- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- परीक्षण माँग करते हैं आस्था की
- I
- इम्तहानों के वक्त कमज़ोर हो सकता है इन्सान,
- आ सकते हैं मन में उसके गलत ख़्याल।
- परमेश्वर की इच्छा को लेकर हो सकता है स्पष्टता का अभाव उसमें,
- या कौन-सा मार्ग बेहतरीन है अमल वो जिस पर करे।
- मगर अय्यूब की तरह होनी चाहिये परमेश्वर के कार्य में आस्था तुम्हारी,
- कमज़ोर था वो, कोसा अपने जन्म के दिन को उसने,
- मगर नकारा नहीं उसने कि देता है सबकुछ परमेश्वर,
- कि ले भी लेता है सबकुछ परमेश्वर।
- सहते हो जो भी शोधन परमेश्वर के वचनों से तुम,
- आस्था तुम्हारी पूर्ण करता है परमेश्वर।
- इसे छू न पाओ जब तुम, इसे देख न पाओ जब तुम,
- तब चाहिये आस्था तुम्हारी। तब चाहिये आस्था तुम्हारी।
- II
- जब दिखे न कोई चीज़ तब आस्था चाहिये,
- जब खुली आँखों से छिपी हो ये,
- जब छोड़ न पाओ तुम धारणाएं अपनी,
- जब स्पष्ट न हो तुम परमेश्वर के काम पर, तब तुम में आस्था हो,
- और तब मजबूत रहकर तुम गवाही दो।
- अय्यूब जब पहुँचा इस मुकाम पर,
- तब परमेश्वर ने उससे बात की उसे दर्शन देकर।
- आस्था ही कराती है परमेश्वर के दर्शन तुम्हें,
- आस्था ही कराती है पूर्ण परमेश्वर से तुम्हें।
- सहते हो जो भी शोधन परमेश्वर के वचनों से तुम,
- आस्था तुम्हारी पूर्ण करता है परमेश्वर।
- इसे छू न पाओ जब तुम, इसे देख न पाओ जब तुम,
- तब चाहिये आस्था तुम्हारी। तब चाहिये आस्था तुम्हारी।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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