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6 जून 2019

जीवन और मृत्यु की एक जंग

चैंग मोयांग ज़ेंगज़ो सिटी, हेनान प्रदेश
"जब तू अपने देह के विरूद्ध विद्रोह करता है, तो तेरे भीतर निश्चय ही एक युद्ध होगा। शैतान कोशिश करेगा और तुझे इसका अनुसरण करने के लिए बाध्य करेगा, तुझसे देह की धारणाओं का अनुसरण करवाने के लिए कोशिश करेगा और देह के हितों को बनाए रखेगा—परन्तु परमेश्वर के वचन तुझे प्रबुद्ध करेंगे और तेरे भीतर रोशनी प्रदान करेंगे, और इस समय यह तुझ पर निर्भर करता है कि तू परमेश्वर का अनुसरण करे या फिर शैतान का अनुसरण करे। परमेश्वर लोगों को कहता है कि सत्य को अभ्यास में लाओ ताकि मुख्य तौर पर अपने भीतर की चीज़ों से ठीक तरह से निपट सको, अपने विचारों, और उनकी धारणाओं से निपट सको जो परमेश्वर के हृदय के अनुसार नहीं हैं।

25 मई 2019

दुनिया के अंधकार और बुराई के स्रोत के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता

यांग ली वुहाई शहर, इनर मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र
जब मैं स्कूल में ही थी, तब मेरे पिता बीमार हो गए और उनका देहांत हो गया। उनकी मृत्यु के बाद, परिवार के दोनों पक्षों के चाचाओं/मामाओं ने, जिनकी मेरे पिता द्वारा अक्सर ही मदद की जाती थी, न केवल हमारा—मेरी माँ जिनके पास कमाई का कोई स्रोत नहीं था, मेरी दो बहनों और मुझ पर—कोई ध्यान नहीं दिया, बल्कि, इसके विपरीत, हमसे फायदा उठाने के लिए वे जो कुछ भी कर सकते थे, उन्होंने किया, यहाँ तक कि उस थोड़ी सी विरासत के लिए भी हमसे लड़ाई करते थे जो मेरे पिता पीछे छोड़ गए थे। मेरे रिश्तेदारों की बेरुख़ी और उन्होंने जो कुछ भी किया जिसकी मैं कभी उम्मीद भी नहीं कर सकती थी, उसके सामने मुझे बहुत पीड़ा महसूस होती थी और मैं इन रिश्तेदारों द्वारा प्रदर्शित विवेक के पूर्ण अभाव और निष्ठुरता से नफ़रत करने के अलावा और कुछ नहीं कर सकती थी, साथ ही मुझे मानव प्रकृति की अस्थिरता का भी ज्ञान हो रहा था। इसके बाद, जब भी मैं समाज में पारिवारिक सदस्यों के धन के पीछे एक-दूसरे से लड़ने, या धन के लिए लोगों के चोरी या हत्या करने की घटनाओं को देखती, तो मैं अक्सर विलाप किया करती थी कि आजकल दुनिया अत्यधिक अंधकार से भर गई है, कि लोगों के दिल वाकई बेईमान हो गए हैं और यह दुनिया वाकई बहुत अस्थिर है।

16 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग सात



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग सात


कोई भी इस तथ्य को नहीं बदल सकता है कि परमेश्वर मानव की नियति के ऊपर संप्रभुता रखता है
जो सब मैंने अभी कहा वह सुनने के बाद, क्या नियति के विषय में तुम लोगों का विचार बदला है? तुम सब मानव की नियति के ऊपर परमेश्वर की संप्रभुता के तथ्य को किस प्रकार समझते हो? इसे साधारण रूप से कहें, तो परमेश्वर के अधिकार के अधीन प्रत्येक व्यक्ति सक्रियता से या निष्क्रियता से उसकी संप्रभुता एवं इंतज़ामों को स्वीकार करता है, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वह किस प्रकार अपने जीवन के पथक्रम मे ंघर्ष करता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वह कितने टेढ़े-मेढ़े पथों पर चलता है, क्योंकि अंत में वह नियति की परिक्रमा-पथ पर वापस लौट आएगा जिसे सृष्टिकर्ता ने उस पुरुष या स्त्री के लिए चिन्हित किया है। यह सृष्टिकर्ता के अधिकार की अजेयता है, और वह रीति है जिसके तहत उसका अधिकार विश्व पर नियन्त्रण एवं शासन करता है।

