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21 मई 2018

अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है (III) परमेश्वर का अधिकार (II)" (भाग तीन)

अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है (III) परमेश्वर का अधिकार (II)" (भाग तीन)

इस वीडियो में परमेश्वर के वचन "वचन देह में प्रकट हुआ से आगे जारी" पुस्तक से हैं। इस वीडियो की सामग्री: स्वतन्त्रता: तीसरा घटनाक्रम 1. स्वतन्त्र होने के पश्चात्, कोई व्यक्ति सृष्टिकर्ता की संप्रभुता का अनुभव करना आरम्भ कर देता है 2. अपने माता पिता को छोड़ना और जीवन के रंगमंच में अपनी भूमिका अदा करने के लिए ईमानदारी से शुरुआत करना विवाह: चौथा घटनाक्रम

16 अक्टू॰ 2017

परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना

परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना

प्रभु यीशु मसीह के करोड़ों अनुयायियों के समान हम बाइबल की व्यवस्थाओं और आज्ञाओं का पालन करते हैं, प्रभु यीशु मसीह के विपुल अनुग्रह का आनंद लेते हैं, और प्रभु यीशु मसीह के नाम पर एक साथ इकट्ठे होते हैं, प्रार्थना, प्रशंसा और सेवा करते हैं—और यह सब हम प्रभु की देखभाल और सुरक्षा के अधीन करते हैं। हम कई बार निर्बल, और कई बार बलवान होते हैं। हम विश्वास करते हैं कि हमारे सभी कार्य प्रभु की शिक्षाओं के अनुसार हैं। यह कहने की आवश्यकता नहीं, कि तब, हम स्वयं भी स्वर्ग में पिता की इच्छा के अनुसार आज्ञाकारिता के मार्ग पर चलने में विश्वास करते हैं। हम प्रभु यीशु के लौटने की, प्रभु यीशु के महिमामय आगमन की, पृथ्वी पर हमारे जीवन के अंत की, परमेश्वर के राज्य के प्रकट होने की, और उन सब बातों की अभिलाषा करते हैं जिनकी प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में भविष्यवाणी की गई थी: प्रभु आता है, आपदा लाता है, भलों को पुरस्कार और दुष्टों को दण्ड देता है, एवं उन सभी को जो उनका अनुसरण करते हैं और उनकी वापसी का स्वागत करते हैं, प्रभु से मिलने के लिए हवा में ले जाता है। हर बार जब हम इस बारे में सोचते हैं, तो हम भावनाओं से अभिभूत हो जाते हैं। हम आभारी हैं कि हम अंत के दिनों में जन्मे हैं, और प्रभु के आगमन के गवाह बनने के लिए बहुत सौभाग्यशाली हैं। यद्यपि हमने उत्पीड़न सहा है, परन्तु वह “बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा” के बदले में है; यह कितना बढ़िया आशीष है! यह समस्त अभिलाषा और प्रभु द्वारा प्रदान किया गया अनुग्रह, हमें प्रार्थना में अक्सर शांत बनाता है, और अक्सर हमें एक साथ लाता है। शायद अगले वर्ष, शायद कल, या शायद उससे भी पहले, जब लोग उसकी आशा नहीं करते हैं; प्रभु अचानक आएगा, और लोगों के उस समूह के बीच प्रकट होगा जो मनोयोग पूर्वक उनकी प्रतीक्षा करता आ रहा है।

12 अक्टू॰ 2017

जो सचमुच में आज्ञाकारी हैं वे निश्चय ही परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे

जो सचमुच में आज्ञाकारी हैं वे निश्चय ही परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे

पवित्र आत्मा का काम दिन ब दिन बदलता जाता है, हर एक कदम के साथ ऊँचा उठता जाता है; आने वाले कल का प्रकाशन आज से भी कहीं ज़्यादा ऊँचा हो जाता है, कदम दर कदम और ऊपर चढ़ता जाता है। जिस कार्य के द्वारा परमेश्वर मनुष्य मनुष्य को सिद्ध करता है वह ऐसा ही है। यदि मनुष्य उस गति से चल न पाए, तो उसे किसी भी समय छोड़ा जा सकता है। यदि मनुष्य के पास आज्ञाकारी हृदय न हो, तो वह अंत तक अनुसरण नहीं कर सकता है। पुराना युग गुज़र गया है; अब एक नया युग है। और नए युग में, नया कार्य करना होगा। विशेषकर अंतिम युग में जहाँ मनुष्य को सिद्ध किया जाएगा, परमेश्वर पहले से ज़्यादा तेजी से नया काम करेगा। इसलिए, अपने हृदय में आज्ञाकारिता को धारण किए बिना, मनुष्य के लिए परमेश्वर के कदमों के निशानों के पीछे पीछे चलना कठिन होगा। परमेश्वर नियमों में बना नहीं रहता है, न ही वह अपने कार्य के किसी स्तर को अपरिवर्तनीय मानता है। बल्कि, परमेश्वर के द्वारा किया गया कार्य हमेशा नया और हमेशा ऊँचा होता है। उसका कार्य हर एक कदम के साथ और भी अधिक व्यावहारिक होता जाता है, और मनुष्य की वास्तविक जरूरतों के और भी अधिक अनुरूप होता जाता है। जब मनुष्य इस प्रकार के कार्य का अनुभव करता है केवल तब ही वह अपने स्वभाव के अंतिम रूपान्तरण को हासिल कर पाता है। जीवन के विषय में मनुष्य का ज्ञान और अधिक ऊँचा होता जाता है, इसलिए परमेश्वर का काम भी और अधिक ऊँचा होता जाता है।

