परमेश्वर ने मनुष्यों को बहुत कुछ सौंपा है और अनगिनत प्रकार से उनके प्रवेश को संबोधित किया है। परंतु क्योंकि लोगों की क्षमता बहुत कम है, इसलिए परमेश्वर के बहुत सारे वचन जड़ पकड़ने में असफल रहे हैं। क्षमता के कम होने के विभिन्न कारण हैं, जैसे कि मनुष्य के विचार और नैतिकता की भ्रष्टता, और उचित पालन-पोषण की कमी; सामंती अंधविश्वास जिन्होंने मनुष्य के हृदय को बुरी तरह से जकड़ लिया है; भ्रष्ट और पतनशील जीवन-शैलियाँ जिन्होंने मनुष्य के हृदय की गहराई में कई बुराइयों को स्थापित कर दिया है; सांस्कृतिक ज्ञान की सतही समझ, लगभग अठानवे प्रतिशत लोगों में सांस्कृतिक ज्ञान की शिक्षा की कमी और यही नहीं, बहुत कम लोगों का उच्च-स्तर की सांस्कृतिक शिक्षा को प्राप्त करना, इसलिए मूल रूप से लोगों को यह पता ही नहीं है कि परमेश्वर या पवित्र आत्मा का क्या अर्थ है, परंतु उनके पास सामंती अंधविश्वासों से प्राप्त परमेश्वर की केवल एक धुंधली और अस्पष्ट तस्वीर है; वे घातक प्रभाव जो हज़ारों वर्षो की "राष्ट्रवाद की अभिमानी आत्मा" द्वारा मनुष्य के हृदय की गहराई में छोड़े गए तथा सामंती विचारधारा जिसके द्वारा लोग बिना स्वतंत्रता के, महत्वकांक्षा रखने और आगे बढ़ने की इच्छा के बिना, प्रगति करने की अभिलाषा के बिना, बल्कि निष्क्रिय रहने और पीछे की ओर जाने और गुलाम मानसिकता से घिरे होने के कारण बंधे और जकड़े हुए हैं।
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8 जन॰ 2019
16 दिस॰ 2018
राज्य का युग वचन का युग है भाग एक
राज्य के युग में, परमेश्वर नए युग की शुरूआत करने, अपने कार्य के साधन बदलने, और संपूर्ण युग में काम करने के लिये अपने वचन का उपयोग करता है। वचन के युग में यही वह सिद्धांत है, जिसके द्वारा परमेश्वर कार्य करता है। वह देहधारी हुआ ताकि विभिन्न दृष्टिकोणों से बातचीत कर सके, मनुष्य वास्तव में परमेश्वर को देख सके, जो देह में प्रकट होने वाला वचन है, और उसकी बुद्धि और आश्चर्य को जान सके। उसने यह कार्य इसलिए किये ताकि वह मनुष्यों को जीतने, उन्हें पूर्ण बनाने और ख़त्म करने के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से हासिल कर सके। वचन के युग में वचन को उपयोग करने का यही वास्तविक अर्थ है।
16 जुल॰ 2018
परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है
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परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है
बहुत सारी ऐसी चीज़ें हैं जिनके विषय में मैं आशा करता हूँ कि आप उसे प्राप्त करेंगे। फिर भी, आपकी गतिविधियाँ और आपका जीवन मेरी माँगों को सम्पूर्णता से पूरा करने में असमर्थ हैं, इसलिए, सीधे मुद्दे पर आकर अपने दिल और मन की बात आपको समझाता हूं। ये मानते हुए कि आपकी परखने और प्रशंसा करने की योग्यताएँ बेहद कमज़ोर हैं, आप पूरी तरह मेरे विवेक और सार से लगभग बिलकुल अनजान हैं, तो ये अति आवश्यक है कि मैं इसके बारे में आपको सूचित करूँ। इस से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप पहले कितना समझते थे या फिर आप इन विषयों को समझने में इच्छुक हैं कि नहीं, फिर भी मुझे उनके बारे में आपको विस्तारपूर्वक बताना होगा। |
26 जून 2018
वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं
वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं
परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य, मनुष्यों में कैसा प्रभाव प्राप्त किया जाना है, और मनुष्य के प्रति परमेश्वर की इच्छा क्या है, को समझना यही सब बातें हर उस व्यक्ति को उपार्जित करनी चाहिए जो परमेश्वर का अनुसरण करता है। अभी सभी मनुष्यों में जिस चीज का अभाव है, वह है परमेश्वर के कार्य का ज्ञान। मनुष्य न बूझता है और न ही समझता है कि वास्तव में कौन सी चीज मनुष्य में परमेश्वर के कर्म, परमेश्वर के समस्त कार्य को, और सृष्टि की रचना के बाद से परमेश्वर की इच्छा को निर्मित करती है। यह अपर्याप्तता न केवल समस्त धार्मिक जगत में देखी जाती है, बल्कि इसके अलावा परमेश्वर के सभी विश्वासियों में भी देखी जाती है।
23 जून 2018
परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए
परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए
