व्यावहारिक परमेश्वर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
व्यावहारिक परमेश्वर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

3 दिस॰ 2018

पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो



वे अवस्थाएँ ऐसी ही हैं जिन्हें मनुष्य को सिद्ध किए जाने के बाद हासिल करना होगा। यदि तू इतना कुछ हासिल नहीं कर सकता है, तो तू एक सार्थक जीवन नहीं बिता सकता है। मनुष्य शरीर में रहता है, इसका मतलब है कि वह मानवीय नरक में रहता है, और परमेश्वर के न्याय और उसकी ताड़ना के बगैर, मनुष्य शैतान के समान ही गन्दा है। मनुष्य पवित्र कैसे हो सकता है? पतरस ने यह विश्वास किया कि परमेश्वर की ताड़ना और उसका न्याय मनुष्य की सब से बड़ी सुरक्षा और सब से महान अनुग्रह है।

1 दिस॰ 2018

पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो



शुरुआत में, जब यीशु ने आधिकारिक रूप से अपनी सेवकाई को क्रियान्वित नहीं किया था, उन चेलों के समान जिन्होंने उनका अनुसरण किया था, वह भी कई बार सभाओं में सम्मिलित हुआ, और आत्मिक भजनों को गाया, प्रशंसा की, और मन्दिर में पुराना नियम पढ़ा। जब उसने बपतिस्मा लिया और बाहर आया उसके बाद, आत्मा आधिकारिक रूप से उस पर उतरा और कार्य करना शुरू किया, और अपनी पहचान एवं उस सेवकाई को प्रकट किया जिसे वह शुरू करनेवाला था।

25 मई 2018

परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर

परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "कुछ लोगों में अपनी ओर ध्यान खींचने की विशेष प्रवृत्ति होती है। अपने भाई-बहनों की उपस्थिति में, वह कहता है कि वह परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ है, परंतु उनकी पीठ पीछे, वह सत्य का अभ्यास नहीं करता है और पूरी तरह से अन्यथा करता है।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...