11 अक्टू॰ 2017

छुटकारे के युग में कार्य से सम्बन्धित सत्य

छुटकारे के युग में कार्य से सम्बन्धित सत्य

मेरी सम्पूर्ण प्रबन्धन योजना, जो छः हज़ार सालों तक फैली हुई है, तीन चरणों या तीन युगों को शामिल करती हैः पहला, व्यवस्था का युग; दूसरा, अनुग्रह का युग (जो छुटकारे का युग भी है); और अंत में राज्य का युग। प्रत्येक युग की प्रकृति के अनुसार मेरा कार्य इन तीनों युगों में अलग-अलग है, परन्तु प्रत्येक अवस्था में यह मनुष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप है - या बल्कि, यह उन छलकपटों के अनुसार बदलता है जो शैतान मुझ से युद्ध करने के लिए काम में लाता है। मेरे कार्य का उद्धेश्य शैतान को हराना है, मेरी बुद्धि और सर्वशक्तिमत्ता को प्रदर्शित करना, शैतान के सभी छलकपटों को उजागर करना और उसके द्वारा समस्त मानवता को बचाना है, जो उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन जीवन जीती है। यह मेरी बुद्धि और सर्व-शक्तिमानता को दिखाने के लिए है जबकि उसके साथ-साथ शैतान की भयानकता को प्रकट करने के लिए है। इसके अतिरिक्त, यह मेरी रचनाओं को अच्छे और बुरे के बीच में अन्तर करना सिखाने के लिए है, यह पहचानना सिखाने के लिए है कि मैं सभी चीज़ों का शासक हूँ, यह देखना सिखाने के लिए है कि शैतान मानवता का दुश्मन है, और अधम से भी अधम है, दुष्ट है, और अच्छे एवं बुरे, सत्य एवं झूठ, पवित्रता एवं गन्दगी, महानता एवं नीचता के बीच दिन के समान स्पष्ट अंतर करना सिखाने के लिए है।

10 अक्टू॰ 2017

व्यवस्था के युग में कार्य

व्यवस्था के युग में कार्य

वह कार्य जो यहोवा ने इस्राएलियों में किया, उसने पृथ्वी पर परमेश्वर के मूल स्थान, उसके पवित्र स्थान को स्थापित किया जहाँ वह उपस्थित था। उसने अपने कार्य को इस्राली लोगों तक ही सीमित रखा। आरम्भ में, उसने इस्राएल के बाहर काम नहीं किया; उसके बजाए, उसने ऐसे लोगों को चुना जिन्हें उसने अपने कार्यक्षेत्र को सीमित रखने के लिए उचित पाया। इस्राएल वह जगह है जहाँ परमेश्वर ने आदम और हव्वा की रचना की, और उस जगह की धूल से यहोवा ने मनुष्य को बनाया; यह पृथ्वी पर उसके कार्य का आधार था। इस्राएली, जो नूह और आदम के वंशज हैं, पृथ्वी पर यहोवा के कार्य की बुनियाद थे।

