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15 दिस॰ 2018

राज्य का युग वचन का युग है भाग एक


राज्य के युग में, परमेश्वर नए युग की शुरूआत करने, अपने कार्य के साधन बदलने, और संपूर्ण युग में काम करने के लिये अपने वचन का उपयोग करता है। वचन के युग में यही वह सिद्धांत है, जिसके द्वारा परमेश्वर कार्य करता है। वह देहधारी हुआ ताकि विभिन्न दृष्टिकोणों से बातचीत कर सके, मनुष्य वास्तव में परमेश्वर को देख सके, जो देह में प्रकट होने वाला वचन है, और उसकी बुद्धि और आश्चर्य को जान सके। उसने यह कार्य इसलिए किये ताकि वह मनुष्यों को जीतने, उन्हें पूर्ण बनाने और ख़त्म करने के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से हासिल कर सके। वचन के युग में वचन को उपयोग करने का यही वास्तविक अर्थ है।

2 दिस॰ 2018

पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक



यदि आप परमेश्वर के उपयोग के लिए उपयुक्त होने की कामना करते हैं; तो आपको उस कार्य के बारे में जानना होगा जिसे उसने पहले किया था (नए एवं पुराने नियम में); और, इसके अतिरिक्त, आपको उसके वर्तमान कार्य को जानना होगा। कहने का तात्पर्य है, आपको 6,000 सालों से ऊपर के परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना होगा। यदि आपको सुसमाचार फैलाने के लिए कहा जाये, तो आप परमेश्वर के कार्य को जाने बिना ऐसा करने में सक्षम नहीं होंगे।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...