- यातनाओं के दौरान सिर्फ़ विजयी लोग अडिग रहते हैं
- I
- राज्य के युग में,
- मानवता हो जाएगी पूरी,
- राज्य के युग में हो जाएगी पूरी तरह से पूर्ण।
- जब विजय का काम हो जाएगा पूरा,
- तो गुज़रेंगे वे शुद्धिकरण और यातना से,
- जब विजय हो जाएगी पूरी।
- जो होंगे विजयी,
- इस यातना से गुज़रकर देंगे जो गवाही,
- वही हैं जो अंत में
- किए जाएंगे पूर्ण, बनेंगे वही विजयी।
- II
- इन सभी यातनाओं के दौरान,
- इंसान के शुद्धिकरण की होती है उम्मीद।
- यह है परमेश्वर के काम का अंतिम चरण,
- परमेश्वर के प्रबंधन कार्य की समाप्ति से पहले
- अंतिम बार जब होता है इंसान का शुद्धिकरण।
- जो करते हैं अनुसरण, उन्हें करना होगा इस परीक्षा को स्वीकार।
- जो होंगे विजयी,
- इस यातना से गुज़रकर देंगे जो गवाही,
- वही हैं जो अंत में
- किए जाएंगे पूर्ण, बनेंगे वही विजयी।
- III
- जो लोग करेंगे यातना का सामना,
- होगी नहीं उनके पास परमेश्वर की रहनुमाई, आत्मा का काम।
- लेकिन परमेश्वर की तलाश में जिन पर की जाएगी विजय प्राप्त,
- वे रहेंगे खड़े।
- परमेश्वर कुछ भी करे,
- उनका दर्शन रहेगा उनके पास,
- गवाही देते हुए, करेंगे वे सत्य का अभ्यास।
- यही होंगे जो निकलेंगे आगे यातना से।
- यही होंगे वो,
- जिनमें होगी मानवता,
- जो सच में करते होंगे परमेश्वर से प्यार।
- जो होंगे विजयी,
- इस यातना से गुज़रकर देंगे जो गवाही,
- वही हैं जो अंत में
- किए जाएंगे पूर्ण, बनेंगे वही विजयी।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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