8 अक्टू॰ 2017

जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं

जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं

देहधारी परमेश्वर के कार्य में दो भाग शामिल हैं। जब सबसे पहली बार उसने देह धारण किया, तो लोगों ने उस पर विश्वास नहीं किया या उसे नहीं पहचाना, और यीशु को क्रूस पर ठोंक दिया। दूसरी बार भी लोगों ने उस पर विश्वास नहीं किया, उसे बहुत कम पहचाना, और एक बार फिर से यीशु को क्रूस पर ठोंक दिया। क्या मनुष्य परमेश्वर का बैरी नहीं हैं? यदि मनुष्य उसे नहीं जानता है, तो वह परमेश्वर का अंतरंग कैसे हो सकता है? और वह कैसे परमेश्वर की गवाही देने के योग्य हो सकता है? परमेश्वर को प्यार करना, परमेश्वर की सेवा करना, महिमा बढ़ाना - क्या ये कपटपूर्ण झूठ नहीं हैं? यदि आप अपने जीवन को इन अवास्तविक, अव्यवहारिक बातों के प्रति समर्पित करते हैं, तो क्या आप व्यर्थ में श्रम नहीं करते हैं? जब आप परमेश्वर को जानते तक नहीं हैं तो आप परमेश्वर के अंतरंग कैसे हो सकते हैं? क्या इस प्रकार की खोज अज्ञात और काल्पनिक नहीं है? क्या यह कपटपूर्ण नहीं हैं? कोई परमेश्वर का अंतरंग कैसे हो सकता है? परमेश्वर का अंतरंग होने का व्यवहारिक महत्व क्या है? क्या आप परमेश्वर के आत्मा के अंतरंग हो सकते हैं? क्या आप देख सकते हैं कि पवित्रात्मा कितना महान और उच्च है? किसी अदृश्य, अमूर्त परमेश्वर का अंतरंग होना - क्या यह अज्ञात और काल्पनिक नहीं है? इस प्रकार की खोज का व्यावहारिक महत्व क्या है? क्या ये सभी कपटपूर्ण झूठ नहीं हैं? आप जिस चीज की खोज करते हैं वह है परमेश्वर का अंतरंग बनना, फिर भी वास्तव में आप शैतान के छोटे से पालतू कुत्ते हैं, क्योंकि आप परमेश्वर को नहीं जानते हैं और अस्तित्वहीन “सभी चीजों के परमेश्वर” की खोज करते हैं, जो कि अदृश्य, अमूर्त और आपकी अपनी धारणाओं का है। अस्पष्टता से कहा जाए, तो इस प्रकार का “परमेश्वर” शैतान है, और व्यावहारिक रूप से कहा जाए तो यह आप स्वयं हैं।

5 अक्टू॰ 2017

परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है

परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है

परमेश्वर भिन्न-भिन्न युगों के अनुसार अपने वचन कहता है और अपना कार्य करता है, तथा भिन्न-भिन्न युगों में, वह भिन्न-भिन्न वचन कहता है। परमेश्वर नियमों से नहीं बँधता है, और एक ही कार्य को दोहराता नहीं है, और न अतीत की बातों को लेकर विषाद करता है; वह ऐसा परमेश्वर है जो सदैव नया है, कभी पुराना नहीं होता है, और वह हर दिन नये वचन बोलता है। जिस चीज का आज पालन किया जाना चाहिए उसका तुम्हें पालन करना चाहिए; यही मनुष्य की जिम्मेवारी और कर्तव्य है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि अभ्यास परमेश्वर की वर्तमान रोशनी और वास्तविक वचनों के आस-पास केन्द्रित हो। परमेश्वर नियमों का पालन नहीं करता है, और अपनी बुद्धि और सर्व-सामर्थ्य को प्रकट करने के लिए विभिन्न परिप्रेक्ष्यों से बोलने में सक्षम है। यह मायने नहीं रखता है कि वह आत्मा के परिप्रेक्ष्य से बोलता है, या मनुष्य के, या फिर किसी तीसरे व्यक्ति के परिप्रेक्ष्य से बोलता है—परमेश्वर सदैव परमेश्वर है, उसके मनुष्य के परिप्रेक्ष्य से बोलने की वजह से तुम यह नहीं कह सकते कि वह परमेश्वर नहीं है। परमेश्वर के विभिन्न परिप्रेक्ष्यों से बोलने के फलस्वरूप कुछ लोगों में कुछ धारणाएँ उभर आयी हैं। ऐसे लोगों में परमेश्वर का ज्ञान नहीं है और उसके कार्य का ज्ञान नहीं है। यदि परमेश्वर सदैव किसी एक ही परिप्रेक्ष्य से बोलता, तो क्या मनुष्य परमेश्वर के लिए भी कुछ नियम निर्धारित नहीं कर देता? क्या परमेश्वर मनुष्यों को इस तरह से कार्य करने की अनुमति दे सकता था? इस बात की परवाह किए बिना कि परमेश्वर किस परिप्रेक्ष्य से बोलता है, प्रत्येक के लिए परमेश्वर का अपना लक्ष्य है। यदि परमेश्वर ने सदैव आत्मा की दृष्टि से बोला होता, तो क्या तुम उसके साथ जुड़ने में सक्षम होते? इसलिए, तुम्हें अपने वचन प्रदान करने और वास्तविकता में तुम्हारा मार्गदर्शन करने के लिए वह तीसरे व्यक्ति के रूप में बोलता है। परमेश्वर जो कुछ भी करता है, उपयुक्त होता है। संक्षेप में, यह सब कुछ परमेश्वर द्वारा किया जाता है और तुम्हें इस बारे में जरा भी संदेह नहीं करना चाहिये। बशर्ते कि वह परमेश्वर है, तब इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है कि वह किस परिप्रेक्ष्य से बोलता है, वह तब भी परमेश्वर ही है। यह एक अडिग सत्य है।

