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28 जुल॰ 2019

5. परमेश्वर में सच्चा विश्वास वास्तव में क्या है? किसी को परमेश्वर में कैसे विश्वास करना चाहिए कि वह परमेश्वर से प्रशंसा प्राप्त कर सके?



परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
यद्यपि बहुत से लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, किंतु बहुत कम लोग समझते हैं कि परमेश्वर पर विश्वास करने का अर्थ क्या है, और परमेश्वर के मन के अनुरूप बनने के लिये उन्हें क्या करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि यद्यपि लोग "परमेश्वर" शब्द और "परमेश्वर का कार्य" जैसे वाक्यांश से परिचित हैं, किंतु वे परमेश्वर को नहीं जानते हैं, और उससे भी कम वे उसके कार्य को जानते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि तब वे सभी जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं, वे दुविधायुक्त विश्वास रखते हैं। लोग परमेश्वर पर विश्वास करने को गंभीरता से नहीं लेते हैं, क्योंकि परमेश्वर पर विश्वास करना उनके लिये अत्यधिक अनजाना और अजीब है। इस प्रकार, वे परमेश्वर की माँग से कम पड़ते हैं। दूसरे शब्दों में, यदि लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं, तो वे उसके कार्य को भी नहीं जानते हैं, तब वे परमेश्वर के इस्तेमाल के योग्य नहीं हैं, और उससे भी कम यह कि वे परमेश्वर की इच्छा को पूरा नहीं कर सकते हैं। "परमेश्वर पर विश्वास" का अर्थ, यह विश्वास करना है कि परमेश्वर है; यह परमेश्वर पर विश्वास की सरलतम अवधारणा है। इससे बढ़कर यह बात है कि परमेश्वर है, यह मानना परमेश्वर पर सचमुच विश्वास करना नहीं है; बल्कि यह मजबूत धार्मिक प्रभाव के साथ एक प्रकार का सरल विश्वास है। परमेश्वर पर सच्चे विश्वास का अर्थ इस विश्वास के आधार पर परमेश्वर के वचनों और कामों का अनुभव करना है कि परमेश्वर सब वस्तुओं पर संप्रभुता रखता है। इस तरह से तुम अपने भ्रष्ट स्वभाव से मुक्त हो जाओगे, परमेश्वर की इच्छा को पूरा करोगे और परमेश्वर को जान जाओगे। केवल इस प्रकार की यात्रा के माध्यम से ही तुम्हें परमेश्वर पर विश्वास करने वाला कहा जा सकता है। मगर लोग परमेश्वर पर विश्वास को अक्सर बहुत सरल और तुच्छ मानते हैं। ऐसे लोगों का विश्वास अर्थहीन है और कभी भी परमेश्वर का अनुमोदन नहीं पा सकता है, क्योंकि वे गलत पथ पर चलते हैं। आज, अभी भी कुछ ऐसे लोग हैं जो अक्षरों में, खोखले सिद्धान्तों में परमेश्वर पर विश्वास करते हैं। वे इस बात से अनजान हैं कि परमेश्वर पर उनके विश्वास में कोई सार नहीं है, और कि वे परमेश्वर का अनुमोदन पाने में असमर्थ हैं, और तब भी वे परमेश्वर से शांति और पर्याप्त अनुग्रह के लिये प्रार्थना करते हैं। हमें रुक कर स्वयं से प्रश्न करना चाहिए: क्या परमेश्वर पर विश्वास करना पृथ्वी पर वास्तव में सबसे अधिक आसान बात है? क्या परमेश्वर पर विश्वास करने का अर्थ, परमेश्वर से अधिक अनुग्रह पाने की अपेक्षा कुछ नहीं है? क्या जो लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं पर उसे नहीं जानते हैं; और जो उस पर विश्वास तो करते हैं पर उसका विरोध करते हैं, सचमुच उसकी इच्छा को पूरा करते हैं?
"वचन देह में प्रकट होता है" से "प्रस्तावना" से

