10 सित॰ 2018

परीक्षण माँग करते हैं आस्था की

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • परीक्षण माँग करते हैं आस्था की

  •  
  • I
  • इम्तहानों के वक्त कमज़ोर हो सकता है इन्सान,
  • आ सकते हैं मन में उसके गलत ख़्याल।
  • परमेश्वर की इच्छा को लेकर हो सकता है स्पष्टता का अभाव उसमें,
  • या कौन-सा मार्ग बेहतरीन है अमल वो जिस पर करे।
  • मगर अय्यूब की तरह होनी चाहिये परमेश्वर के कार्य में आस्था तुम्हारी,
  • कमज़ोर था वो, कोसा अपने जन्म के दिन को उसने,
  • मगर नकारा नहीं उसने कि देता है सबकुछ परमेश्वर,
  • कि ले भी लेता है सबकुछ परमेश्वर।
  • सहते हो जो भी शोधन परमेश्वर के वचनों से तुम,
  • आस्था तुम्हारी पूर्ण करता है परमेश्वर।
  • इसे छू न पाओ जब तुम, इसे देख न पाओ जब तुम,
  • तब चाहिये आस्था तुम्हारी। तब चाहिये आस्था तुम्हारी।
  • II
  • जब दिखे न कोई चीज़ तब आस्था चाहिये,
  • जब खुली आँखों से छिपी हो ये,
  • जब छोड़ न पाओ तुम धारणाएं अपनी,
  • जब स्पष्ट न हो तुम परमेश्वर के काम पर, तब तुम में आस्था हो,
  • और तब मजबूत रहकर तुम गवाही दो।
  • अय्यूब जब पहुँचा इस मुकाम पर,
  • तब परमेश्वर ने उससे बात की उसे दर्शन देकर।
  • आस्था ही कराती है परमेश्वर के दर्शन तुम्हें,
  • आस्था ही कराती है पूर्ण परमेश्वर से तुम्हें।
  • सहते हो जो भी शोधन परमेश्वर के वचनों से तुम,
  • आस्था तुम्हारी पूर्ण करता है परमेश्वर।
  • इसे छू न पाओ जब तुम, इसे देख न पाओ जब तुम,
  • तब चाहिये आस्था तुम्हारी। तब चाहिये आस्था तुम्हारी।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से

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