25 अग॰ 2018

हे परमेश्वर, तेरे प्यार के काबिल नहीं मैं


  • आराधना गीत
  • हे परमेश्वर, तेरे प्यार के काबिल नहीं मैं
  •  
  • I
  • इतने आँसू बहाए ख़ुद की ख़ातिर,
  • इतना दुख सहा मैंने ख़ुद की ख़ातिर।
  • कितने ही लम्बे रास्तों पर चला हूँ मैं ख़ुद की ख़ातिर।
  • कितनी बार गिना है नफ़ा-नुकसान मैंने।
  • कितनी बार ख़्वाहिशें चूर-चूर हुई हैं।
  • कितनी बार सोचा छोड़ दूँ परमेश्वर को मैं।
  • मगर अपनी उंगलियों में लेकर उंगलियां मेरी,
  • उसकी मोहब्बत मुझे कस के थाम लेती है,
  • निष्क्रियता से दूर मुझे ले जा रही है,
  • एक बार में एक कदम दूर मुझे ले जा रही है।
  • कितनी बार कोशिशें करता हूँ जाने की मगर,
  • उसकी मोहब्बत मुझे कस के थाम लेती है।
  • खंडित कर देते हैं मेरी रूह को वचन उसके,
  • शर्म से मैं कहीं मुंह छुपा नहीं पाता हूँ।
  • II
  • दिल में शक लिये अक्सर भटका हूँ मैं।
  • शैतान के प्रलोभन को रोक नहीं पाया हूँ।
  • कितनी बार गया हूँ शोहरत और ओहदे के पीछे।
  • बग़ैर मलाल किये, कभी छोड़ने की कोशिश न की।
  • हे परमेश्वर, यही हूँ मैं! तेरी मोहब्बत या उद्धार के मैं काबिल नहीं हूँ।
  • अगर तेरा वचन राह न दिखाता, तो एक कदम भी मैं चल न पाता।
  • निष्क्रियता से दूर मुझे ले जा रही है,
  • एक बार में एक कदम दूर मुझे ले जा रही है।
  • कितनी बार कोशिशें करता हूँ जाने की मगर,
  • उसकी मोहब्बत मुझे कस के थाम लेती है।
  • देता है तू अपना सत्य और जीवन मुझे। बचा लिया है अब तूने मुझे।
  • III
  • हे परमेश्वर! अब न कभी छोड़ूँगा मैं तुझे,
  • न निष्क्रिय होऊँगा, न पीछे लौटूँगा मैं।
  • सत्य को अमल में लाऊँगा, जीऊँगा तेरे वचन के अनुसार मैं।
  • हे परमेश्वर! ताड़ना दे, न्याय कर, शुद्ध कर,
  • निर्मल कर उद्धार के लिये मुझे।
  • हे परमेश्वर! न कभी निष्क्रिय होऊँगा, न पीछे लौटूँगा मैं।
  • सत्य पाने के लिये देह त्याग दूँगा और यातना सह लूँगा मैं।
  • हे परमेश्वर! दे मुझे ताड़ना और न्याय अपना, करूँ प्रार्थना मैं।
  • साफ़ और ज़बर्दस्त गवाही देने को तैयार हूँ मैं।
  • निष्क्रियता से दूर मुझे ले जा रही है,
  • एक बार में एक कदम दूर मुझे ले जा रही है।
  • निष्क्रियता से दूर मुझे ले जा रही है,
  • एक बार में एक कदम दूर मुझे ले जा रही है।
  • कितनी बार कोशिशें करता हूँ जाने की मगर,
  • उसकी मोहब्बत मुझे कस के थाम लेती है।
  • देता है तू अपना सत्य और जीवन मुझे। बचा लिया है अब तूने मुझे।
  •  
  • "मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...