक कदम के साथ होता है ज़्यादा व्यावहारिक,
  • इंसान की वास्तविक ज़रूरतों के और ज़्यादा अनुरूप।
  • जब इंसान इस प्रकार के काम का करता है अनुभव,
  • सिर्फ़ तब बदलता है उसका स्वभाव।
  • IV
  • "जीवन के बारे में इंसान का ज्ञान है बढ़ता,
  • इसलिए परमेश्वर अपना काम करता है और ऊंचा।"
  • इसी तरह परमेश्वर बनाता है इंसान को पूर्ण और अपने उपयोग के लायक।
  • "परमेश्वर का काम करता है युद्ध,
  • इंसान की अवधारणाओं को करता है सही,"
  • "ले जाता है उन्हें परमेश्वर का काम
  • अधिक ऊंची अधिक वास्तविक स्थिति तक,"
  • "जो है परमेश्वर पर विश्वास करने का उच्चतम आयाम
  • ताकि अंत में परमेश्वर की इच्छा हो सके पूरी।"
  • अवज्ञाकारी होना है जिनकी प्रकृति, इच्छा से करते हैं विरोध,
  • वे छोड़ दिए जाएंगे पीछे, जब परमेश्वर का कार्य बढ़ेगा तेज़ी से।
  • जिनके हृदय में है आज्ञाकारिता, जो रहते हैं विनम्र,
  • पहुंच पाएंगे वे अंत तक, रास्ते के अंत तक।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • Source From: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी

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1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

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