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14 दिस॰ 2018

परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक


आरंभ में परमेश्वर विश्राम कर रहा था। उस समय पृथ्वी पर कोई मनुष्य या अन्य कुछ भी नहीं था, और परमेश्वर ने किसी भी तरह का कोई कार्य नहीं किया था। परमेश्वर ने अपने प्रबंधन के कार्य को केवल तब आरंभ किया जब एक बार मानवजाति अस्तित्व में आ गई और एक बार जब मानव जाति भ्रष्ट कर दी गई। इसके बाद से, परमेश्वर ने अब और विश्राम नहीं किया बल्कि इसके बजाय उसने स्वयं को मनुष्यजाति के बीच व्यस्त रखना आरंभ कर लिया। यह मनुष्यों की भ्रष्टता की वजह से था कि परमेश्वर को उसके विश्राम से उठा दिया गया, और यह प्रधान स्वर्गदूत के विद्रोह के कारण भी था कि जिसने परमेश्वर को उसके विश्राम से उठा दिया।

11 दिस॰ 2018

तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो


सबसे पहले, परमेश्वर ने आदम और हव्वा का सृजन किया, और उसने साँप का भी सृजन किया। सभी चीज़ों में साँप सर्वाधिक विषैला था; उसकी देह में विष था, और शैतान उस विष का उपयोग करता था। यह साँप ही था जिसने पाप करने के लिए हव्वा को प्रलोभित किया। हव्वा के बाद आदम ने पाप किया, और तब वे दोनों अच्छे और बुरे के बीच भेद करने में समर्थ हो गए थे। यदि यहोवा जानता था कि साँप हव्वा को प्रलोभित करेगा और हव्वा आदम को प्रलोभित करेगी, तो उसने उन सबको एक ही वाटिका के भीतर क्यों रखा?

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...