5 जून 2019

मैं मसीह को देखने के अयोग्य हूँ

हुआनबाओ डैलिआन शहर, लिआओनिंग प्रांत
जब से मैंने सबसे पहले सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करना आरंभ किया, तब से मैं उन भाइयों और बहनों की हमेशा सराहना करता था जो मसीह की व्यक्तिगत सेवकाई हासिल कर सकते हैं, जो अपने स्वयं के कानों से उसके धर्मोपदेशों को सुन सकते हैं। अपने दिल में, मैं सोचता कि अगर भविष्य में एक दिन मैं मसीह के धर्मोपदेशों को सुन सकूँ तो यह कितना अद्भुत होगा, निस्संदेह उसे देखना तो और भी अधिक अद्भुत होगा। लेकिन बाद में, उसकी संगति को सुनकर, मुझे मेरे दिल की गहराई से यह महसूस होने लगा है कि मैं मसीह को देखने के योग्य नहीं हूँ।

6 मई 2019

उस दिन आकाश विशेष रूप से साफ़ और उजला था (भाग 1)

टियान यिंग, चीन
मैं चीन में थ्री-सेल्फ कलीसिया की एक विश्वासी हुआ करती थी। जब मैंने पहली बार सभाओं में भाग लेना शुरू किया, तो पादरी अक्सर हमसे कहा करता थे: "भाइयों और बहनों, यह बाइबल में कहा गया है कि: 'क्योंकि धार्मिकता के लिये मन से विश्‍वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुँह से अंगीकार किया जाता है' (रोमियों 10:10)। हमें विश्वास के कारण उचित ठहराया गया है। चूँकि हम यीशु में विश्वास करते हैं, हम बचाए गए हैं। अगर हम किसी अन्य में विश्वास करते हैं, तो हम नहीं बचाए जाते...।" मैंने पादरी के इन शब्दों पर ध्यान दिया। नतीजतन, मैंने दृढ़ता से इसका अनुसरण किया और सक्रिय रूप से सभाओं में भाग लिया और मैंने प्रभु के आने और स्वर्ग के राज्य में मुझे ले जाने की प्रतीक्षा की। बाद में, जब कलीसिया में गैरकानूनी कर्म हो रहे थे, मैं उन सभाओं से तंग आ गई। वे पादरी लोग परस्पर विभाजित और बंटे हुए थे, उनमें से प्रत्येक स्वयं को गुट के शीर्ष पर स्थापित करने और स्वतंत्र राज्यों की स्थापना करने की कोशिश कर रहा था।

7 नव॰ 2018

परमेश्वर के लिए तुम्हारा विश्वास हो सबसे ऊँचा


  • परमेश्वर के लिए तुम्हारा विश्वास हो सबसे ऊँचा

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  • I
  • गर चाहते हो तुम करना यक़ीन,
  • गर पाना चाहते हो तुम परमेश्वर को और उसकी संतुष्टि,
  • गर तुम दर्द न सहो और मेहनत न करो,
  • तुम इन चीज़ों को प्राप्त नहीं कर सकोगे।
  • तुम सब ने सुने हैं बहुत प्रचार।
  • भले ही तुमने सुना है,
  • इसका ये अर्थ नहीं है कि वचन तुम्हारे हैं।
  • तुम्हें उनको आत्मसात और परिवर्तित करना चाहिए
  • ऐसी चीज़ में जो तुम से संबन्धित हो।
  • तुम केवल परमेश्वर में विश्वास से प्राप्त करोगे,
  • गर तुम इसे मानो जीवन के महानतम चीज़ की तरह,
  • जो तुम खाते या पीते हो, जो तुम पहनते हो,
  • या धरती पर किसी भी चीज़ से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण।