तुम परमेश्वर में विश्वास क्यों करते हो? अधिकांश लोग इस प्रश्न से हैरान हैं। उनके पास व्यावहारिक परमेश्वर और स्वर्ग के परमेश्वर के बारे में हमेशा से बिलकुल दो भिन्न दृष्टिकोण रहे हैं, जो दिखाता है कि वे आज्ञापालन के लिए नहीं, बल्कि कुछ निश्चित लाभों को प्राप्त करने, या विपत्तियों के कष्ट से बच निकलने के लिए परमेश्वर पर विश्वास करते हैं। केवल तभी वे थोड़ा बहुत आज्ञाकारी होते हैं, किन्तु उनकी आज्ञाकारिता सशर्त है, यह उनकी स्वयं की व्यक्तिगत भावी संभावनाओं के वास्ते है, और जो उन पर जबरदस्ती डाली जाती है। इसलिए: तुम परमेश्वर पर विश्वास क्यों करते हो? यदि यह केवल तुम्हारी संभावनाओं, और तुम्हारे भाग्य के लिए है, तो बेहतर है कि तुम विश्वास ही मत करो। इस प्रकार का विश्वास आत्म-वंचना, आत्म-आश्वासन, और आत्म-प्रशंसा है। यदि तुम्हारा विश्वास परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता की नींव पर नहीं बना है, तो अंततः तुम्हें परमेश्वर का विरोध करने के परिणामस्वरूप दण्डित किया जाएगा। वे सभी जो अपने विश्वास में परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता की खोज नहीं करते हैं परमेश्वर का विरोध करते हैं। परमेश्वर कहता है कि लोग सत्य की खोज करें, कि वे परमेश्वर के वचन के लिए प्यासे हों, और परमेश्वर के वचनों को खाएँ एवं पीएँ, और उन्हें अभ्यास में लाएँ, ताकि वे परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता को प्राप्त कर सकें। यदि तुम्हारी प्रेरणाएँ सचमुच में इस प्रकार की हैं, तो परमेश्वर निश्चित रूप से तुम्हें उठाएगा, और वह निश्चित रूप से तुम्हारे प्रति अनुग्रहपूर्ण होगा। कोई भी इस पर सन्देह नहीं कर सकता है, और कोई भी इसे बदल नहीं सकता है।
22 जून 2018
परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है
परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है
परमेश्वर के छह हज़ार साल की प्रबंधन योजना का अंत आ रहा है, और उसके राज्य का द्वार उन सभी के लिए खोल दिया गया है, जो परमेश्वर के प्रकट होने की खोज कर रहे हैं। प्रिय भाइयों और बहनों, तुम लोग किस बात की प्रतीक्षा कर रहे हो? ऐसा क्या है जिसकी तुम लोग खोज कर रहे हो? क्या तुम लोग परमेश्वर के प्रकट होने का इंतजार कर रहे हो? क्या तुम लोग परमेश्वर के पदचिन्हों की खोज कर रहे हो? परमेश्वर का प्रकट होना कितना इच्छित है! और परमेश्वर के पदचिन्हों को खोजना कितना मुश्किल है! एक ऐसे युग में, एक ऐसे संसार में, हमें परमेश्वर के प्रकट होने के दिन का गवाह बनने के लिए क्या करना चाहिए? हमें परमेश्वर के पदचिन्हों का अनुसरण करने के लिए क्या करना चाहिए? इस तरह के प्रश्नों का सामना वे सभी करते हैं जो परमेश्वर के प्रकट होने का इंतजार करते हैं। तुम लोगों ने उन सभी पर एक से अधिक अवसर पर विचार किया है — लेकिन किस परिणाम के साथ? परमेश्वर कहाँ प्रकट होता है? परमेश्वर के पदचिन्ह कहाँ हैं? क्या तुम लोगों को उत्तर मिला है? कई लोगों का उत्तर यह होगाः परमेश्वर उनके बीच में प्रकट होता है जो उसका अनुसरण करते हैं और उसके पदचिन्ह हमारे बीच में हैं; यह इतना आसान है!
14 अप्रैल 2018
अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है (III) परमेश्वर का अधिकार (II)" (भाग 2)
अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है (III) परमेश्वर का अधिकार (II)" (भाग 2)
इस वीडियो में परमेश्वर के वचन "वचन देह में प्रकट हुआ से आगे जारी" पुस्तक से हैं। इस वीडियो की सामग्री:
एक मनुष्य के जीवन में छ: घटनाक्रम
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1. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है? अगर कोई केवल प्रभु के लिए मिशनरी (धर्म-प्रचार सम्बन्धी) काम करता है, तो क्या यह परमेश्वर की इच्छा का पालन करना है?
XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाह...
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आराधना गीत मेरा घर कहां है I अपने नन्हें काग़ज़ पर रंगों से, नन्हा-सा घर बनाती हूं मैं, प्यारी मम्मी घर में है,...
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परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है परमेश्वर भिन्न-भिन्न युगों के अनुसार अपने वचन कहता है और अपना कार्य करता है, तथा ...
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Hindi Christian Song | मेरा घर कहां है (Lyrics) अपने नन्हें काग़ज़ पर रंगों से, नन्हा-सा घर बनाती हूं मैं, प्यारी मम्मी घर में है, ...