15 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग छे



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग छे

4. सृष्टिकर्ता के प्रभुत्व के अधीन आ जाओ और शान्ति से मृत्यु का सामना करो
उस घड़ी जब किसी व्यक्ति का जन्म होता है, तब एक अकेला आत्मा इस पृथ्वी पर जीवन के विषय में अपने अनुभवऔर सृष्टिकर्ता के अधिकार के विषय में अपने अनुभव का प्रारम्भ करता है जिसे सृष्टिकर्ता ने उसके लिए व्यवस्थित किया है। कहने की आवश्यकता नहीं है, उस व्यक्ति, अर्थात् उस आत्मा, के लिए यह सृष्टिकर्ता की संप्रभुता के ज्ञान को अर्जित करने के लिए, और उसके अधिकार को जानने और व्यक्तिगत तौर पर इसका अनुभव करने के लिए सबसे उत्तम अवसर है। लोग नियति के नियमों के अधीन अपने जीवन को जीते हैं जिसे सृष्टिकर्ता के द्वारा उनके लिए व्यवस्थित किया गया है, और किसी भी न्यायसंगत व्यक्ति के लिए जिसके पास विवेक है, सृष्टिकर्ता की संप्रभुता को स्वीकार करना और पृथ्वी पर मनुष्यों के कई दशकों के जीवनक्रम के ऊपर उसके अधिकार को पहचानना कोई कठिन कार्य नहीं है कि उसे किया न जा सके।

14 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग पांच



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग पांच

मृत्यु: छठवां घटनाक्रम
इतनी अफरा-तफरी के पश्चात्, इतनी कुंठाओं एवं निराशाओं के पश्चात्, इतने सारे सुखों एवं दुखों और उतार एवं चढ़ावों के पश्चात्, इतने सारे अविस्मरणीय वर्षों के पश्चात्, बार बार ऋतुओं को परिवर्तित होते हुए देखने के पश्चात्, कोई व्यक्ति बिना ध्यान दिए ही जीवन के महत्वपूर्ण मील के पत्थरों को पार कर जाता है, और बिजली के चमकते ही वह स्वयं को अपने जीवन के ढलते हुए वर्षों में पाता है। समय के चिन्हों से उसके सारे शरीर पर मुहर लगाई गई है: वह अब आगे से सीधा खड़ा नहीं हो सकता है, घने काले बालों वाला सिर अब सफेद, एवं चमकदार हो गया है, चमकीली आंखें धुंधली हो गई हैं एवं अँधेरा छा गया है, चिकनी एवं कोमल त्वचा झुर्रीदार एवं दागदार हो गई है। उसकी सुनने की शक्ति कमज़ोर हो गई है, उसके दांत ढीले हो गए हैं एवं गिर गए हैं, उसकी प्रतिक्रियाएं धीमी हो गई हैं, उसकी गतिविधियां सुस्त हो गई हैं। इस मुकाम पर, उसने अपनी जवानी के जोशीले दिनों को पूरी तरह से अलविदा कह दिया है और अपने जीवन की सांझ की हलकी रौशनी में प्रवेश किया है: बुढ़ापा। इसके आगे, वह मृत्यु का सामना करेगा, किसी मानव के जीवन का अंतिम घटनाक्रम।

13 अप्रैल 2019

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग चार



स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III परमेश्वर का अधिकार (II) भाग चार

सन्तान: पाँचवां घटनाक्रम
विवाह करने के पश्चात्, कोई व्यक्ति अगली पीढ़ी का पालन-पोषण करने में लग जाता है। कोई यह नहीं कह सकता कि उसके पास कितने एवं किस प्रकार के संतान होंगे; यह किसी की नियति द्वारा निर्धारित होता है, सृष्टिकर्ता द्वारा पूर्वनिर्धारित होता है। यह पाँचवां घटनाक्रम है जिससे होकर किसी व्यक्ति को गुज़रना होगा।
यदि किसी व्यक्ति ने किसी और बच्चे की भूमिका को पूरा करने के लिए जन्म लिया है, तो वह किसी और के माता पिता की भूमिका पूरा करने के लिए अगली पीढ़ी का पालन-पोषण करता है। भूमिकाओं का यह स्थानान्तरण किसी व्यक्ति को अलग अलग दृष्टिकोण से जीवन के अलग अलग पहलुओं का अनुभव कराता है। साथ ही यह किसी व्यक्ति को जीवन के अनुभवों के विभिन्न संग्रह प्रदान करता है, जिसमें वह सृष्टिकर्ता की उसी संप्रभुता को जान पाता है, साथ ही साथ उस तथ्य को जान पाता है कि कोई भी व्यक्ति सृष्टिकर्ता के पूर्वनिर्धारण का अतिक्रमण या उसे पलट नहीं सकता है।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...