4 अक्टू॰ 2017

एक वास्तविक मनुष्य का क्या अर्थ है

एक वास्तविक मनुष्य का क्या अर्थ है

मनुष्य का प्रबंध करना मेरा कार्य है, और जब मैंने संसार को बनाया मेरे द्वारा उसे जीत लिया जाना, उस से भी अधिक पूर्व निर्धारित था। लोग नहीं जानते हैं कि अंतिम दिनों में मैं उन्हें पूरी तरह से जीत लूँगा, और वे इसके बारे में भी अनजान हैं कि मानव जाति के अवज्ञाकारीसदस्यों को जीत लेना ही शैतान को मेरे द्वारा हराने का प्रमाण है। परन्तु मैंने अपने शत्रु को पहले से ही बता दिया था जब उसने मेरे साथ संघर्ष किया कि मैं उन सभी का जीतने वाला बनूँगा जो शैतान के द्वारा ले लिए गए थे और बहुत पहले उसकी संतान बन गए थे, और उसके वफादार सेवक उसके घर की निगरानी करने लगे थे। जीतने का मूल अर्थ है - हराना, अपमानित करना जिस तरह इस्रायली लोग इसे बयान करते हैं, वह है पूरी तरह से हराना, विनाश करना, और एक व्यक्ति को इतना अयोग्य कर देना कि आगे से वह मेरा विरोध न कर सके। परन्तु आज जैसे कि आप लोगों के मध्य में यह उपयोग किया जाता है, इसका अर्थ है जीतना। आपको आपको पता होना चाहिये कि मैं मानवजाति के अंदर से बुराई को पूरी तरह से समाप्त और नष्ट कर देना चाहता हूं, ताकि वह मेरे काम में बाधा डालने की तो बात ही क्या, वह मेरा विरोध तक भी न कर सके। इस प्रकार, जहाँ तक कि लोग का सवाल है, इसका अर्थ जीतना ही है। शब्द का संकेतार्थ चाहे कुछ भी हो, मेरा कार्य मानव जाति को हराना है। क्योंकि मानव जाति सचमुच में मेरे प्रबंध में एक अनुबंध है, परन्तु सही कहा जाये तोमानव जाति कुछ और नहीं मेरी शत्रु ही है।

1 अक्टू॰ 2017

वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं

वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं


परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य, मनुष्यों में कैसा प्रभाव प्राप्त किया जाना है, और मनुष्य के प्रति परमेश्वर की इच्छा क्या है, को समझना यही सब बातें हर उस व्यक्ति को उपार्जित करनी चाहिये जो परमेश्वर का अनुसरण करता है। अभी सभी मनुष्यों में जिस चीज का अभाव है, वह है परमेश्वर के कार्य का ज्ञान। मनुष्य न बूझता है और न समझता है कि वास्तव में कौन सी चीज मनुष्य में परमेश्वर के कर्म, परमेश्वर के समस्त कार्य को, और सृष्टि की रचना के बाद से परमेश्वर की इच्छा, को निर्मित करती है। यह अपर्याप्तता न केवल समस्त धार्मिक जगत में देखी जाती है है, बल्कि इसके अलावा परमेश्वर के सभी विश्वासियों में भी देखी जाती है। जब वह दिन आता है कि आप वास्तव में परमेश्वर को देखते हैं और उसकी बुद्धि को समझते हैं; जब आप परमेश्वर के सब कर्मों को देखते हैं, और पहचानते हैं कि परमेश्वर क्या हैं और उसके पास क्या है; जब आप उसकी विपुलता, बुद्धि, चमत्कार, और मनुष्य में उसके समस्त कार्य को निहारते हैं, तब उस दिन होगा कि आपने परमेश्वर में सफल विश्वास को प्राप्त कर लिया होगा। जब परमेश्वर को सर्वव्यापी और अत्यधिक विपुल कहा जाता है, तब सर्वव्यापी से क्या अभिप्राय है? और विपुलता से क्या अभिप्राय है? यदि आप इस बात को नहीं समझते हैं, तो आप परमेश्वर के विश्वासी नहीं माने जा सकते हैं। मैं क्यों कहता हूँ कि धार्मिक जगत के वे लोग परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते हैं और कुकर्मी हैं, जो उसी प्रकार के हैं जैसा शैतान है? जब मैं कहता हूँ कि वे कुकर्मी हैं, तो ऐसा इसलिये कहता हूँ क्योंकि वे परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझते हैं अथवा उसकी बुद्धि को नही देखते हैं। परमेश्वर उन पर कभी भी अपने काम को प्रकट नहीं करता है; वे अंधे व्यक्ति हैं, वे परमेश्वर के कर्मों को नहीं देखते हैं। वे परमेश्वर द्वारा परित्यक्त हैं और उन्हें परमेश्वर की देखभाल और सुरक्षा बिल्कुल भी प्राप्त नहीं है, और पवित्र आत्मा का काम तो और भी कम प्राप्त है। वे जो परमेश्वर के काम के बिना हैं, वे कुकर्मी हैं और परमेश्वर के विरोध में खड़े हैं।

