तथास्तु लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
तथास्तु लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

21 सित॰ 2018

वही पात्र हैं सेवा के जो अंतरंग हैं परमेश्वर के

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • वही पात्र हैं सेवा के जो अंतरंग हैं परमेश्वर के
  •  
  • I
  • जो करते सेवा परमेश्वर की, वही होने चाहिये अंतरंग उसके,
  • प्रिय हों परमेश्वर को, निष्ठावान हों परमेश्वर के।
  • काम करो सामने या पीठ पीछे दूसरों की,
  • परमेश्वर का आनंद पाते हो तुम,
  • और अडिग रहोगे सम्मुख परमेश्वर के तुम।
  • चाहे जैसा बर्ताव करें दूसरे तुमसे,
  • चलोगे राह अपनी ही तुम,
  • परमेश्वर के दायित्व की परवाह करोगे तुम।
  • यही है परमेश्वर का अंतरंग होना।
  • यही है परमेश्वर का अंतरंग होना।
  • परमेश्वर के अंतरंग हैं विश्वासपात्र उसके।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...