- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- परमेश्वर मूल्यवान मानता है उनको
- जो उसकी सुनते और उसका आदेश मानते हैं
- I
- परमेश्वर को नहीं फर्क पड़ता हो मनुष्य नम्र या महान।
- जब तक वह सुनता है परमेश्वर की,
- मानता है परमेश्वर के आदेश और जो सौंपता है परमेश्वर,
- जुड़ा रहता है उसके कार्य, उसकी योजना और उसकी इच्छा से,
- जिससे कि उसकी इच्छा और योजना बढ़ सकें बिना अड़चन के,
- ऐसे कार्य हैं योग्य, योग्य परमेश्वर की स्मृति के,
- और हैं योग्य प्राप्ति के, प्राप्ति उसके आशीष की।
- परमेश्वर ऐसे लोगों को सहेजता, और संजोता है उनके कार्यों को,
- और उनके ह्रदय और स्नेह को जो हैं उसके लिए।
- यही है मनोवृत्ति परमेश्वर की।
- II
- परमेश्वर को नहीं फर्क पड़ता हो मनुष्य नम्र या महान।
- जब तक वह सुनता है परमेश्वर की,
- मानता है परमेश्वर के आदेश और जो सौंपता है परमेश्वर,
- जुड़ा रहता है उसके कार्य, उसकी योजना और उसकी इच्छा से,
- जिससे कि उसकी इच्छा और योजना बढ़ सकें बिना अड़चन के,
- ऐसे कार्य हैं योग्य, योग्य परमेश्वर की स्मृति के,
- और हैं योग्य प्राप्ति के, प्राप्ति उसके आशीष की।
- परमेश्वर ऐसे लोगों को सहेजता, और संजोता है उनके कार्यों को,
- और उनके ह्रदय और स्नेह को जो हैं उसके लिए।
- यही है मनोवृत्ति परमेश्वर की।
- यही है मनोवृत्ति परमेश्वर की।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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