30 सित॰ 2017

परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है

परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है


पिछले दो युगों के कार्यों में से एक चरण का कार्य इस्राएल में सम्पन्न हुआ; दूसरा यहूदिया में हुआ। सामान्य तौर पर कहा जाए तो, इस कार्य का कोई भी चरण इस्राएल को छोड़ कर नहीं गया; कार्य के ये वे चरण थे जो विशेष चुने हुए लोगों के मध्य में किये गए। इस प्रकार से, इस्राएलियों के दृष्टिकोण से, यहोवा परमेश्वर केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है।यहूदिया में यीशु के कार्य के कारण और उसके क्रूस पर चढ़ने के कार्य को पूरा करने के कारण, यहूदियों के दृष्टिकोण से, यीशु यहूदियों का उद्धारकर्ता है। वह केवल यहूदियों का राजा है, अन्य लोगों का राजा नहीं है; वह अंग्रेजों का उद्धार करने वाला प्रभु नहीं है, न ही अमरीका के लोगों का उद्धार करने वाला प्रभु है, परन्तु वह वो प्रभु है जो इस्राएलियों का उद्धार करता है, और इस्राएल में वह केवल यहूदियों का उद्धार करता है। वास्तव में, परमेश्वर सभी वस्तुओं का स्वामी है। वह सम्पूर्ण सृष्टि का परमेश्वर है। वह न केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है, और वह न केवल यहूदियों का परमेश्वर है; वह सम्पूर्ण सृष्टि का परमेश्वर है। उसके कार्य के पिछले दो चरण इस्राएल में पूर्ण हुए हैं, और इस प्रकार से, लोगों के मध्य में कुछ धारणाओं ने आकार ले लिया है। लोग सोचते हैं कि यहोवा इस्राएल में अपना कार्य कर रहा था और स्वयं यीशु ने भी यहूदिया में अपना कार्य किया-इसके अतिरिक्त, यह देहधारण था जिसके माध्यम से वह यहूदिया में अपना कार्य कर रहा था- और जो कुछ भी मामला हो, यह कार्य इस्राएल से आगे नहीं फैला। वह मिस्रियों के साथ कार्य नहीं कर रहा था; न ही वह भारतीयों के साथ कार्य कर रहा था; वह केवल इस्राएलियों के साथ कार्य कर रहा था; लोग इस प्रकार से कई धारणाएँ बनाते हैं; इसके अलावा, वे परमेश्वर के कार्य की एक निर्धारित दायरे में योजना बनाते हैं।

29 सित॰ 2017

जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं


जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं

परमेश्वर की गवाही देने के लिए और बड़ा लाल अजगर को शर्मिन्दा करने के लिए आपके पास एक नियम, एक शर्त होनी चाहिएः अपने दिल में आपको परमेश्वर को प्रेम करना चाहिए और परमेश्वर के वचनों में प्रवेश करना चाहिए। यदि आप परमेश्वर के वचनों में प्रवेश नहीं करेंगे तो आपके पास शैतान को शर्मिन्दा करने का कोई तरीका नहीं होगा। अपने जीवन में विकसित होने के द्वारा, आप बड़े लाल अजगर को छोड़ते हैं और उसका तिरस्कार करते हैं, और केवल तभी लाल बड़ा अजगर पूरी तरह से शर्मिन्दा होगा। जितना अधिक आप परमेश्वर के वचनों को अभ्यास में लाएँगे, उतना ही अधिक परमेश्वर के प्रति आपके प्रेम का सबूत होगा और उस बड़े लाल अजगर के लिए घृणा होगी; जितना अधिक आप परमेश्वर के वचनों का पालन करेंगे, उतना ही अधिक उसके सत्य के प्रति अभिलाषा का सबूत होगा। जो लोग परमेश्वर के वचन की लालसा नहीं करते हैं वे बिना जीवन के होते हैं। ऐसे लोग वे हैं जो परमेश्वर के वचनों से बाहर ही रहते हैं और जो धर्म से सम्बधित होते हैं। जो लोग सचमुच परमेश्वर पर विश्वास करते हैं उन्हें परमेश्वर के वचनों की और भी अधिक गहरी समझ होती है क्योंकि वे परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते हैं। यदि आप परमेश्वर के वचनों की अभिलाषा नहीं करते हैं तो आप वास्तव में उसके वचन को खा और पी नहीं सकते हैं और यदि आपको परमेश्वर के वचनों का ज्ञान नहीं है, तो आप किसी भी प्रकार से परमेश्वर की गवाही नहीं दे सकते या उसे संतुष्ट नहीं कर सकते हैं।

