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12 दिस॰ 2018

तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक


6000 वर्षों के दौरान कार्य की समग्रता समय के साथ धीरे-धीरे बदल गई है। इस कार्य में बदलाव समस्त संसार की परिस्थितियों के अनुसार हुए हैं। परमेश्वर का प्रबंधन का कार्य केवल मानवजाति के पूर्णरूपेण विकास की प्रवृत्ति के अनुसार धीरे-धीरे रूपान्तरित हुआ है; सृष्टि के आरंभ में इसकी पहले से योजना नहीं बनाई गई थी। संसार का सृजन करने से पहले, या इसके सृजन के ठीक बाद, यहोवा ने अभी तक कार्य के प्रथम चरण, व्यवस्था की; कार्य के दूसरे चरण—अनुग्रह की; और कार्य के तीसरे चरण—जीतने की योजना नहीं बनायी थी, जिनमें वह सबसे पहले लोगों के एक समूह—मोआब के कुछ वंशजों के बीच कार्य करता, और इससे वह समस्त ब्रह्माण्ड को जीतता।

9 दिस॰ 2018

मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक


मनुष्य आज के कार्य एवं भविष्य के कार्य के विषय में थोड़ा बहुत ही जानता है, परन्तु वह उस मंज़िल को नहीं समझता जिसमें मानवजाति प्रवेश करेगी। एक प्राणी होने के नाते, मनुष्य को एक प्राणी के कर्तव्य को निभाना चाहिएः जो कुछ परमेश्वर करता है उसमें उसे उसका अनुसरण करना चाहिए, और जो भी तरीका मैं आप लोगों को बताता हूँ उसमें आप सब को आगे बढ़ना चाहिए। आपके पास स्वयं के लिए इंतज़ाम करने का कोई तरीका नहीं है, और आप स्वयं का नियन्त्रण करने में असमर्थ हैं; सब कुछ परमेश्वर की दया पर छोड़ दिया जाना चाहिए, और हर एक चीज़ उसके हाथों के द्वारा नियन्त्रित होती है।

24 सित॰ 2018

गरिमामय है सार परमेश्वर का

  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • गरिमामय है सार परमेश्वर का
  •  
  • I
  • परमेश्वर के सार का है एक हिस्सा प्यार, उसकी दया मिलती है सबको,
  • भूल जाते हैं लोग मगर, उसका एक हिस्सा गरिमा भी है।
  • परमेश्वर में प्यार है, मगर ये मायने नहीं इसके
  • कि ठेस पहुँचाई जा सकती है उसे,
  • और महसूस न हो उसे या प्रतिक्रिया न हो उसकी।
  • परमेश्वर को परिभाषित करने की ख़ातिर,
  • इंसानी कल्पनाओं का सहारा न ले,
  • न थोप अपनी ख़्वाहिश उस पर,
  • और जिस तरह पेश आता है वो इंसानों से, इंसानों से,
  • उसमें इंसानी तौर-तरीके अपनाए वो,
  • इसकी ख़ातिर मजबूर न कर उसको।

22 सित॰ 2018

राज्य-गान (II) आगमन हुआ है परमेश्वर का, राजा है परमेश्वर

  • राज्य-गान
  • (II) आगमन हुआ है परमेश्वर का, राजा है परमेश्वर

  •  
  • I
  • इस अपूर्व लम्हे में, हर्ष के समय में,
  • ज़मीं पर और आसमाँ में कर रहे यशगान सब।
  • है कौन न जो उत्साहित हो? है कौन न जो आनंदित हो?
  • इस अवसर पर किसके न आँसू छलकें?
  • ये स्वर्ग नहीं जो पहले था, ये स्वर्ग है राज्य का।
  • ये धरा नहीं जो पहले थी, ये निर्मलता की धरती है।
  • घनघोर बारिश पड़ने के बाद, जो मलिन जगत था, पूरा बदल गया,
  • जो मलिन जगत था, पूरा बदल गया।

1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...