परमेश्वर का वचन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
परमेश्वर का वचन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

24 जुल॰ 2019

1. बाइबल केवल व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग में परमेश्वर के कार्य के दो चरणों का एक आलेख (रिकॉर्ड) है; यह परमेश्वर के कार्य की संपूर्णता का आलेख नहीं है।

XI. परमेश्वर और बाइबल के मध्य रहे सम्बन्ध की सच्चाई के पहलू पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-प्रभु यीशु की वापसी,परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर का वचन,परमेश्वर को जानना,

1. बाइबल केवल व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग में परमेश्वर के कार्य के दो चरणों का एक आलेख (रिकॉर्ड) है; यह परमेश्वर के कार्य की संपूर्णता का आलेख नहीं है।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (युहन्ना 16:12-13)।
"जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (प्रकाशितवाक्य 2:17)।
"देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है" (प्रकाशितवाक्य 5:5)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
पूरी बाइबिल में दो युगों का कार्य दर्ज किया गया है: एक व्यवस्था के युग का कार्य था, और एक अनुग्रह के युग का कार्य था। पुराने विधान (ओल्ड टेस्टामेंट) में इस्राएलियों के लिए यहोवा के वचनों को और इस्राएल में उसके कार्यों कोदर्ज किया गया है; नये विधान में यहूदिया में यीशु के कार्य को दर्ज किया गया है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के कार्य का दर्शन (2)" से

28 अप्रैल 2019

कलिसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन"

कलिसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: “मनुष्य से पृथक होने और फिर एक होने के आनन्द और दुःखों में, हम मनोभावों का आदान-प्रदान करने में असमर्थ होते है। ऊपर स्वर्ग और नीचे पृथ्वी पर पृथक हुए, मैं और मनुष्य नियमित रूप से मिलने में असमर्थ हैं। पूर्व की भावनाओं के विषाद से कौन मुक्त हो सकता है? कौन अतीत के बारे में स्मरण करने से अपने आप को रोक सकता है? कौन अतीत के मनोभावों की निरंतरता की आशा नहीं करेगा? कौन मेरी वापसी की अभिलाषा नहीं करेगा? कौन मनुष्य के साथ मेरे फिर से एक हो जाने की लालसा नहीं करेगा? मेरा हृदय अत्यंत अशांत है, और मनुष्य की आत्मा गहराई तक चिंतित हैं।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...