28 सित॰ 2017

परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है


परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है

परमेश्वर के छह हज़ार साल की प्रबंधन योजना का अंत आ रहा है, और उसके राज्य का द्वार उन सभी के लिए खोल दिया गया है, जो परमेश्वर के प्रकट होने की खोज कर रहे हैं। प्रिय भाइयों और बहनों, आप किस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं? ऐसा क्या है जिसकी आप खोज कर रहे हैं? क्या आप परमेश्वर के प्रकट होने का इंतजार कर रहे हैं? क्या आप परमेश्वर के पदचिन्हों की खोज कर रहे हैं? परमेश्वर का प्रकट होना कितना इच्छित है! और परमेश्वर के पदचिन्हों को खोजना कितना मुश्किल है! एक ऐसे युग में, एक ऐसे संसार में, हमें परमेश्वर के प्रकट होने के दिन का गवाह बनने के लिए क्या करना चाहिए? हमें परमेश्वर के पदचिन्हों का अनुसरण करने के लिए क्या करना चाहिए? इस तरह के प्रश्नों का सामना वे सभी करते हैं जो परमेश्वर के प्रकट होने का इंतजार करते हैं। आपने उन सभी पर एक से अधिक अवसर पर विचार किया है - लेकिन किस परिणाम के साथ? परमेश्वर कहाँ प्रकट होते हैं? परमेश्वर के पदचिन्ह कहाँ हैं? क्या आपको उत्तर मिला है? कई लोगों का उत्तर यह होगाः परमेश्वर उनके बीच में प्रकट होता है जो उसका अनुसरण करते हैं और उसके पदचिन्ह हमारे बीच में हैं; यह इतना आसान है! कोई भी व्यक्ति एक सूत्रबद्ध उत्तर दे सकता है, लेकिन क्या आप परमेश्वर के प्रकटीकरण को, और परमेश्वर के पदचिन्ह को समझते हैं? परमेश्वर का प्रकट होना पृथ्वी पर कार्य करने के लिए उसके व्यक्तिगत आगमन को दर्शाता है। उसकी स्वयं की पहचान और स्वभाव के साथ, और उनके निहित विधि में, वह एक युग की शुरुआत और एक युग के समाप्त होने के कार्य का संचालन करने के लिए मनुष्यों के बीच में उतरता है।

26 सित॰ 2017

परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है


परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है


जब आप रोते हुए इस संसार में आए, उस समय से लेकर आपने अपना कार्य करना प्रारम्भ कर दिया था। आप परमेश्वर की योजना और विधान में अपनी भूमिका को अपना लेते हैं। आपने अपने जीवन की यात्रा प्रारम्भ कर दी है। आपकी कैसी भी पृष्ठभूमि हो और आपके सामने कैसी भी यात्रा हो, स्वर्ग में रखी हुई योजनाओं और प्रबंधों से कोई भी बचकर नहीं भाग सकता और कोई भी अपने भाग्य का नियंत्रण नहीं कर सकता, क्योंकि जो सभी बातों पर शासन करता है वही केवल ऐसे कार्यों को करने के योग्य है। जब से मनुष्य अस्तित्व में आया, परमेश्वर अपने कार्य में लगा हुआ है, इस ब्रह्माण्ड का प्रबंधन करने और सभी बातों के परिवर्तन एवं संचालन में निर्देश देता है। सभी बातों की तरह, परमेश्वर से मनुष्य चुपचाप और अनजाने में मिठास, बारिश और ओस का पोषण प्राप्त करता है। सभी बातों के समान, मनुष्य अनजाने में परमेश्वर के हाथ की योजनाओं के अधीनता में रहता है। मनुष्य का हृदय और आत्मा परमेश्वर के हाथ में है और मनुष्य का सम्पूर्ण जीवन परमेश्वर की आंखों के सामने है। चाहे आप इस बात पर विश्वास करें या न करें, परमेश्वर के विचारों के अनुसार सभी चीजों में, चाहे वे जीवित हों या मृत, बदलाव, परिवर्तन, नवीनीकरण और विलोपन परमेश्वर की इच्छा से होता है। इस प्रकार से परमेश्वर सभी बातों पर शासन करता है।

25 सित॰ 2017

वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है?


वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है?