17 अक्टू॰ 2018

एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है

एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है

मनुष्य का प्रबंधन करना मेरा कार्य है, और मेरे द्वारा उसे जीत लिया जाना और भी अधिक कुछ चीज़ है जो तब नियत की गई थी जब मैंने संसार की रचना की थी। हो सकता है कि लोग नहीं जानते हों कि अंत के दिनों में मैं उन्हें पूरी तरह से जीत लूँगा और हो सकता है कि वे इस बारे में भी अनजान हों कि मानवजाति में से विद्रोही लोगों को जीत लेना ही शैतान को मेरे द्वारा हराने का प्रमाण है। परन्तु जब मेरा शत्रु मेरे साथ संघर्ष में शामिल हुआ, तो मैंने उसे पहले से ही बता दिया था कि मैं उन सभी को जिन्हें शैतान ने बंदी बना लिया था और अपनी संतान बना लिया था और उसके घर की निगरानी करने वाले उसके वफादार सेवकों को जीतने वाला बनूँगा। जीतने का मूल अर्थ है—परास्त करना, अपमान के अधीन करना है। इस्राएलियों की भाषा में, इसका अर्थ पूरी तरह से परास्त करना, नष्ट करना, और मेरे विरुद्ध आगे विद्रोह करने में अक्षम कर देना है। परन्तु आज जैसे कि तुम लोगों के बीच उपयोग किया जाता है, इसका अर्थ है जीतना। तुम लोगों को पता होना चाहिए कि मेरा अभिप्राय मानवजाति से शैतान को पूरी तरह से समाप्त और निकाल बाहर करना है, ताकि वह मेरे विरुद्ध अब और विद्रोह न कर सके, मेरे कार्य में अवरोध उत्पन्न करने या उसे अस्तव्यस्त करने के लिए तो दम भी न ले सके। इस प्रकार, जहाँ तक मनुष्य का सवाल है, इसका अर्थ जीतना हो गया है। शब्द के चाहे कुछ भी अर्थ हों, मेरा कार्य मानवजाति को हराना है। क्योंकि, जबकि यह सत्य है कि मानवजाति मेरे प्रबंधन में एक अनुबंध है, परन्तु सटीक रूप से कहें तो, मानवजाति मेरी शत्रु के अलावा अन्य कुछ नहीं है। मानवजाति वह बुराई है जो मेरा विरोध और मेरी अवज्ञा करती है। मानवजाति मेरे द्वारा श्रापित दुष्ट की संतान के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है। मानव जाति उस प्रधान दूत के वंशज के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है जिसने मेरे साथ विश्वासघात किया था। मानव जाति उस शैतान की विरासत के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है जो बहुत पहले ही मेरे द्वारा ठुकराया गया, हमेशा से मेरा कट्टर विरोधी शत्रु रहा है।

20 सित॰ 2018

क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो?

क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो?


हो सकता है कि परमेश्वर में तुम्हारे विश्वास की यात्रा एक या दो वर्ष पुरानी हो, और हो सकता है कि इन वर्षों से अधिक भी हो जिसमें तुमने कठिनाइयों को देखा हो; या शायद तुम कठिनाइयों में होकर ही न गए हो और इसके बजाय अत्यधिक अनुग्रह को प्राप्त किया हो। ऐसा भी हो सकता है कि तुमने न ही कठिनाइयों का और न ही अनुग्रह का अनुभव किया हो, परन्तु इसके बजाए बहुत ही साधारण सा जीवन व्यतीत किया हो। चाहे कुछ भी हो, फिर भी तुम परमेश्वर के एक अनुयायी हो, इसलिए आओ उसके पीछे चलने के बारे में बातचीत करें। हालांकि, मैं उन सभी को जो यह वचन पढ़ रहे हैं यह बताना चाहता हूं कि वे सभी जो परमेश्वर को स्वीकारते और उसका अनुसरण करते हैं, परमेश्वर का वचन उनके लिये है, परन्तु वृहत तौर पर सभी लोगों के लिए नहीं, इनमें वे भी हैं जो परमेश्वर का स्वीकार नहीं करते। यदि तुम यह विश्वास करते हो कि परमेश्वर भीड़ से बातचीत कर रहा है, संसार के सभी लोगों से, तो परमेश्वर के वचन का प्रभाव तुम्हारे जीवन पर कुछ भी नहीं पड़ेगा। इसलिए, तुम्हें इन सभी वचनों को अपने हृदय के समीप रखना है, और उनके प्रभाव से अपने आप को बाहर नहीं करना है। जो भी हो, आओ हमारे घरों में क्या होता है उस पर बातचीत करें।

