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6 जून 2019

जीवन और मृत्यु की एक जंग

चैंग मोयांग ज़ेंगज़ो सिटी, हेनान प्रदेश
"जब तू अपने देह के विरूद्ध विद्रोह करता है, तो तेरे भीतर निश्चय ही एक युद्ध होगा। शैतान कोशिश करेगा और तुझे इसका अनुसरण करने के लिए बाध्य करेगा, तुझसे देह की धारणाओं का अनुसरण करवाने के लिए कोशिश करेगा और देह के हितों को बनाए रखेगा—परन्तु परमेश्वर के वचन तुझे प्रबुद्ध करेंगे और तेरे भीतर रोशनी प्रदान करेंगे, और इस समय यह तुझ पर निर्भर करता है कि तू परमेश्वर का अनुसरण करे या फिर शैतान का अनुसरण करे। परमेश्वर लोगों को कहता है कि सत्य को अभ्यास में लाओ ताकि मुख्य तौर पर अपने भीतर की चीज़ों से ठीक तरह से निपट सको, अपने विचारों, और उनकी धारणाओं से निपट सको जो परमेश्वर के हृदय के अनुसार नहीं हैं।

5 जून 2019

मैं मसीह को देखने के अयोग्य हूँ

हुआनबाओ डैलिआन शहर, लिआओनिंग प्रांत
जब से मैंने सबसे पहले सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करना आरंभ किया, तब से मैं उन भाइयों और बहनों की हमेशा सराहना करता था जो मसीह की व्यक्तिगत सेवकाई हासिल कर सकते हैं, जो अपने स्वयं के कानों से उसके धर्मोपदेशों को सुन सकते हैं। अपने दिल में, मैं सोचता कि अगर भविष्य में एक दिन मैं मसीह के धर्मोपदेशों को सुन सकूँ तो यह कितना अद्भुत होगा, निस्संदेह उसे देखना तो और भी अधिक अद्भुत होगा। लेकिन बाद में, उसकी संगति को सुनकर, मुझे मेरे दिल की गहराई से यह महसूस होने लगा है कि मैं मसीह को देखने के योग्य नहीं हूँ।

4 जून 2019

मैं फरीसियों के मार्ग पर क्यों चली गई हूँ?

सुज़िंग शांग्ज़ी प्रांत
मैं एक घमण्डी और अकडू व्यक्ति हूँ, और पद मेरी कमज़ोरी रहा है। कई वर्षों से मैं प्रतिष्ठा और पद से बँधी रही हूँ और मैं स्वयं को इससे स्वतन्त्र करने में समर्थ नहीं हुई हूँ। बार-बार मुझे पदोन्नत और स्थानान्तरित किया गया है; मुझे मेरे पद में अनेक असफलताएँ मिली हैं और मार्ग में अनेक धक्के लगे हैं। अनेक वर्षों तक निपटाए जाने और शुद्ध किए जाने के पश्चात्, मुझे महसूस होता था कि मैं अपने पद को गम्भीरता से नहीं ले रही हूँ। मैं उस तरह का नहीं होना चाहती थी जैसा मैं अतीत में थी, और यह सोचती थी कि जब तक मैं एक अगुवा हूँ, तब तक मैं परमेश्वर के द्वारा सिद्ध की जा सकती हूँ, और यह कि यदि मैं एक अगुवा नहीं हूँ, तो मेरे पास कोई आशा नहीं है। मैं समझ गई थी कि जो कर्तव्य मैं पूर्ण कर रही थी, उस पर ध्यान दिए बिना, मुझे मात्र सत्य की खोज करने की आवश्यकता है और मुझे परमेश्वर के द्वारा सिद्ध कर दिया जाएगा; प्रतिष्ठा और पद के पीछे भागना मसीह-विरोधी का मार्ग है। अब मुझे महसूस होता है कि इस पर ध्यान दिए बिना कि मैं क्या कर्तव्य पूर्ण कर रही हूँ, मैं किसी पद का न होना स्वीकार कर सकती हूँ। यह स्वर्ग और पृथ्वी का कानून है कि सृष्टि अपनी भूमिका को पूरा करती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम्हें कहाँ रखा जाता है, तुम्हें परमेश्वर की व्यवस्थाओं को स्वीकार करना चाहिए।

3 जून 2019

अंततः मैं एक मनुष्य की तरह थोड़ा जीवन व्यतीत करता हूँ

ज़ियांग वांग सिचुआन प्रांत
मैं हर बार अपने हृदय की गहराई से ताड़ना महसूस करता हूँ, जब भी मैं देखता हूँ कि परमेश्वर के वचन कहते हैं कि: "क्रूर, निर्दयी मानवजाति! साँठगाँठ और साज़िश, आपस में धक्का-मुक्की, सम्मान और संपत्ति के लिए छीनाझपटी, एक-दूसरे का कत्ल करना-आखिर ये सब कब समाप्त होगा? परमेश्वर ने लाखों वचन कहे हैं, तब भी किसी को अभी तक अक़्ल नहीं आई है। वे अपने परिवार, और बेटों और बेटियों के वास्ते, आजीविका, हैसियत, अभिमान, और पैसों के लिए, कपड़ों के वास्ते, भोजन और देह क्रिया करते हैं-किसकी क्रियाएँ वास्तव में परमेश्वर के लिए हैं? यहाँ तक कि उनमें से भी जिनकी क्रियाएँ परमेश्वर के वास्ते हैं, मात्र थोड़े ही हैं जो परमेश्वर को जानते हैं। ऐसे कितने हैं जो अपने स्वयं के हितों के लिए काम नहीं करते हैं? ऐसे कितने हैं जो अपनी हैसियत बनाए रखने के लिए दूसरों का दमन नहीं करते हैं और दूसरों के साथ भेदभाव नहीं करते हैं? इस प्रकार, परमेश्वर को असंख्य बार बलात् मृत्युदंड दिया गया है, और अनगिनत क्रूर न्यायाधीशों ने परमेश्वर की निंदा की और, एक बार फिर उसे सलीब पर चढ़ा दिया गया" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए" से)।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...