परमेश्वर का कार्य निरंतर आगे बढ़ता रहता है, और यद्यपि उसके कार्य का प्रयोजन नहीं बदलता है, जिस मायनों वह कार्य करता है वो निरंतर बदलते रहते हैं, और फलस्वरूप वे लोग भी बदलते रहते हैं जो उसका अनुसरण करते हैं। जितना अधिक परमेश्वर का कार्य होगा, उतना ही अधिक मनुष्य परमेश्वर को जानेगा, और मनुष्य का स्वभाव भी परमेश्वर के कार्य के साथ बदलेगा। हालाँकि, ऐसा इसलिए है कि परमेश्वर का कार्य हमेशा बदलता रहता है कि जो लोग पवित्र आत्मा के कार्य के बारे में नहीं जानते हैं और सत्य को न जानने वाले विवेकहीन लोग परमेश्वर के विरोधी बन जाते हैं। कभी भी परमेश्वर का कार्य मनुष्यों की धारणाओं के अनुरूप नहीं होता है, क्योंकि उसका कार्य हमेशा नया होता है और कभी भी पुराना नहीं होता है। न ही वह कभी पुराने कार्य को दोहराता है बल्कि पहले कभी नहीं किए गए कार्य के साथ आगे बढ़ जाता है। जिस प्रकार परमेश्वर अपने कार्य को दोहराता नहीं है और मनुष्य परमेश्वर द्वारा अतीत में किए गए कार्य के आधार पर निरपवाद रूप से उसके आज के काम का निर्णय करता है, नए युग के कार्य के प्रत्येक चरण को करना परमेश्वर के लिए अत्यंत कठिन है। मनुष्य बहुत अधिक बाधाएँ प्रस्तुत करता है! मनुष्य की सोच बहुत ही ओछी है! कोई भी मनुष्य परमेश्वर के कार्य को नहीं जानता है, फिर भी वह ऐसे कार्य की व्याख्या करता है। परमेश्वर से दूर होकर, मनुष्य जीवन, सत्य और परमेश्वर की आशीषों को खो देता है, फिर भी मनुष्य न तो सत्य, और न ही जीवन को ग्रहण करता है, परमेश्वर द्वारा मानवजाति को प्रदान किए जा रहे आशीषों को तो और भी कम ग्रहण करता है।इससे कम परमेश्वर मनुष्यों पर महान आशीषें उण्डेलता है। प्रत्येक मनुष्य परमेश्वर को प्राप्त करना चाहता है फिर भी परमेश्वर के कार्य में हुए किसी भी बदलाव को सहने में असमर्थ है। जो परमेश्वर के नए कार्य को स्वीकार नहीं करते हैं वे यह विश्वास करते हैं कि परमेश्वर का कार्य अपरिवर्तनशील है, और कि परमेश्वर का कार्य हमेशा एक ठहराव पर रहता है। उनके विश्वास के अनुसार, परमेश्वर से जो कुछ भी शाश्वत उद्धार प्राप्त करने के लिए आवश्यक है वह है व्यवस्था को बनाए रखना, और जब तक वे पश्चाताप करते और अपने पापों को स्वीकार करते हैं, तब तक परमेश्वर का हृदय हमेशा संतुष्ट रहेगा। वे इस विचार के हैं कि परमेश्वर केवल वही हो सकता है जो व्यवस्था के अधीन है और जिसे मनुष्य के लिए क्रूस पर चढ़ाया गया था; उनका यह भी विचार है कि परमेश्वर बाइबल से बढ़कर नही होना चाहिए और नही हो सकता है।

