- अंत तक अनुसरण करने के लिये आत्मा के कार्य का पालन करो
- I
- पवित्र आत्मा का कार्य दिन ब दिन बदलता है,
- उच्च प्रकटीकरण के साथ कदम दर कदम ऊपर चढ़ता है।
- ऐसे ही इंसान को पूर्ण करने के लिए परमेश्वर करता है काम।
- "इंसान अगर चल पाता नहीं इस गति से,
- तो छूट सकता है वो पीछे।"
- एक आज्ञाकारी हृदय के बिना,
- अंत तक अनुसरण कर सकता नहीं इंसान।
- II
- पुराना युग गुज़र गया है, आया है एक नया युग।
- नए युग में, नया कार्य करना है ज़रूरी।
- अंतिम युग में जब परमेश्वर करता है इंसान को पूर्ण
- परमेश्वर पहले से ज़्यादा तेज़ी से करेगा नया काम।
- इसलिए, अपने हृदय में आज्ञाकारिता के बिना,
- परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करना इंसान के लिए होगा मुश्किल।
- III
- परमेश्वर का कार्य बदल नहीं सकता, करता नहीं नियमों का पालन।
- बल्कि, होता है उसका कार्य हमेशा ज़्यादा नया, ज़्यादा ऊँचा।
- हर एक कदम के साथ होता है ज़्यादा व्यावहारिक,
- इंसान की वास्तविक ज़रूरतों के और ज़्यादा अनुरूप।
- जब इंसान इस प्रकार के काम का करता है अनुभव,
- सिर्फ़ तब बदलता है उसका स्वभाव।
- IV
- "जीवन के बारे में इंसान का ज्ञान है बढ़ता,
- इसलिए परमेश्वर अपना काम करता है और ऊंचा।"
- इसी तरह परमेश्वर बनाता है इंसान को पूर्ण और अपने उपयोग के लायक।
- "परमेश्वर का काम करता है युद्ध,
- इंसान की अवधारणाओं को करता है सही,"
- "ले जाता है उन्हें परमेश्वर का काम
- अधिक ऊंची अधिक वास्तविक स्थिति तक,"
- "जो है परमेश्वर पर विश्वास करने का उच्चतम आयाम
- ताकि अंत में परमेश्वर की इच्छा हो सके पूरी।"
- अवज्ञाकारी होना है जिनकी प्रकृति, इच्छा से करते हैं विरोध,
- वे छोड़ दिए जाएंगे पीछे, जब परमेश्वर का कार्य बढ़ेगा तेज़ी से।
- जिनके हृदय में है आज्ञाकारिता, जो रहते हैं विनम्र,
- पहुंच पाएंगे वे अंत तक, रास्ते के अंत तक।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना के गी
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