- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- वही पात्र हैं सेवा के जो अंतरंग हैं परमेश्वर के
- I
- जो करते सेवा परमेश्वर की, वही होने चाहिये अंतरंग उसके,
- प्रिय हों परमेश्वर को, निष्ठावान हों परमेश्वर के।
- काम करो सामने या पीठ पीछे दूसरों की,
- परमेश्वर का आनंद पाते हो तुम,
- और अडिग रहोगे सम्मुख परमेश्वर के तुम।
- चाहे जैसा बर्ताव करें दूसरे तुमसे,
- चलोगे राह अपनी ही तुम,
- परमेश्वर के दायित्व की परवाह करोगे तुम।
- यही है परमेश्वर का अंतरंग होना।
- यही है परमेश्वर का अंतरंग होना।
- परमेश्वर के अंतरंग हैं विश्वासपात्र उसके।
- चिंताएं और ज़रूरत उसकी, वे करते हैं संग साझा उसके।
- है कष्टकर, दुर्बल काया उनकी, सह लेते वे दर्द फिर भी,
- त्यागते हैं परमेश्वर की संतुष्टि की ख़ातिर, जो प्रिय है उन्हें।
- II
- परमेश्वर के अंतरंग कर पाते हैं सेवा उसकी
- क्योंकि दिया जाता है परमेश्वर का आदेश और दायित्व उनको।
- ले पाते हैं वे अपने दिल की तरह, परमेश्वर के दिल को,
- बिना ख़्याल किये, गँवाएंगे या पाएंगे।
- बिना संभावनाओं के भी,
- कर लेंगे यकीन ईश्वर-प्रेमी हृदय से वे।
- इस तरह का इंसान, कहलाता है अंतरंग परमेश्वर का।
- यही है परमेश्वर का अंतरंग होना।
- यही है परमेश्वर का अंतरंग होना।
- परमेश्वर के अंतरंग हैं विश्वासपात्र उसके।
- चिंताएं और ज़रूरत उसकी, वे करते हैं संग साझा उसके।
- है कष्टकर, दुर्बल काया उनकी, सह लेते वे दर्द फिर भी,
- त्यागते हैं परमेश्वर की संतुष्टि की ख़ातिर, जो प्रिय है उन्हें।
- III
- देता है परमेश्वर अधिक दायित्व इस तरह के लोगों को।
- व्यक्त करता है इनके ज़रिये वो करेगा जो।
- लिहाज़ा, करता है प्रेम परमेश्वर इस तरह के लोगों को।
- सेवक हैं वही जो अनुरूप हैं उसके दिल के।
- परमेश्वर के अंतरंग हैं विश्वासपात्र उसके।
- चिंताएं और ज़रूरत उसकी, वे करते हैं संग साझा उसके।
- है कष्टकर, दुर्बल काया उनकी, सह लेते वे दर्द फिर भी,
- त्यागते हैं परमेश्वर की संतुष्टि की ख़ातिर, जो प्रिय है उन्हें।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- अनुशंसित: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया - केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो
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