15 सित॰ 2017

सर्वशक्तिमान का आह भरना

सर्वशक्तिमान का आह भरना


आपके हृदय में एक ज़बरदस्त रहस्य है। आप नहीं जान पाते क्योंकि आप एक ऐसे संसार में जीवन बिता रहे हैं जहां रोशनी नहीं है। आपका हृदय और आपकी आत्मा दुष्ट शक्ति द्वारा दबोच ली गई है। आपकी आंखों को अंधकार ने ढक लिया है, आप सूर्य को आकाश में नहीं देख सकते, न ही रात में टिमटिमाते तारों को। आपके कान धोखा देने वाले शब्दों से जाम हो गए हैं और आप यहोवा की गर्जन वाली आवाज को सुन नहीं पाते हैं, न ही सिंहासन से तेज बहते जल की आवाज को। जो जो आपका था और सर्वशक्तिमान ने जो आपको दिया था सब कुछ आपने खो दिया है। आप कड़वाहट के एक अथाह सागर में प्रवेश कर चुके हैं, जहां बच पाने का सामर्थ नहीं है, जीवित बचने की आशा नहीं है, बस संघर्ष और हलचल मचाने के लिये बचे हुए हैं... उस घड़ी से लेकर आप बुरी शक्ति के द्वारा यातना सहने के लिए विनाश की नियति में हो, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आशीषों से बहुत दूरी पर हो, सर्वशक्तिमान की पूर्वयोजनाओं से भी दूर, और आप लौट न पाने वाली सड़क पर भटक रहे हो। लाखों पुकार न आपके हृदय को और न आपकी आत्मा को जगा पाएंगी।। आप दुष्ट शक्ति की बाहों में गहरी नींद लेते हो, जिसने आपको काल्पनिक संसार में बिना किसी दिशा के और बिना किसी स्पष्ट सड़क के, ललचाकर खींच लिया है। अब यहीं से आपने अपनी मूल पवित्रता को, मासूमियत को खो दिया है, और सर्वशक्तिमान की देखभाल से छिपने लगे हो। वह दुष्ट शक्ति आपके हृदय को चलाती है और आपका जीवन बन जाती है। अब आप उससे डरते नहीं हैं, उसे नजरअंदाज नहीं करते, उस पर संदेह नहीं करते। बल्कि उसे तो आप अपने हृदय का ईश्वर समझने लगते हैं। वह आपके मन की मूरत बन जाता है, उसकी आराधना करते हो, उसकी परछाई समान सदैव साथ रहते हो, और पारस्परिक रूप से जीवन और मृत्यु में एक दूसरे के लिए वचनबद्ध हो जाते हो। आपको कोई अंदाज़ा नहीं कि आपका अस्तित्व कहां से प्राप्त हुआ, आप अस्तित्व में क्यों हैं, या आप क्यों मरते हैं? आपके लिए सर्वशक्तिमान एक अजनबी सा हो गया है, आप उसके मूल अमर व्यक्तित्व को नहीं जानते हो, उसका कार्य जो आपके लिए उसने किया है, उसको भी भुला बैठे हो। उसका प्रत्येक कार्य आपको घृणित लगने लगा है। न आप उनसे प्रसन्न हो और न उनकी कीमत जानते हो। परमेश्वर से पोषण प्राप्त करने के उसी दिन से आप उस दुष्ट शक्ति के साथ चलते आ रहे हो।

14 सित॰ 2017

केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है

केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है

जीवन का मार्ग कोई साधारण चीज़ नहीं है जो चाहे कोई भी प्राप्त कर ले, न ही इसे सभी के द्वारा आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यह इसलिए कि जीवन केवल परमेश्वर से ही आता है, कहने का अर्थ है कि केवल स्वयं परमेश्वर ही जीवन के तत्व का अधिकारी है, स्वयं परमेश्वर के बिना जीवन का मार्ग नहीं है, और इसलिए केवल परमेश्वर ही जीवन का स्रोत है, और जीवन के जल का सदा बहने वाला सोता है। जब से उसने संसार को रचा है, परमेश्वर ने बहुत सा कार्य जीवन को महत्वपूर्ण बनाने के लिये किया है, बहुत सारा कार्य मनुष्य को जीवन प्रदान करने के लिए किया है और बहुत अधिक मूल्य चुकाया है ताकि मनुष्य जीवन को प्राप्त करे, क्योंकि परमेश्वर स्वयं ही अनन्त जीवन है, और वह स्वयं ही वह मार्ग है जिससे मनुष्य नया जन्म लेता है। परमेश्वर मनुष्य के हृदय से कभी भी दूर नहीं रहा है और हर समय उनके मध्य में रहता है। वह मनुष्यों के जीवन यापन की असली ताकत है, मनुष्य के अस्तित्व का आधार है, जन्म के बाद मनुष्य के अस्तित्व के लिए उर्वर संचय है। वह मनुष्य को नया जन्म लेने देता है, और प्रत्येक भूमिका में दृढ़तापूर्वक जीने के लिये सक्षम बनाता है। उसकी सामर्थ्य के लिए और उसकी सदा जीवित रहने वाली जीवन की शक्ति के लिए धन्यवाद, मनुष्य पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रहता है, जिसके द्वारा परमेश्वर के जीवन की सामर्थ्य मनुष्य के अस्तित्व के लिए मुख्य आधार बनती है और जिसके लिए परमेश्वर ने कीमत चुकाई है जिसे कोई भी साधारण मनुष्य कभी भी नहीं चुका सकता। परमेश्वर की जीवन शक्ति किसी भी शक्ति पर प्रभुत्व कर सकती है; इसके अलावा, वह किसी भी शक्ति से अधिक है। उसका जीवन अनन्त काल का है, उसकी सामर्थ्य असाधारण है, और उसके जीवन की शक्ति आसानी से किसी भी प्राणी या शत्रु की शक्ति से पराजित नहीं हो सकती। परमेश्वर की जीवन-शक्ति का अस्तित्व है, और अपनी शानदार चमक से चमकती है, चाहे वह कोई भी समय या स्थान क्यों न हो। परमेश्वर का जीवन सम्पूर्ण स्वर्ग और पृथ्वी की उथल-पुथल के मध्य हमेशा के लिए अपरिवर्तित रहता है।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...