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20 मई 2019

"एक मृत व्‍यक्ति के पुनरुत्‍थान" का रहस्‍य

ली चेंग
भाइयो और बहनो, आप सबको शांति मिले! प्रभु की तैयारियों के लिए उनका आभार, जिनकी वजह से हम बाइबल के सत्यों पर यहाँ संवाद करने आए हैं। प्रभु हमारा मार्गदर्शन करें। आज, मैं सभी से "एक मृत व्‍यक्ति के पुनरुत्‍थान" विषय पर चर्चा करना चाहूँगा।
जैसा कि प्रभु में विश्‍वास करने वाले सभी लोग जानते हैं, "एक मृत व्‍यक्ति का पुनरुत्‍थान" यीशु के लौटने के समय से संबंध रखता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसे देखने का हम सभी ईसाई बेताबी से इंतज़ार कर रहे हैं। तो फ़िर, एक "मृत इंसान" का पुनरुत्‍थान किस तरह हो सकता है? कई लोग यहेजकेल की पुस्‍तक के अध्‍याय 37, पद 5-6 के बारे में विचार करेंगे: "परमेश्वर यहोवा तुम हड्डियों से यों कहता है: देखो, मैं आप तुम में साँस समाऊँगा, और तुम जी उठोगी। मैं तुम्हारी नसें उपजाकर मांस चढ़ाऊँगा, और तुम को चमड़े से ढाँपूँगा; और तुम में साँस समाऊँगा और तुम जी जाओगी; और तुम जान लोगी कि मैं यहोवा हूँ।" यूहन्‍ना के सुसमाचार, अध्‍याय 6, पद 39 में यीशु ने कहा था: "और मेरे भेजनेवाले की इच्छा यह है कि जो कुछ उसने मुझे दिया है, उस में से मैं कुछ न खोऊँ, परन्तु उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊँ।

19 मई 2019

प्रभु यीशु ने स्वर्ग राज्य की चाबियाँ पेत्रुस को क्यों दीं

यांग किंग
बाइबल पढ़कर चकराना
जब मैं सुबह जल्दी उठ गयी, तो मैंने प्रार्थना की, फिर बाइबल में मत्ती 16:19 खोला, जहाँ प्रभु यीशु पतरस से कहते हैं: "मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियाँ दूँगा: और जो कुछ तू पृथ्वी पर बाँधेगा, वह स्वर्ग में बंधेगा; और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा, वह स्वर्ग में खुलेगा।" बाइबल के इस अवतरण को पढ़कर, मैं यह सोचते हुए उलझन में पड़ गयी: "पतरस ने कोई महान काम नहीं किया और न ही उसके लिखे पत्र ही बहुत प्रसिद्ध थे। उस पर, जब प्रभु यीशु को गिरफ्तार किया गया और वे सुनवाई के लिए खड़े हुए, तो पतरस ने उन्हें तीन बार अस्वीकार कर दिया। प्रभु ने अन्य शिष्यों को स्वर्ग के राज्य की चाबियाँ क्यों नहीं दीं, केवल पतरस को ही क्यों दी?" मैंने धर्मशास्त्रों में बहुत खोजा, लेकिन कुछ भी मेरे भ्रम को दूर नहीं कर पा रहा था। मेरे पास काम पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

18 मई 2019

एक ईसाई के रूप में, नियमित रूप से सभाओं में भाग लेने अवहेलना नहीं की जा सकती!

शियाओगाओ
आध्‍यात्मिक प्रश्नोत्तर में शामिल होने वाले भाई-बहनों को मेरा नमस्कार,
मैं दिन के वक्‍़त काम करके बहुत थक जाती हूँ, और इस कारण रात में ठीक से सो नहीं पाती। नतीजतन, मैं सभाओं में समय पर पहुँच पाने को तैयार नहीं हूँ। मैं सीमित होकर रहना पसंद नहीं करती। मुझे लगता है कि आध्‍यात्मिक ज़रूरतें होने पर ही अगर मैं अपने भाई-बहनों से चर्चा करने के लिए मिल सकूं, तो वह ठीक रहेगा। मैं यह जानने को उत्‍सुक हूँ कि इस समस्या का कारण क्‍या है। इसका समाधान मैं किस प्रकार करूं।
एन जिंग
नमस्‍ते एन जिंग बहन,
आपने कहा कि आप समय पर सभा में शामिल होने के लिए तैयार नहीं हैं और आप ऐसा महसूस करती हैं कि जब आपकी आध्‍यात्मिक ज़रूरतें होंगी, तभी आप अपने भाई-बहनों को चर्चा करने के लिए तत्परता से खोजेंगी। हम ऐसा सोच सकते हैं क्‍योंकि हम परमेश्‍वर में सच्‍चे विश्‍वास के सही मायनों और सभाओं के महत्‍व को नहीं समझते। प्रभु का धन्यवाद। मैं इस पहलू पर अपनी समझ के बारे में थोड़ी बात करूंगी। यह चर्चा आपके लिए उपयोगी होगी, ऐसी आशा करती हूँ।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...