17 सित॰ 2018

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो


मनुष्य के भीतर परमेश्वर के द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कार्य के चरण में, बाहर से यह लोगों के मध्य परस्पर क्रिया के समान प्रतीत होता है, जैसे कि यह मानव प्रबंधों के द्वारा उत्पन्न हुआ हो, या मानविक हस्तक्षेप के माध्यम से। परन्तु पर्दे के पीछे, कार्य का प्रत्येक चरण, और घटित होने वाला सब कुछ, शैतान के द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई बाज़ी होती है और परमेश्वर के लिए एक दृढ़ गवाह बने रहने के लिए लोगों से अपेक्षा की जाती है। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब की परीक्षा ली जा रही थी: पर्दे के पीछे, शैतान परमेश्वर के सामने शर्त लगा रहा था, और अय्यूब के साथ जो हुआ वह मनुष्यों के कार्य थे, और मनुष्यों का हस्तक्षेप था। हर कदम के पीछे जो परमेश्वर ने शैतान के साथ बाज़ी में परमेश्वर ने तेरे लिए उठाए—उन सभी के पीछे एक युद्ध था। उदाहरण के लिए, यदि तू अपने भाइयों और बहनों के प्रति पक्षपातपूर्ण भावना रखता है, तो तेरे पास वे शब्द होंगे जो तू कहना चाहता है—वे शब्द जो परमेश्वर को अप्रसन्न करने वाले हो सकते हैं—परन्तु यह तेरे लिए भीतरी तौर पर कठिन होगा, और इस क्षण में, तेरे भीतर एक युद्ध आरंभ होगा: क्या मैं बोलूँ या नहीं? यही एक युद्ध है। इस प्रकार से, सभी बातों में एक युद्ध होता है, और जब तेरे भीतर एक युद्ध चल रहा हो, तो भला हो तेरे वास्तविक सहयोग और पीड़ा का, परमेश्वर तेरे भीतर कार्य करता है। अंत में, अंदर तू मामले को एक तरफ रख पाता है और क्रोध स्वाभाविक रूप से समाप्त हो जाता है। परमेश्वर के साथ तेरे सहयोग का यही प्रभाव होता है। हर एक चीज़ जो तू करता है उसके प्रयासों के लिए तुझे एक कीमत चुकानी होती है। बिना वास्तविक कठिनाई के, तू परमेश्वर को संतुष्ट नहीं कर सकता है, यह परमेश्वर को संतुष्ट करने के कुछ करीब तक भी नहीं पहुंचता है, और तुम केवल खोखले नारे लगा रहे हो! क्या ये खोखली बातें परमेश्वर को संतुष्ट कर सकती है?

8 जून 2018

परमेश्वर के कथन "तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो?" What Is True Faith in God?(Hindi)

परमेश्वर के कथन "तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो?" What Is True Faith in God?(Hindi)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "इसलिए मैं कहता हूँ कि मनुष्य मुझ पर विश्वास करता है क्योंकि मैं बहुत अनुग्रह रखता हूँ, और प्राप्त करने के लिए और भी बहुत कुछ है। मेरे अनुग्रह के कारण यहूदी मुझ पर विश्वास करते थे, और जहाँ कहीं मैं जाता था मेरा अनुसरण करते थे। सीमित ज्ञान और अनुभव के ये निर्बुद्धि मनुष्य केवल उन चिन्हों और चमत्कारों की खोज करते थे जो मैं प्रकट करता था।

17 मार्च 2018

Hindi Christian Song | परमेश्वर पर भरोसे का सच्चा अर्थ

Hindi Christian Song | परमेश्वर पर भरोसे का सच्चा अर्थ

परमेश्वर में भरोसा तो बहुत लोग करते हैं, मगर उसके असली मायने कुछ ही समझते हैं, उसके दिल के साथ धड़कने के लिए क्या करें, वे नहीं समझते हैं। बहुतों ने सुना है ‘परमेश्वर और उसका काम’, मगर न उसे जानते हैं, ना उसका काम।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...